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सस्ते एलईडी बल्ब के चक्कर में कहीं खाली न हो जाए बैंक खाता
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सस्ते एलईडी बल्ब के चक्कर में कहीं खाली न हो जाए बैंक खाता
एलईडी बल्ब घर-घर जाकर बेच रहा गिरोह, आधार कार्ड और फिंगर प्रिंट ले रहा
नेशनल क्राइम इंटेलिजेंस ने किया आगाह
एक वर्ष में साइबर अपराध की आ चुकी हैं 55 से अधिक शिकायतें
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बदलते समय के साथ अपराधियों ने अपराध करने का तरीका बदल दिया है। पुलिस जितना स्मार्ट हो रही है और तकनीक का प्रयोग कर रही है। अपराधी आगे बढ़कर नए तरीके से साइबर अपराध कर रहे हैं। कहीं, सोशल मीडिया के मैसेंजर, तो कहीं ऑनलाइन बात करके तो किसी को लिंक भेजकर पलभर में खाते से रुपये उड़ा दे रहे हैं।
कोरोना संक्रमण काल के बीच अपराधी साइबर अपराध का नया तरीका अपना रहे हैं। कहीं सरकार की योजनाओं का हवाला देकर तो कहीं धन का लालच देकर लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहे हैं। इस बीच अपराधियों ने सस्ते एलईडी बल्ब के बदले आधार और फिंगर प्रिंट लेकर खाते से धन उड़ाने का कार्य शुरू किया है। सीओ सदर प्रदीप कुमार यादव ने बताया कि साइबर अपराध से जुड़ीं घटनाओं में पुलिस तत्काल केस दर्ज करती है। टीम मामले की छानबीन करती है। साइबर अपराध को रोकने के लिए पुलिस लोगों को जागरूक भी कर रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में साइबर अपराध के मामले में कम नहीं है। यहां ऑनलाइन धोखाधड़ी के लगभग 55 से अधिक मामले में दर्ज हैं और 25 लाख रुपये से अधिक उड़ा चुके हैं। साइबर सेल की स्पेशल टीम लगातार छानबीन में जुटी है।
10 रुपये में एलईडी के चक्कर में न पड़ें
नेशनल क्राइम इंटेलिजेंस की ओर से एक पत्र सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है कि साइबर ठग एक नया तरीका अपनाते हुए 10 रुपये में एलईडी बल्ब बेच रहे हैं। इसके लिए आधार कार्ड और फिंगर प्रिंट ले रहे हैं। जबकि सरकार की कोई ऐसी योजना नहीं है। यह ठगी का तरीका है। आधार और फिंगर प्रिंट के जरिए बैंक खाते से रुपये उड़ा सकते हैं। ऐसे लोगों से सावधान रहें और अगर कोई ऐसा करता है तो संबंधित थाने को सूचना दें। अगर ऑनलाइन ठगी के शिकार होते हैं तो तत्काल नजदीक के थाने में सूचना दर्ज कराएं और जानकारी दें। कारण साइबर अपराधी रुपये एक स्थान पर नहीं रखते हैं। एक से दूसरे और कई खातों में धन ट्रांसफर कर देते हैं। ऐसे में तत्काल सूचना देने के बाद बैंक खाते पर रोक लग जाए तो रकम बच सरकता है।
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ये लोग हुए ठगी के शिकार
मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी बैंककर्मी से सोशल मीडिया के जरिए ठगों ने संपर्क बनाया। रुपये के बदले डॅालर का लालच देकर कई बार में लाखों की ठगी कर ली। इसके बाद बात करना बंद कर दिया। इस मामले में केस दर्ज हुआ। मामले की जांच अभी चल रही है।
इटवा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी एक व्यक्ति दिसंबर माह के पहले सप्ताह में कस्बे के एक एटीएम से रुपये निकालने के लिए गया था। वहां पहले से मौजूद साइबर ठग एटीएम कार्ड में चिप लगा रखा था। एटीएम कार्ड लगाते ही उसे पासवर्ड सहित सभी जानकारी मिल गई। इसके बाद दो बार में डेढ़ लाख रुपये खाते से उड़ा दिया गया। समय से केस दर्ज हुआ। पुलिस ने तत्परता दिखाई और बैंक के जरिए रुपये को खाते में वापस कराया गया। अपराधी पकड़ा भी गया।
