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सुबह धूप, दोपहर बाद बूंदाबांदी
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 07 Feb 2016 11:54 PM IST
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रविवार को एक बार फिर मौसम का मिजाज बदल गया। दोपहर बाद अचानक आकाश में बदली छा गयी। तेज हवाओं बाद बूंदाबांदी होने लगी, जो कि देर रात तक जारी रही। बदले मौसम ने लोगों को आमदिनों से अधिक ठंड का अहसास कराया। चूंकि कई दिनों से अच्छी धूप होने की वजह से लोग यह मानकर चल रहे थे कि अब गर्मी ने दस्तक दे दी है।
महाकवि घाघ की कहावत आधा माघे, कंबल कांधे को रविवार को मौसम ने चरितार्थ कर दिया।
सप्ताह भर से सूर्य देव अपने प्रताप को दिखाने में जुटे रहे। दिन के समय लोगों को गर्मी का अहसास होता रहा, लेकिन शाम ढलने के साथ ही ठंड हावी रही। सुबह से आकाश साफ रहा, दोपहर तक धूप खिली रही।
दो बजे के करीब आसमान पर एकाएक बादल छा गए। हल्की ठंडी हवाएं बहने लगी। शाम पांच बजते-बजते हल्की बूंदे गिरनी शुरू हो गई। बढ़नी क्षेत्र के ग्राम औदही कलां निवासी किसान मयंक पांडेय के अनुसार गेहूं की फसल में बाली फूटने तक तापमान का औसत 7 से 8 डिग्री होना चाहिए।
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रोजाना तेज धूप निकलने से पारा ऊपर चढ़ने लगा था। खेत में नमी होनी आवश्यक है, पानी की सिंचाई भी होनी चाहिए। इस बूंदाबांदी से सिंचाई तो उतनी नहीं हो सकी, लेकिन आसमान से गिरने वाले पानी से खेती को लाभ पहुंचता है।
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महाकवि घाघ की कहावत आधा माघे, कंबल कांधे को रविवार को मौसम ने चरितार्थ कर दिया।
सप्ताह भर से सूर्य देव अपने प्रताप को दिखाने में जुटे रहे। दिन के समय लोगों को गर्मी का अहसास होता रहा, लेकिन शाम ढलने के साथ ही ठंड हावी रही। सुबह से आकाश साफ रहा, दोपहर तक धूप खिली रही।
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दो बजे के करीब आसमान पर एकाएक बादल छा गए। हल्की ठंडी हवाएं बहने लगी। शाम पांच बजते-बजते हल्की बूंदे गिरनी शुरू हो गई। बढ़नी क्षेत्र के ग्राम औदही कलां निवासी किसान मयंक पांडेय के अनुसार गेहूं की फसल में बाली फूटने तक तापमान का औसत 7 से 8 डिग्री होना चाहिए।
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रोजाना तेज धूप निकलने से पारा ऊपर चढ़ने लगा था। खेत में नमी होनी आवश्यक है, पानी की सिंचाई भी होनी चाहिए। इस बूंदाबांदी से सिंचाई तो उतनी नहीं हो सकी, लेकिन आसमान से गिरने वाले पानी से खेती को लाभ पहुंचता है।