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बेतरतीब बसावट : बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसे
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शहर में खेत में बना लिया लोगों ने मकान सड़क और नाली की हो रही दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बड़े घर होने की ललक ने लोगों को खेतों में बसने पर मजबूर कर दिया है। जहां वे बड़े कमरे, लॉन, पार्किंग आदि सब कुछ एक स्थान पर बड़ी जगह में चाह रहे हैं। दूसरी तरफ ऐसी जगहों में पर न तो सड़क है और न ही जल निकासी की व्यवस्था।
वहीं जमीन कारोबारी शहर के निकट आसपास के खेतों में प्लाटिंग कर जमीन बेच दे रहे हैं, लेकिन ऐसी जगहों पर मूलभूत सुविधाएं नदारत हैं। ऐसी स्थिति में जहां शहरी क्षेत्र में बेतरतीब बसावट बढ़ रही है, वहीं यहां के लोग बारिश में कीचड़ व जलभराव से जूझते नजर आ रहे हैं।
शहर के बसडिलिया मोहल्ले में जेल के पास स्थित खाली भूमि में अकेले मकान बना रह रहे धीरेंद्र पांडेय के घर तक अभी सड़क व नाली नहीं बन सकी है। वहीं सिहेंश्वरीपुरम मोहल्ले की नई आबादी क्षेत्र में मिथिलेश मकान बनाकर रह रहे हैं। इनके घर तक भी सड़क, नाली व पेयजल की सुविधा नहीं पहुंची है।
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मिथिलेश कहते हैं कि शहर में रहने के लिए यहां मकान तो बनवा लिया, लेकिन अभी तक न सड़क की सुविधा मिली और न ही शहरी बिजली व पानी की सुविधा मिल पाई है। ऐसे में लगता है कि गांव में घर बना लिया है। शहर के सिंहेश्वरी मंदिर के आसपास, बसडिलिया, भीमापार, पकड़ी, मधुकरपुर, सनई, थरौली व जगदीशपुर समेत विभिन्न स्थानों पर तेजी से नई कॉलोनियां बन गई हैं। इन तक न तो सड़क बनी है और न ही नालियां हैं। यहां तक कि शुद्ध पेयजल की सुविधा से भी यह आबादी वंचित है।
बिना बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराए खेतों में हो रही प्लाटिंग: शहर के विभिन्न हिस्सों में बिना सड़क व नाली की सुविधा उपलब्ध कराए ही खेतों में प्लाटिंग कर मकान बनाने के लिए भूमि बिक्री की गई है। जमीन कारोबारी खेतों में सड़क व आवासीय हिस्से को चिह्नित कर लोगों को घर बनाने के लिए भूमि बिक्री कर दे रहे हैं, जिससे लोग वहां घर बना तो ले रहे हैं, लेकिन न तो सड़क है और न ही नाली है।
यहां तक कि वह बिजली और शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं। इन जगहों पर भूमि खरीद कर मकान बनाने के बाद रह रहे लोगों को अब बुनियादी सुविधाओं की दरकार है। वर्तमान में दो दिन पूर्व हुई बारिश के बाद यहां बसे लोगों को घर तक पहुंचने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। लोगों को कच्ची सड़कों पर पसरे कीचड़ और जलभराव से होकर गुजरना पड़ रहा था।
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सिद्धार्थनगर। बड़े घर होने की ललक ने लोगों को खेतों में बसने पर मजबूर कर दिया है। जहां वे बड़े कमरे, लॉन, पार्किंग आदि सब कुछ एक स्थान पर बड़ी जगह में चाह रहे हैं। दूसरी तरफ ऐसी जगहों में पर न तो सड़क है और न ही जल निकासी की व्यवस्था।
वहीं जमीन कारोबारी शहर के निकट आसपास के खेतों में प्लाटिंग कर जमीन बेच दे रहे हैं, लेकिन ऐसी जगहों पर मूलभूत सुविधाएं नदारत हैं। ऐसी स्थिति में जहां शहरी क्षेत्र में बेतरतीब बसावट बढ़ रही है, वहीं यहां के लोग बारिश में कीचड़ व जलभराव से जूझते नजर आ रहे हैं।
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शहर के बसडिलिया मोहल्ले में जेल के पास स्थित खाली भूमि में अकेले मकान बना रह रहे धीरेंद्र पांडेय के घर तक अभी सड़क व नाली नहीं बन सकी है। वहीं सिहेंश्वरीपुरम मोहल्ले की नई आबादी क्षेत्र में मिथिलेश मकान बनाकर रह रहे हैं। इनके घर तक भी सड़क, नाली व पेयजल की सुविधा नहीं पहुंची है।
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मिथिलेश कहते हैं कि शहर में रहने के लिए यहां मकान तो बनवा लिया, लेकिन अभी तक न सड़क की सुविधा मिली और न ही शहरी बिजली व पानी की सुविधा मिल पाई है। ऐसे में लगता है कि गांव में घर बना लिया है। शहर के सिंहेश्वरी मंदिर के आसपास, बसडिलिया, भीमापार, पकड़ी, मधुकरपुर, सनई, थरौली व जगदीशपुर समेत विभिन्न स्थानों पर तेजी से नई कॉलोनियां बन गई हैं। इन तक न तो सड़क बनी है और न ही नालियां हैं। यहां तक कि शुद्ध पेयजल की सुविधा से भी यह आबादी वंचित है।
बिना बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराए खेतों में हो रही प्लाटिंग: शहर के विभिन्न हिस्सों में बिना सड़क व नाली की सुविधा उपलब्ध कराए ही खेतों में प्लाटिंग कर मकान बनाने के लिए भूमि बिक्री की गई है। जमीन कारोबारी खेतों में सड़क व आवासीय हिस्से को चिह्नित कर लोगों को घर बनाने के लिए भूमि बिक्री कर दे रहे हैं, जिससे लोग वहां घर बना तो ले रहे हैं, लेकिन न तो सड़क है और न ही नाली है।
यहां तक कि वह बिजली और शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं। इन जगहों पर भूमि खरीद कर मकान बनाने के बाद रह रहे लोगों को अब बुनियादी सुविधाओं की दरकार है। वर्तमान में दो दिन पूर्व हुई बारिश के बाद यहां बसे लोगों को घर तक पहुंचने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। लोगों को कच्ची सड़कों पर पसरे कीचड़ और जलभराव से होकर गुजरना पड़ रहा था।