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Siddharthnagar News: मशीन चालू हो तो एक माह के बजाय एक दिन होगी अल्ट्रासाउंड जांच

Tue, 17 Oct 2023 11:01 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 17 Oct 2023 11:01 PM IST
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If the machine is operational, ultrasound examination will be done in one day instead of one month.
मेडिकल कॉलेज में आई है नई तकनीकी की चार आधुनिक जांच मशीन
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एक रेडियाेलाॅजिस्ट के होने के कारण हर मरीज की नहीं हो पाती है जांच

संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड जांच के लिए मरीजों एक माह तक का इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे मेें जिन मरीजों की जांच नहीं हो पाती है, वह निजी केंद्रों पर जाने को विवश हैं। जबकि चार नई और आधुनिक तकनीकी से लैस मशीन आ चुकी हैं। लेकिन रेडियोलॉजिस्ट के नहीं होने के कारण मशीनें धूल फांक रहीं हैं और मरीज परेशान हैं। इस संबंध में प्राचार्य की ओर से शासन को पत्राचार भी किया गया है, लेकिन अभी तक तैनाती नहीं हुई है।

जिला अस्पताल के माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में तब्दील होने के बाद सुविधाओं में इजाफा हो रहा है। अभी तक अल्ट्रासाउंड जांच के लिए एक मशीन थी, लेकिन कुछ माह पहले चार और नई और आधुनिक मशीन आ गई हैं। मेडिकल कॉलेज होने के बाद जहां जांच के लिए 20-30 मरीज आते थे, अब उनकी संख्या बढ़कर 100 पहुंच गई। जबकि एक दिन में 35-40 जांच ही हो पाता है। ऐसे में 60 लोग वेटिंग में हो जाते हैं और उन्हें नंबर देकर बुलाया जाता है। स्थिति यह है कि एक-एक माह तक का नंबर दिया जा रहा है। ऐसे में जिन्हें जांच की बहुत आवश्यकता होती है, वह लोग निजी केंद्र पर जांच कराने के लिए जाते हैं। ऐसे में उन्हें 600-700 रुपये जांच के लिए देना पड़ता है। अगर चार नई मशीन शुरू हो जाएं तो वेटिंग की समस्या दूर हो जाएगा। कारण एक मशीन से एक दिन में 35-40 जांच होती है। और प्रतिदिन 80-100 मरीज जांच के लिए पहुंचते हैं। अगर जांच में मशीन शुरू हो जाए तो प्रतिदिन 150 जांच तक हो जाएगा। ऐसे में जहां मरीजों को नंबर नहीं लगाना पड़ता, वहीं मशीन का लोड कम हो जाता है। लेकिन रेडियोलॉजिस्ट के ना होने के कारण यह समस्या बनी हुई है। जिससे मरीजों को परेशानी हो रही है।
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बोले जिम्मेदार

अल्ट्रासाउंड करने वाली चार नई मशीने मिली हैं। अभी एक रेडियोलॉजी जांच कर रहे हैं। अन्य की तैनाती के लिए कई बार पत्राचार किया गया है। जैसे ही रेडियोलॉजी की तैनाती होती है, अगल- अलग स्थान पर चिन्हि़त करके मशीन चालू करवा दिया जाएगा।
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डॉ. एके झा, प्राचार्य माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
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