लोटन कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी एक व्यक्ति से फेसबुक के जरिए महिला मित्र बनी। इसके बाद उससे बात करना शुरू किया। बैंक खाते के बारे में जानकारी मांगी। इसके बाद मोबाइल पर एक लिंक भेजा और उसे क्लिक करने के लिए कहा। क्लिक करते ही खाते से 25 हजार रुपये निकाल लिए। बाद में नंबर बंद आने लगा।
मोहाना थाना क्षेत्र के ककरहवा कस्बे से सटे एक गांव निवासी एक वृद्ध महिला आधार कार्ड के माध्यम से रुपये निकलने के लिए गई थी। आधार नंबर और फिंगर प्रिंट लेने के बाद बताया गया कि रुपये नहीं हैं। दो दिन बाद खाते से 15 हजार रुपये उड़ा दिया गया।
सावधान रहने की जरूरत
लीड बैंक मैनेजर ओमप्रकाश अग्रहरि ने बताया कि बैंक शाखा की ओर से किसी खाताधारक को फोन नहीं किया जाता है। फोन के जरिए एटीएम कार्ड या फिर खाता संबंधित अगर कोई जानकारी मांगी जाती है तो समझिए फर्जी है। अगर किसी उपभोक्ता के पास ऐसा फोन आता है तो बिना कोई सूचना दिए बगैर बैंक पर संपर्क करें। नहीं तो ठगी के शिकार हो सकते हैं।
साइबर सेल के एक्सपर्ट दिलीप कुमार द्विवेदी ने बताया कि हर व्यक्ति स्मार्ट फोन का प्रयोग कर रहा है। इसलिए साइबर अपराधी आसानी से अपराध कर रहे हैं। क्योंकि बैंक खाते से आधार और बैंक खाता लिंक है। ऐसे में ठग खाते से रुपये उड़ा ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि साइबर अपराध से बचने के लिए एटीएम कार्ड से रुपये निकालते समय हाथ से ढककर ही पिन नंबर डालें। सोशल मीडिया पर अगर को लिंक आता है तो उसे क्लिक न करें। ऐसा करने से मोबाइल का पूरा डाटा साइबर अपराधी के पास चला जाता है और वह बैंक खाते की जानकारी लेकर रकम उड़ा देंगे। कोरोना टीका के लिए फोन आने पर कोई जानकारी न दें। अपराधी आधार नंबर मांगकर पूरा डिटेल निकाल ले रहे हैं। इसके बाद बैंक खाते से ठगी कर लेते हैं। अगर कोई अनजान व्यक्ति कॉल करता है तो उसे कोई जानकारी न दें। अन्यथा आप ठगी के शिकार हो सकते हैं। ओएलएक्स पर सस्ते दाम पर सामान उपलब्ध कराने के बहाने ठगी हो रही है। कोई निजी जानकारी अनजान व्यक्ति से शेयर न करें।
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एलईडी बल्ब घर-घर जाकर बेच रहा गिरोह, आधार कार्ड और फिंगर प्रिंट ले रहा
नेशनल क्राइम इंटेलिजेंस ने किया आगाह
एक वर्ष में साइबर अपराध की आ चुकी हैं 55 से अधिक शिकायतें
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बदलते समय के साथ अपराधियों ने अपराध करने का तरीका बदल दिया है। पुलिस जितना स्मार्ट हो रही है और तकनीक का प्रयोग कर रही है। अपराधी आगे बढ़कर नए तरीके से साइबर अपराध कर रहे हैं। कहीं, सोशल मीडिया के मैसेंजर, तो कहीं ऑनलाइन बात करके तो किसी को लिंक भेजकर पलभर में खाते से रुपये उड़ा दे रहे हैं।
कोरोना संक्रमण काल के बीच अपराधी साइबर अपराध का नया तरीका अपना रहे हैं। कहीं सरकार की योजनाओं का हवाला देकर तो कहीं धन का लालच देकर लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहे हैं। इस बीच अपराधियों ने सस्ते एलईडी बल्ब के बदले आधार और फिंगर प्रिंट लेकर खाते से धन उड़ाने का कार्य शुरू किया है। सीओ सदर प्रदीप कुमार यादव ने बताया कि साइबर अपराध से जुड़ीं घटनाओं में पुलिस तत्काल केस दर्ज करती है। टीम मामले की छानबीन करती है। साइबर अपराध को रोकने के लिए पुलिस लोगों को जागरूक भी कर रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में साइबर अपराध के मामले में कम नहीं है। यहां ऑनलाइन धोखाधड़ी के लगभग 55 से अधिक मामले में दर्ज हैं और 25 लाख रुपये से अधिक उड़ा चुके हैं। साइबर सेल की स्पेशल टीम लगातार छानबीन में जुटी है।
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10 रुपये में एलईडी के चक्कर में न पड़ें
