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Siddharthnagar News: गनवरिया स्तूप से 50 मीटर दूर मिला बौद्धकालीन कुआं

Wed, 29 Nov 2023 02:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Wed, 29 Nov 2023 02:10 AM IST
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Gunwariya Stupa in Kapilvastu area
बर्डपुर क्षेत्र में गनवरिया गांव में ​स्थित स्तूप कुआं।
सिद्धार्थनगर। कपिलवस्तु क्षेत्र में गनवरिया स्तूप की चहारदीवारी से 50 मीटर एक प्राचीन कुआं दिख रहा है। इस कुएं में लगी ईटों का आकार व बनावट गनवरिया स्तूप के ईटाें जैसी है। विशेषज्ञों के अनुसार यह कुआं दो हजार साल प्राचीन और बौद्धकालीन हो सकता है। यहां उत्खनन हो तो और अधिक पुरातात्विक साक्ष्य मिलने की संभावना है।
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कपिलवस्तु स्तूप से कुछ दूर स्थित गनवरिया में 1971 से 76 तक उत्खनन हुआ था। पुरातात्विक अवशेष प्राप्त हुए तो उस परिसर की चहारदीवारी की गई, जबकि इसी परिसर में 2013 में कुछ हिस्सों में उत्खनन हुआ था। उसके एक दशक बाद उत्खनन नहीं हुआ, जबकि इस क्षेत्र में उत्खनन की आवश्यकता है। गनवरिया परिसर में तीन कुएं हैं, जबकि उसी क्षेत्र में चौथा कुआं भी दिख रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह कुआं प्राचीन हो सकता है। यदि यहां पुरातात्विक साक्ष्य मिलेंगे तो शोध और विकास की संभावनाएं और बढ़ सकती हैं, क्योंकि कपिलवस्तु का विकास पुरातात्विक धरोहर पर आधारित है।
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अमर उजाला की टीम गनवरिया स्तूप के पास पहुंची तो बर्डपुर नंबर एक के हबीब मिल गए। उन्होंने बताया कि यह जमीन उनके भाई के नाम है। गनवरिया स्तूप में उत्खनन के बाद जेसीबी से मिट्टी की खुदाई हो रही थी तो पुरातत्व विभाग ने रोक दिया। अब उसी स्थान पर यह कुआं दिख रहा है। उन्होंने कुएं के किनारे से दूब हटाई तो कुआं की तस्वीर साफ दिखने लगी। विशेषज्ञों के अनुसार मिट्टी के खनन के बाद बारिश से क्षरण हुआ होगा तो धीरे-धीरे कुएं की आकृति ऊपर आ गई होगी।
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प्लास्टिक की तरह दिख रहे हैं मिट्टी के बर्तन के टुकड़े
गनवरिया स्तूप के बाद ऊंचे स्थान और गड्ढे के पास बिखरे अवशेष गवाही दे रहे हैं कि प्राचीन काल में वहां कुम्हारों का ठिकाना रहा होगा। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के प्राचीन इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ नीता यादव बताती हैं कि प्लास्टिक दिखने वाले मिट्टी के बर्तन के टुकड़े कागज की तरह हल्के हैं। पुरातत्व की शब्दावली में इसे नार्थ ब्लैक, पॉलिस्ड वेयर और बुद्ध काल से भी पहले के अवशेष पेंटेड ग्रे वेयर है। ये उस दौर की अच्छी गुणवत्ता वाले मिट्टी के बर्तन के टुकड़े हो सकते हैं। आज के दौर में बने मिट्टी के बर्तन की अपेक्षा प्राचीन काल वाले बर्तन के टुकड़े बहुत बहुत पतले हैं।
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गनवरिया में फिर उत्खनन की आवश्यकता
गनवरिया स्तूप के आसपास उत्खनन करके परिसर का दायरा बढ़ाने की आवश्यकता है। परिसर के बाहर भी मृदभांड के टुकड़े दिखाई दे रहे हैं। मिट्टी में घास फूस के टुकड़े डालकर ईंट बनाए गए हैं। गांव के लोग बताते हैं कि गड्ढे से मिट्टी का खनन करने पर प्राचीन अवशेष प्राप्त होते हैं। जब उत्खनन होगा तो प्राचीनता प्रमाणित होगी तो शोध और विकास की संभावना बढ़ जाएगी।

-डॉ. नीता यादव, एसोसिएट प्रोफेसर,प्राचीन इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, सिविवि
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गनवरिया परिसर में तीन कुएं संरक्षित किए गए हैं, जबकि परिसर के बाहर कुएं की आकृति दिख रही है। इसमें मिट्टी पटी थी तो सुरक्षित है। यदि खुदाई हो जाए तो यह साक्ष्य हमेशा के लिए मिट जाएगा। ये ईंट बौद्ध काल खंड के प्रतीत होते हैं। उत्खनन होगा तो प्राचीनता प्रमाणित होगी। पुरातात्विक धरोहरों का संरक्षण नहीं होने के कारण क्षरण हो रहा है,जबकि गनवरिया के पास कुएं की आकृति वर्षों से मिट्टी के क्षरण के कारण बाहर आई है।
-डॉ. शरदेंदु त्रिपाठी, असिस्टेंट प्रोफेसर,प्राचीन इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, सिविवि
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