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Siddharthnagar News: तहसील में बाहरी लोगों की देखरेख में सरकारी अभिलेख

Fri, 23 Feb 2024 10:57 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 23 Feb 2024 10:57 PM IST
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Government records under the supervision of outsiders in the tehsil
सिद्धार्थनगर। तहसीलों में सरकारी अभिलेख असुरक्षित है। किसी न किसी माध्यम से घुसपैठ करके खतौनी सहित अन्य सरकारी अभिलेखों को संभालने वाले बाहरी व्यक्ति हैं। लेखपाल से लेकर उससे ऊपर के विभागीय जिम्मेदारों तक के संपर्क कोई न कोई बाहरी व्यक्ति हैं, जो अभिलेखों के करीबी से देखने के साथ ही लिखापढ़ी करके कागजात भी देने का काम कर रहे हैं। यह हाल तब है, जब जिले में गलत तरीके से घुसपैठ करने वाले राजस्व को क्षति पहुंचा चुके हैं। चार दिन पहले देवरिया जनपद में एक फर्जी अर्दली भी पकड़ा गया। वह तब पकड़ में आया, जब उसकी किसी ने शिकायत की और जांच हुई। नहीं तो आला अधिकारी समझ भी नहीं पाते कि यह फर्जी है। इसके बाद भी जिम्मेदार सबक नहीं ले रहे हैं। एक के बाद एक अफसर बदल जाते हैं और बाहरी व्यवस्था में घुसकर आम लोगों का शोषण करने के साथ ही जिम्मेदारों आंख में धूल झोंक रहे हैं। यह हाल एक नहीं बल्कि पांचों तहसील नौगढ़, शोहरतगढ़, इटवा, बांसी और डुमरियागंज का है।
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इस प्रकार काम करते हैं बाहरी

तहसीलों में कंप्यूटर व्यवस्था शुरू तो हुई, लेकिन कंप्यूटर कौन चलाएगा, इस पर गौर नहीं किया गया। बाहर से बुलाकर कंप्यूटर चलाने के लिए लेकर आ गए। लेकिन चार से पांच हजार रुपये प्रतिमाह की दर पर लेकर गए। लेकिन अब वह पूरी व्यवस्था को देखने लगे। खतौनी निकालने और डाटा अपलोड करने के साथ ही बीच का माध्यम बन गए। तहसील में काम के लिए आने वालों का आर्थिक शोषण करके अपना जेब भरने के साथ ही दूसरों तक पहुंचाने का माध्यम बन चुके हैं। शुक्रवार को सदर तहसील में पहुंचे। यहां कर्मचारियों से अधिक बाहरी व्यक्ति दौड़ लगाते मिले। तहसील के एक कर्मचारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि यहां मुंशी पर मुंशी रखे हुए हैं। जो भी सरकारी कर्मी है वह एक असिस्टेंट को पाल रखा है। वह पूरे अभिलेख को कब्जे में कर रखे हैं। अगर थोड़ी सी चूक हुई तो बड़ी समस्या हो सकती है। कमोबेश यही हाल है। स्थिति यह है कि आला अधिकारी को यह पता नहीं है कि कौन सरकारी और कौन बाहरी व्यक्ति है। क्योंकि लेखपाल और कानूनगो के अलावा किसी को पहचानने की कोशिश नहीं की जा रही है।
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एसडीएम का गनर निकला था फर्जी

लगभग सात साल पहले सदर तहसील में तैनात एक एसडीएम के साथ एक गनर चलता था। वर्दी में चलने वाले गनर के पास असलहा भी था। वेतन निकालने के मामले में जांच हुई और एसडीएम का स्थानांतरण हुआ तो पता चला की वह फर्जी है। इस मामले में आरोपी के खिलाफ कार्रवाई हुई थी।
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बाहर से आकर करते थे काम, चोरी कर लिए लैपटॉप

डुमरियागंज तहसील के रिकार्ड रूम से 28 जनवरी 2019 39 लैपटॉप चोरी हुई थी। चोरी की घटना की जानकारी 20 दिन बाद तब हुई। जब तत्कालीन तहसीलदार शिवमूर्ति सिंह 29 जनवरी को तहसील के कर्मचारियों के साथ अभिलेखागार का निरीक्षण कर रहे थे। निरीक्षण के दौरान रखे कुल 41 में से 39 लैपटॉप चोरी हो गए थे। सूचना पर डुमरियागंज थाने की पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। दो फरवरी को पुलिस ने श्याम सुन्दर के पास से दो बोरे में रखे 23 लैपटॉप बरामद कर लिए गए थे। अन्य लैपटॉप को जल्द बरामद करने की बात कही गई थी। लेकिन अब तक पुलिस के हाथ 16 लैपटाप नहीं लगे हैं। आरोपी बाहरी व्यक्ति था और तहसील में किसी के माध्यम से आकर काम करता था।

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एसडीएम की आईडी हैक करके वसूले रुपये

डुमरियागंज तहसील में 29 जनवरी 2020 को एक घटना हुई थी। इसमें प्राइवेट आदमी था। तहसील में कार्यरत प्राइवेट कर्मचारी ने एसडीएम का आईडी पासवर्ड हैक कर लिया। इसके धान खरीद में फर्जी सत्यापन कर करीब 78 लाख का घोटाला कर दिया। जांच में पकड़ा गया और जेल गया।

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डुमरियागंज में हर विभागों में है प्राइवेट बाबुओं का जंजाल

डुमरियागंज तहसील में सभी न्यायालय से लेकर राजस्व निरीक्षक के कार्यालय, और आपूर्ति कार्यालय, उप निबंधक कार्यालय, ब्लॉक कार्यालय सहित सभी विभागों में प्राइवेट बाबू और कर्मचारी धड़ले से कार्य कर रहे हैं। इनकी मनमानी से जनता त्रस्त भी है और अक्सर अभिलेख गायब हो जाने सहित कई घटनाएं भी प्रकाश में आती रहती हैं। 2019 में डुमरियागंज तहसील में कोषाहार से लैपटॉप चोरी की घटना भी प्राइवेट कर्मचारी कर्मचारी की संलिप्त होने के चलते हुई थी। इसके बावजूद प्रशासन ने घटना से सबक नहीं ली।

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अक्तूबर में धान बेचने के लिए आवेदन किया था। हल्का लेखपाल से रिपोर्ट लगाने को कहा तो उन्होंने बोला हमारे मुंशी से मिल लीजिए रिपोर्ट लग जाएगा। लेखपाल के प्राइवेट मुंशी से मिला तो बोला कुछ खर्चा दे दीजिए रिपोर्ट लगा देंगे। हमने खर्चा नहीं दिया और हल्का लेखपाल के मुंशी ने आज तक रिपोर्ट नहीं लगाई। जिससे थक हार कर आढ़तियों को सस्ते दाम पर धान बेचना पड़ा।


-भगवती प्रसाद मिश्र, निवासी मन्नीजोत

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डुमरियागंज तहसील में तैनात लेखपालों के मुंशियों के कारण जहां काम समय पर नहीं हो पाता है। वहीं अभिलेखों के गायब होने का भय भी बना रहता है। आएं दिन किसी जमीन की पैमाइश के दौरान मुंशी मनमानी तरीके से पैमाइश कर विवाद पैदा कर देते है। जिसकी शिकायत के बाद भी अधिकारी कार्रवाई नहीं करते हैं।

-प्रेम चंद्र उर्फ गुड्डू मिश्र, निवासी उजैनियां
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