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कर्जदार किसानों के करोड़ो रुपये फसे
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कर्जदार किसानों के करोड़ों रुपये फंसे
जिले के 76 क्रय केंद्रों पर की जा रही है धान की खरीद
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। शासन के फैसले के बाद कर्जदार किसानों के करोड़ों रुपये फंस गए हैं। इन रुपयों के लिए किसान मारे-मारे फिर रहे हैं, लेकिन उन्हें रकम नहीं मिल पा रही है। पीएफएमएस के तहत किसानों के अकाउंट में सीधे रुपये भेजने के निर्णय ने किसानों की मुसीबतों को बढ़ा दिया है। इसके अलावा पीसीएफ के भी करोड़ों रुपये फंस गए हैं। बताया जाता है कि इस समस्या का समाधान होने में करीब एक सप्ताह का और समय लग सकता है।
सरकार किसानों के धान को सीधे खरीद सके इसके लिए जिले में कुल 76 केंद्र खोले गए थे। इनमें 42 केंद्र पीसीएफ के थे, बाकी विपणन के। धान खरीद के लिए अभी फरवरी माह तक का समय है। लेकिन इस बीच जिन किसानों ने अपने धान बेच दिए, उन किसानों के रुपये फंस गए हैं। करीब 500 से अधिक किसानों की पांच करोड़ से अधिक की रकम फंसी है। विभाग के लोगों का कहना है कि धान बेचने वाले किसानों के बैंक अकाउंट में सीधे पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) के तहत भुगतान होना है। एसएमआई केंद्र को छोड़कर सभी केंद्र प्रभारी आरटीजीएस से किसानों का भुगतान करते हैं। 29 दिसंबर को शासन ने पत्र जारी करते हुए आरटीजीएस के तहत भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस मामले की जानकारी अब तक किसानों को भी नहीं दी गई है। इसकी वजह से किसान मारे-मारे फिर रहे हैं। किसान रामसुमेर, सुभाष, रामलगन आदि ने बताया कि कर्ज लेकर खेती की गई थी। अब तक रुपये का भुगतान नहीं हुआ है। इसकी वजह से परेशानी बढ़ गई है। जिला विपणन अधिकारी संजय पांडेय ने बताया कि पीएफएमएस के तहत भुगतान होना है। इसकी वजह से भुगतान पर रोक लगी है। दो से तीन दिनों में समस्या सुलझ जाएगी। भुगतान होने लगेगा।
गड़बड़ी की आशंका पर लिया गया फैसला
धान खरीद में धांधली की आशंका पर शासन ने यह फैसला लेते हुए तत्काल इसे लागू भी कर दिया है। अधिकारियों का मानना है कि इसके पहले क्रय केंद्र प्रभारियों के खाते में किसानों के रुपये भेजे जाते थे। जो मनमानी तरीके से किसानों के खाते में आरटीजीएस करते थे। इसकी शिकायतें भी जिम्मेदारों तक पहुंच रही थी। इस पर किसान हो-हल्ला भी मचाते थे। बताया जाता है कि इस व्यवस्था से पारदर्शिता आएगी।
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44 हजार 400 मीट्रिक टन है खरीद का लक्ष्य
जिले में इस बार 44 हजार 400 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया था। बताया जाता है कि करीब 70 प्रतिशत से अधिक की खरीदारी हो चुकी है। फरवरी माह तक जाते-जाते विभाग लक्ष्य को पूरा करने का दावा भी कर रहा है। लेकिन विभाग के लक्ष्य पर भी किसान यूनियन के नेताओं ने सवाल खड़े किए हैं। भाकियू भानु गुट के कपिलदेव राय ने बताया कि लक्ष्य पूरा करने में विभाग ने बिचौलियों का सहयोग लिया है। किसानों के धान सीधे नहीं खरीदे गए हैं। मजबूरी में बिचौलियों के हाथों किसानों को अपना धान बेचना पड़ा है।
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जिले के 76 क्रय केंद्रों पर की जा रही है धान की खरीद
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। शासन के फैसले के बाद कर्जदार किसानों के करोड़ों रुपये फंस गए हैं। इन रुपयों के लिए किसान मारे-मारे फिर रहे हैं, लेकिन उन्हें रकम नहीं मिल पा रही है। पीएफएमएस के तहत किसानों के अकाउंट में सीधे रुपये भेजने के निर्णय ने किसानों की मुसीबतों को बढ़ा दिया है। इसके अलावा पीसीएफ के भी करोड़ों रुपये फंस गए हैं। बताया जाता है कि इस समस्या का समाधान होने में करीब एक सप्ताह का और समय लग सकता है।
सरकार किसानों के धान को सीधे खरीद सके इसके लिए जिले में कुल 76 केंद्र खोले गए थे। इनमें 42 केंद्र पीसीएफ के थे, बाकी विपणन के। धान खरीद के लिए अभी फरवरी माह तक का समय है। लेकिन इस बीच जिन किसानों ने अपने धान बेच दिए, उन किसानों के रुपये फंस गए हैं। करीब 500 से अधिक किसानों की पांच करोड़ से अधिक की रकम फंसी है। विभाग के लोगों का कहना है कि धान बेचने वाले किसानों के बैंक अकाउंट में सीधे पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) के तहत भुगतान होना है। एसएमआई केंद्र को छोड़कर सभी केंद्र प्रभारी आरटीजीएस से किसानों का भुगतान करते हैं। 29 दिसंबर को शासन ने पत्र जारी करते हुए आरटीजीएस के तहत भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस मामले की जानकारी अब तक किसानों को भी नहीं दी गई है। इसकी वजह से किसान मारे-मारे फिर रहे हैं। किसान रामसुमेर, सुभाष, रामलगन आदि ने बताया कि कर्ज लेकर खेती की गई थी। अब तक रुपये का भुगतान नहीं हुआ है। इसकी वजह से परेशानी बढ़ गई है। जिला विपणन अधिकारी संजय पांडेय ने बताया कि पीएफएमएस के तहत भुगतान होना है। इसकी वजह से भुगतान पर रोक लगी है। दो से तीन दिनों में समस्या सुलझ जाएगी। भुगतान होने लगेगा।
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गड़बड़ी की आशंका पर लिया गया फैसला
धान खरीद में धांधली की आशंका पर शासन ने यह फैसला लेते हुए तत्काल इसे लागू भी कर दिया है। अधिकारियों का मानना है कि इसके पहले क्रय केंद्र प्रभारियों के खाते में किसानों के रुपये भेजे जाते थे। जो मनमानी तरीके से किसानों के खाते में आरटीजीएस करते थे। इसकी शिकायतें भी जिम्मेदारों तक पहुंच रही थी। इस पर किसान हो-हल्ला भी मचाते थे। बताया जाता है कि इस व्यवस्था से पारदर्शिता आएगी।
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44 हजार 400 मीट्रिक टन है खरीद का लक्ष्य
जिले में इस बार 44 हजार 400 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया था। बताया जाता है कि करीब 70 प्रतिशत से अधिक की खरीदारी हो चुकी है। फरवरी माह तक जाते-जाते विभाग लक्ष्य को पूरा करने का दावा भी कर रहा है। लेकिन विभाग के लक्ष्य पर भी किसान यूनियन के नेताओं ने सवाल खड़े किए हैं। भाकियू भानु गुट के कपिलदेव राय ने बताया कि लक्ष्य पूरा करने में विभाग ने बिचौलियों का सहयोग लिया है। किसानों के धान सीधे नहीं खरीदे गए हैं। मजबूरी में बिचौलियों के हाथों किसानों को अपना धान बेचना पड़ा है।