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‘हजरत अली ने दिया नेक रास्ते पर चलने का पैगाम’
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हल्लौर स्थित हजरत अली के रौजे की गई भव्य सजावट।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
‘हजरत अली ने दिया नेक रास्ते पर चलने का पैगाम’
डुमरियागंज। हजरत अली ने हक, सच्चाई और मानवता की भलाई के रास्ते पर चलने का पैगाम दिया। उन्होंने जितनी भी जंग लड़ी, वह इस्लाम व दीन की हिफाजत के लिए थी। आज सभी लोगों को हजरत अली के जीवन और उनके किरदार से सीख लेते हुए हमेशा नेक रास्ते पर चलते रहने का संकल्प लेना चाहिए। ये बातें जाकिर जमाल हैदर व अजीम हैदर रिजवी ने कहीं। वे मंगलवार को शिया समुदाय के पहले इमाम हजरत अली की जयंती पर हल्लौर में आयोजित महफिल को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि हजरत अली के बताए हुए रास्ते पर चलने से ही कौम और समाज की भलाई है। हजरत अली ने हमेशा सभी लोगों को सब्र, सच्चाई और मानवता की भलाई के रास्ते पर चलते रहने की शिक्षा दी। मौलाना तफसीर और महबूब ने हजरत अली के जीवन और शख्सियत पर विस्तार से रोशनी डालते हुए लोगों को पैगाम-ए-अली से रू-ब-रू कराया। शायरों ने हजरत अली की शान में कलाम, कसीदा पेश किया। इससे पूर्व, जामा मस्जिद हल्लौर से जुलूस-ए-हैदरी निकाला गया, जिसमें भारी संख्या में अकीदतमंदो ने हिस्सा लिया।
जुलूस, बैदौला चौराहा होते हुए डाक बंगला चौराहा तक गया। हजरत अली की जयंती पर जामा मस्जिद हल्लौर, कर्बला स्थित हजरत अली के रौजे तथा कस्बे में स्थित सभी मस्जिदों और बड़े इमामबाड़ा को सजाया गया। इस दौरान जमीर हसन रिजवी, शमशाद हैदर, ताकीब रिजवी, वजीर हैदर, जमाल, काजिम मेहंदी, कसीम रिजवी, जानशीन, काजिम रजा, आरजू मेहंदी, शब्बीर हसन, अली मेहंदी, आसिफ रिजवी, महबूब हल्लौरी आदि मौजूद रहे।
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डुमरियागंज। हजरत अली ने हक, सच्चाई और मानवता की भलाई के रास्ते पर चलने का पैगाम दिया। उन्होंने जितनी भी जंग लड़ी, वह इस्लाम व दीन की हिफाजत के लिए थी। आज सभी लोगों को हजरत अली के जीवन और उनके किरदार से सीख लेते हुए हमेशा नेक रास्ते पर चलते रहने का संकल्प लेना चाहिए। ये बातें जाकिर जमाल हैदर व अजीम हैदर रिजवी ने कहीं। वे मंगलवार को शिया समुदाय के पहले इमाम हजरत अली की जयंती पर हल्लौर में आयोजित महफिल को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि हजरत अली के बताए हुए रास्ते पर चलने से ही कौम और समाज की भलाई है। हजरत अली ने हमेशा सभी लोगों को सब्र, सच्चाई और मानवता की भलाई के रास्ते पर चलते रहने की शिक्षा दी। मौलाना तफसीर और महबूब ने हजरत अली के जीवन और शख्सियत पर विस्तार से रोशनी डालते हुए लोगों को पैगाम-ए-अली से रू-ब-रू कराया। शायरों ने हजरत अली की शान में कलाम, कसीदा पेश किया। इससे पूर्व, जामा मस्जिद हल्लौर से जुलूस-ए-हैदरी निकाला गया, जिसमें भारी संख्या में अकीदतमंदो ने हिस्सा लिया।
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जुलूस, बैदौला चौराहा होते हुए डाक बंगला चौराहा तक गया। हजरत अली की जयंती पर जामा मस्जिद हल्लौर, कर्बला स्थित हजरत अली के रौजे तथा कस्बे में स्थित सभी मस्जिदों और बड़े इमामबाड़ा को सजाया गया। इस दौरान जमीर हसन रिजवी, शमशाद हैदर, ताकीब रिजवी, वजीर हैदर, जमाल, काजिम मेहंदी, कसीम रिजवी, जानशीन, काजिम रजा, आरजू मेहंदी, शब्बीर हसन, अली मेहंदी, आसिफ रिजवी, महबूब हल्लौरी आदि मौजूद रहे।
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