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Siddharthnagar News: उर्वरक ने छीन लिए जमीन के पोषक तत्व, खत्म हो रही मिट्टी की शक्ति

Thu, 02 Jul 2026 02:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 02 Jul 2026 02:00 AM IST
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Fertilizers have depleted the soil's nutrients; the soil is losing its vitality.
सिद्धार्थनगर। खेतों में अंधाधुंध उर्वरक के इस्तेमाल ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गोबर के साथ ही ऑर्गेनिक कार्बन से दूरी बनाए जाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति खत्म हो रही है। जनपद की मिट्टी के परीक्षण में नाइट्रोजन के साथ ऑर्गेनिक कार्बन, जिंक और बोरान की मात्रा में भारी कमी मिली है। इससे आने वाले समय में न सिर्फ मिट्टी के पोषक तत्व खत्म हो जाएंगे, बल्कि फसल उगना भी मुश्किल होगा।
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पिछले नौ साल में छह लाख गाटों की मिट्टी की सेहत जांची गई, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आने पर कृषि विशेषज्ञों ने चिंता जाहिर की है। उनका मानना है कि जिस हिसाब से मिट्टी कमजोर हो रही है, आने वाले कुछ साल में इन जमीनों पर फसल उगना मुश्किल हो जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाकर कृषि विभाग की टीम किसानों को दे चुकी है। उस कार्ड में एक व्यक्ति की मेडिकल जांच रिपोर्ट में पाई गई कमी को दर्शाया गया है। साथ ही कौन सा उर्वरक या ऑर्गेनिक कार्बन, कितनी मात्रा और कितने रकबे में इस्तेमाल करना है, इसके बारे में जानकारी दी गई है। इसके साथ ही किसानों को उर्वरक कम करके ऑर्गेनिक की ओर रुख करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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देश की अर्थ व्यवस्था कृषि पर निर्भर है, इसके लिए सरकार की ओर से किसानों को कई योजनाओं के माध्यम से लाभ पहुंचाने के साथ ही मिट्टी के सेहत की जांच पर भी जोर देना शुरू की। वह इसलिए कि पंजाब, हरियाणा सहित कुछ राज्यों में उर्वरक के अंधाधुंध प्रयोग से न सिर्फ खेत की मिट्टी पर असर पड़ा बल्कि उसका आम जीवन पर बीमारी का असर होने की बात सामने आई। साथ ही खेत के बंजर होने का खतरा भी बढ़ने लगा। इस समस्या को देखते हुए उर्वरक के प्रयोग कम करने पर जोर देने के साथ ही मृदा परीक्षण शुरू किया गया। इसमें हर साल हर जनपद को मृदा परीक्षण के लिए लक्ष्य निर्धारित किया जाता है।
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जनपद को भी वर्ष 2017 से मृदा परीक्षण का लक्ष्य मिलना शुरू हुआ। कृषि विभाग की ओर मिले लक्ष्य के हिसाब से गांव को ब्लॉकवार बांटकर वहां जाकर रकबे से मिट्टी का सैंपल लेकर लैब में लाकर उसकी जांच की जाती है। यह जांच पूरी तरफ से मुफ्त है। किसान स्वयं भी जांच करवा सकता है, जिसके लिए 100 रुपये सरकारी शुल्क देना होता है। विभाग की ओर से लिए गए नमूने और जांच रिपोर्ट पर गौर करें तो बेहद चिंताजनक है। हरियाणा और पंजाब की तरह से सिद्धार्थनगर में भी अंधाधुंध उर्वरक के प्रयोग के कारण मिट्टी में कई मूल तत्व की कमी सामने आई है। इसमें आर्गेनिक कार्बन, सल्फर, जिंक, बोरान की कमी पाई गई है। इसके अलावा कुछ तत्व हैं, वह भी बहुत पर्याप्त नहीं है।

बोले विशेषज्ञ
मृदा परीक्षण का लक्ष्य हर साल निर्धारित होता है। भारत सरकार के कृषि मंत्रालय से गांव और नमूनों की जांच की संख्या निर्धारित होकर आता है। वर्ष 2017 से अबतक मिट्टी की जांच करके 6,82,855 मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण किया जा चुका है। यहां मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन, सल्फर, जिंक, बोरान की मात्रा कम मिल रही है। इसमें किसानों को गोबर डालने की जरूरत है। इसके साथ किसान फसल अवशेष जला देते हैं, अगर उसे एकत्र करके एक स्थान पर रख दें और डी कंपोजर से सड़ा दें तो खाद के रूप में प्रयोग हो जाएगा। इसके साथ ही जलाने पर जो जीवाणु मर जाते हैं, वह सुरक्षित रहेंगे तो मिट्टी की शक्ति बनी रहेगी।
डॉ. एसपी यादव, लैब सहायक कृषि विभाग
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