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Siddharthnagar News: जियो-टैगिंग पर अटका फॉर्म... नेटवर्क ने लिया धैर्य का इम्तिहान
Sat, 05 Sep 2026 03:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 05 Sep 2026 03:00 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। ‘तीन बार भर चुका हूं, हर बार मैप खुलते ही फॉर्म रुक जा रहा है।’ बृहस्पतिवार को जनगणना 2027 की ऑनलाइन स्व-गणना शुरू होते ही जिले में कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिला। पहली बार लोग खुद अपने परिवार की जानकारी ऑनलाइन भर रहे हैं। उत्साह भी दिखा और थोड़ी घबराहट भी, लेकिन दिनभर की कोशिशों के बीच लोगों ने धीरे-धीरे तकनीकी दिक्कतों से निपटने का तरीका भी सीख लिया।
सुबह से ही बड़ी संख्या में लोगों ने मोबाइल और लैपटॉप पर पोर्टल खोलकर स्व-गणना शुरू की। शुरुआती चरण आसानी से पूरे हो गए, लेकिन तीसरे चरण में जियो-टैगिंग का मैप खुलते ही कई लोगों का फॉर्म रुक गया। कहीं स्क्रीन लोड होती रही तो कहीं लोकेशन पकड़ने में समय लगा। इसके बावजूद लोग बार-बार कोशिश करते रहे।
शहर के एक युवक ने बताया कि मोबाइल से फॉर्म भरते समय लोकेशन वाला पेज बार-बार फ्रीज हो रहा था। बाद में ब्रॉडबैंड इंटरनेट वाले लैपटॉप से प्रक्रिया पूरी हो गई। एक महिला ने कहा कि शुरुआत में डर लग रहा था कि कहीं गलत जानकारी न भर जाए, इसलिए परिवार के दस्तावेज सामने रखकर आराम से एंट्री की। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में नेटवर्क की समस्या ज्यादा दिखी। कई लोगों का फॉर्म बीच में बंद हो गया तो कुछ ने शाम और रात में दोबारा प्रयास किया। लोगों का कहना रहा कि देर रात सर्वर पर दबाव कम होने से प्रक्रिया आसान हो सकती है।
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जियो-टैगिंग बना सबसे नया अनुभव : लोकेशन कन्फर्म करने की प्रक्रिया लोगों के लिए सबसे अलग अनुभव रही। कई लोग घर के बाहर जाकर नेटवर्क पकड़ते दिखे। किसी ने जीपीएस ऑन-ऑफ किया तो किसी ने दूसरे मोबाइल से कोशिश की। कुछ परिवारों ने रिश्तेदारों और परिचितों से वीडियो कॉल पर मदद ली। एक युवक ने हंसते हुए कहा, लग रहा था जैसे ऑनलाइन परीक्षा दे रहे हों, लेकिन अब तरीका समझ में आ गया।
साइबर कैफे संचालक और युवा बने ‘डिजिटल सारथी’ : पहले दिन जनसेवा केंद्रों और साइबर कैफे पर अच्छी हलचल रही। कई जगह युवाओं ने अपने माता-पिता और पड़ोसियों का फॉर्म भरने में मदद की। कुछ परिवार पहले कागज पर जवाब लिख रहे हैं, ताकि ऑनलाइन प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सके। साइबर कैफे संचालकों के अनुसार सुबह से ही लोग जनगणना फॉर्म भरवाने पहुंचने लगे। सबसे ज्यादा मदद लोकेशन चुनने और जियो-टैगिंग समझाने में करनी पड़ी। कई युवाओं ने इसे परिवार के बुजुर्गों को डिजिटल तरीके सिखाने का मौका भी बताया।
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सिद्धार्थनगर। ‘तीन बार भर चुका हूं, हर बार मैप खुलते ही फॉर्म रुक जा रहा है।’ बृहस्पतिवार को जनगणना 2027 की ऑनलाइन स्व-गणना शुरू होते ही जिले में कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिला। पहली बार लोग खुद अपने परिवार की जानकारी ऑनलाइन भर रहे हैं। उत्साह भी दिखा और थोड़ी घबराहट भी, लेकिन दिनभर की कोशिशों के बीच लोगों ने धीरे-धीरे तकनीकी दिक्कतों से निपटने का तरीका भी सीख लिया।
सुबह से ही बड़ी संख्या में लोगों ने मोबाइल और लैपटॉप पर पोर्टल खोलकर स्व-गणना शुरू की। शुरुआती चरण आसानी से पूरे हो गए, लेकिन तीसरे चरण में जियो-टैगिंग का मैप खुलते ही कई लोगों का फॉर्म रुक गया। कहीं स्क्रीन लोड होती रही तो कहीं लोकेशन पकड़ने में समय लगा। इसके बावजूद लोग बार-बार कोशिश करते रहे।
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शहर के एक युवक ने बताया कि मोबाइल से फॉर्म भरते समय लोकेशन वाला पेज बार-बार फ्रीज हो रहा था। बाद में ब्रॉडबैंड इंटरनेट वाले लैपटॉप से प्रक्रिया पूरी हो गई। एक महिला ने कहा कि शुरुआत में डर लग रहा था कि कहीं गलत जानकारी न भर जाए, इसलिए परिवार के दस्तावेज सामने रखकर आराम से एंट्री की। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में नेटवर्क की समस्या ज्यादा दिखी। कई लोगों का फॉर्म बीच में बंद हो गया तो कुछ ने शाम और रात में दोबारा प्रयास किया। लोगों का कहना रहा कि देर रात सर्वर पर दबाव कम होने से प्रक्रिया आसान हो सकती है।
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जियो-टैगिंग बना सबसे नया अनुभव : लोकेशन कन्फर्म करने की प्रक्रिया लोगों के लिए सबसे अलग अनुभव रही। कई लोग घर के बाहर जाकर नेटवर्क पकड़ते दिखे। किसी ने जीपीएस ऑन-ऑफ किया तो किसी ने दूसरे मोबाइल से कोशिश की। कुछ परिवारों ने रिश्तेदारों और परिचितों से वीडियो कॉल पर मदद ली। एक युवक ने हंसते हुए कहा, लग रहा था जैसे ऑनलाइन परीक्षा दे रहे हों, लेकिन अब तरीका समझ में आ गया।
साइबर कैफे संचालक और युवा बने ‘डिजिटल सारथी’ : पहले दिन जनसेवा केंद्रों और साइबर कैफे पर अच्छी हलचल रही। कई जगह युवाओं ने अपने माता-पिता और पड़ोसियों का फॉर्म भरने में मदद की। कुछ परिवार पहले कागज पर जवाब लिख रहे हैं, ताकि ऑनलाइन प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सके। साइबर कैफे संचालकों के अनुसार सुबह से ही लोग जनगणना फॉर्म भरवाने पहुंचने लगे। सबसे ज्यादा मदद लोकेशन चुनने और जियो-टैगिंग समझाने में करनी पड़ी। कई युवाओं ने इसे परिवार के बुजुर्गों को डिजिटल तरीके सिखाने का मौका भी बताया।