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Siddharthnagar News: भक्त प्रह्लाद की तरह रखें ईश्वर पर विश्वास
Thu, 12 Feb 2026 12:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 12 Feb 2026 12:20 AM IST
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भनवापुर के अंदुआ शनिचरा में श्रीमद्भभागवत कथा सुनाती कनकेश्वरी। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
भवानीगंज। भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के अंदुआ शनिचरा गांव में मंगलवार की रात श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचक कनकेश्वरी ने भक्त प्रह्लाद की कथा सुनाई। उपस्थित श्रद्धालुओं को बताया कि हर मानव को भक्त प्रह्लाद की तरह ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना चाहिए, क्योंकि भगवान हर समय और हर जगह मौजूद हैं।
कथा के दौरान कथा वाचक ने कहा कि हिरण्यकश्यप ब्रह्मा के वरदान से मद में आ गया और खुद को भगवान मानने लगा। उसकी पत्नी कयाधु के चार पुत्रों में सबसे छोटे प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे। हिरण्यकश्यप ने पूरे राज्य में खुद को भगवान घोषित कर भगवान विष्णु की पूजा पर रोक लगा दी, लेकिन प्रह्लाद ने अपने पिता के आदेश को न मानते हुए विष्णु को ही अपना आराध्य माना।
हिरण्यकश्यप ने अपने गुरु संडमृग के माध्यम से प्रह्लाद में विष्णु के प्रति नफरत पैदा करने का प्रयास किया, लेकिन सभी प्रयास असफल रहे। आखिर हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए खंभे में बांधकर तलवार लेकर हमला करने की कोशिश की। प्रह्लाद की पुकार सुनकर भगवान विष्णु ने नरसिंह रूप धारण कर हिरण्यकश्यप का अंत किया, जिससे भक्त प्रह्लाद की रक्षा हुई।
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भवानीगंज। भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के अंदुआ शनिचरा गांव में मंगलवार की रात श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचक कनकेश्वरी ने भक्त प्रह्लाद की कथा सुनाई। उपस्थित श्रद्धालुओं को बताया कि हर मानव को भक्त प्रह्लाद की तरह ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना चाहिए, क्योंकि भगवान हर समय और हर जगह मौजूद हैं।
कथा के दौरान कथा वाचक ने कहा कि हिरण्यकश्यप ब्रह्मा के वरदान से मद में आ गया और खुद को भगवान मानने लगा। उसकी पत्नी कयाधु के चार पुत्रों में सबसे छोटे प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे। हिरण्यकश्यप ने पूरे राज्य में खुद को भगवान घोषित कर भगवान विष्णु की पूजा पर रोक लगा दी, लेकिन प्रह्लाद ने अपने पिता के आदेश को न मानते हुए विष्णु को ही अपना आराध्य माना।
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हिरण्यकश्यप ने अपने गुरु संडमृग के माध्यम से प्रह्लाद में विष्णु के प्रति नफरत पैदा करने का प्रयास किया, लेकिन सभी प्रयास असफल रहे। आखिर हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए खंभे में बांधकर तलवार लेकर हमला करने की कोशिश की। प्रह्लाद की पुकार सुनकर भगवान विष्णु ने नरसिंह रूप धारण कर हिरण्यकश्यप का अंत किया, जिससे भक्त प्रह्लाद की रक्षा हुई।
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