नेशनल क्राइम इंटेलिजेंस की ओर से एक पत्र सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है कि साइबर ठग एक नया तरीका अपनाते हुए 10 रुपये में एलईडी बल्ब बेच रहे हैं। इसके लिए आधार कार्ड और फिंगर प्रिंट ले रहे हैं। जबकि सरकार की कोई ऐसी योजना नहीं है। यह ठगी का तरीका है। आधार और फिंगर प्रिंट के जरिए बैंक खाते से रुपये उड़ा सकते हैं। ऐसे लोगों से सावधान रहें और अगर कोई ऐसा करता है तो संबंधित थाने को सूचना दें। अगर ऑनलाइन ठगी के शिकार होते हैं तो तत्काल नजदीक के थाने में सूचना दर्ज कराएं और जानकारी दें। कारण साइबर अपराधी रुपये एक स्थान पर नहीं रखते हैं। एक से दूसरे और कई खातों में धन ट्रांसफर कर देते हैं। ऐसे में तत्काल सूचना देने के बाद बैंक खाते पर रोक लग जाए तो रकम बच सरकता है।
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ये लोग हुए ठगी के शिकार
मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी बैंककर्मी से सोशल मीडिया के जरिए ठगों ने संपर्क बनाया। रुपये के बदले डॅालर का लालच देकर कई बार में लाखों की ठगी कर ली। इसके बाद बात करना बंद कर दिया। इस मामले में केस दर्ज हुआ। मामले की जांच अभी चल रही है।
इटवा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी एक व्यक्ति दिसंबर माह के पहले सप्ताह में कस्बे के एक एटीएम से रुपये निकालने के लिए गया था। वहां पहले से मौजूद साइबर ठग एटीएम कार्ड में चिप लगा रखा था। एटीएम कार्ड लगाते ही उसे पासवर्ड सहित सभी जानकारी मिल गई। इसके बाद दो बार में डेढ़ लाख रुपये खाते से उड़ा दिया गया। समय से केस दर्ज हुआ। पुलिस ने तत्परता दिखाई और बैंक के जरिए रुपये को खाते में वापस कराया गया। अपराधी पकड़ा भी गया।
लोटन कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी एक व्यक्ति से फेसबुक के जरिए महिला मित्र बनी। इसके बाद उससे बात करना शुरू किया। बैंक खाते के बारे में जानकारी मांगी। इसके बाद मोबाइल पर एक लिंक भेजा और उसे क्लिक करने के लिए कहा। क्लिक करते ही खाते से 25 हजार रुपये निकाल लिए। बाद में नंबर बंद आने लगा।
मोहाना थाना क्षेत्र के ककरहवा कस्बे से सटे एक गांव निवासी एक वृद्ध महिला आधार कार्ड के माध्यम से रुपये निकलने के लिए गई थी। आधार नंबर और फिंगर प्रिंट लेने के बाद बताया गया कि रुपये नहीं हैं। दो दिन बाद खाते से 15 हजार रुपये उड़ा दिया गया।
सावधान रहने की जरूरत
लीड बैंक मैनेजर ओमप्रकाश अग्रहरि ने बताया कि बैंक शाखा की ओर से किसी खाताधारक को फोन नहीं किया जाता है। फोन के जरिए एटीएम कार्ड या फिर खाता संबंधित अगर कोई जानकारी मांगी जाती है तो समझिए फर्जी है। अगर किसी उपभोक्ता के पास ऐसा फोन आता है तो बिना कोई सूचना दिए बगैर बैंक पर संपर्क करें। नहीं तो ठगी के शिकार हो सकते हैं।
साइबर सेल के एक्सपर्ट दिलीप कुमार द्विवेदी ने बताया कि हर व्यक्ति स्मार्ट फोन का प्रयोग कर रहा है। इसलिए साइबर अपराधी आसानी से अपराध कर रहे हैं। क्योंकि बैंक खाते से आधार और बैंक खाता लिंक है। ऐसे में ठग खाते से रुपये उड़ा ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि साइबर अपराध से बचने के लिए एटीएम कार्ड से रुपये निकालते समय हाथ से ढककर ही पिन नंबर डालें। सोशल मीडिया पर अगर को लिंक आता है तो उसे क्लिक न करें। ऐसा करने से मोबाइल का पूरा डाटा साइबर अपराधी के पास चला जाता है और वह बैंक खाते की जानकारी लेकर रकम उड़ा देंगे। कोरोना टीका के लिए फोन आने पर कोई जानकारी न दें। अपराधी आधार नंबर मांगकर पूरा डिटेल निकाल ले रहे हैं। इसके बाद बैंक खाते से ठगी कर लेते हैं। अगर कोई अनजान व्यक्ति कॉल करता है तो उसे कोई जानकारी न दें। अन्यथा आप ठगी के शिकार हो सकते हैं। ओएलएक्स पर सस्ते दाम पर सामान उपलब्ध कराने के बहाने ठगी हो रही है। कोई निजी जानकारी अनजान व्यक्ति से शेयर न करें।