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कर्ज की रकम के लिए रच दी लूट की फर्जी साजिश

Thu, 14 Jan 2021 10:14 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 14 Jan 2021 10:14 PM IST
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Fake story of robbery to avoid paying the loan amount
कर्ज की रकम चुकाने से बचने को गढ़ी लूट की फर्जी कहानी
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पुलिस की पूछताछ में व्यवसायी ने कुबूल की सच्चाई
सिलोखरा चौराहे के पास 8.40 लाख की लूट की दी थी सूचना
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। व्यवसायी से लूट की घटना पुलिस की पड़ताल में फर्जी निकली। कर्ज से मुक्ति पाने के लिए व्यवसायी ने यह साजिश की थी। पुलिस की पूछताछ में उसने झूठी सूचना देने की बात स्वीकार की है।
भवानीगंज थानाक्षेत्र के भानपुररानी गांव निवासी कल्पनाथ अग्रहरि गल्ला व्यवसायी है। बुधवार को सुबह करीब 11 बजे कल्पनाथ अपने घर से 8.40 लाख रुपये लेकर सेंट्रल बैंक में जमा करने जा रहा था। वह डुमरियागंज थानाक्षेत्र के सिलोखरा चौराहे के पास पहुंचा था कि बेंवा की तरफ से एक बाइक सवार दो लोग आए और सामने लाकर बाइक को खड़ा कर दी। कल्पनाथ के मुताबिक दोनों उसकी कनपटी पर तमंचा सटाकर उसके पास रखी रकम छीनकर भाग गए थे। घटना की सूचना पाकर डुमरियागंज और भवानीगंज थाने की पुलिस फोर्स के साथ ही सीओ उमेश शर्मा भी मौके पर पहुंच गए थे। देर रात तक पुलिस बदमाशों की तलाश में छानबीन कर रही थी। इसी दौरान जांच में घटना की सच्चाई सामने आ गई। गल्ला व्यवसायी कल्पनाथ अग्रहरि ने अपने साथ हुई लूट की घटना को झूठ बताया। उसने बताया कि वह अपने पिता का करीब 12 बीघा खेत भी बेच चुका है। क्षेत्र में वह लोगों का काफी रुपये बकाया है, जिससे बचने के लिए उसने फर्जी लूट की कहानी गढ़ी। इस बाबत एसओ डुमरियागंज केडी सिंह ने बताया कि गल्ला व्यवसायी अपने साथ हुए लूट की घटना को फर्जी बताया है। वह कर्ज से छुटकारा पाने की खातिर लूट की कहानी गढ़ी। उसने अपनी गलती कबूल की है, आगे की कार्रवाई की जा रही है।
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पुलिस के सवालों से टूटा तब खुली पोल
फर्जी लूट की कहानी तब खुली जब पुलिस ने कल्पनाथ अग्रहरि से पूछताछ शुरू की। पुलिस की पांच टीमों के अलग-अलग तरीके से रुपये के बारे में पूछताछ करने लगे तो वह हड़बड़ा गया। उसकी हरकतों पर पुलिस की पैनी नजर थी। पूछताछ के दौरान कल्पनाथ ने पहले पुलिस को बताया कि वह गल्ले का व्यवसायी है और नवंबर में बैंक से निकाल कर 8.42 लाख रुपये लाकर घर में रखा था। रकम की जानकारी सिर्फ उसकी पत्नी को थी। जब घर में रखी रकम की जानकारी किसी को नहीं थी तो लुटेरों कैसे भनक लगी। पुलिस ने उसके बैंक खाते को खंगाला तो पता चला कि नवंबर और दिसंबर में बैंक से कोई निकासी नहीं हुई है। इसके बाद जब पुलिस ने ताबड़तोड़ सवाल शुरू किए तो वह टूट गया। उसने बताया कि वह कर्ज से डूबा था। उसके पास न तो रुपये हैं और न ही कोई लूट हुई है। कर्ज से बचने के लिए उसने लूट की फर्जी सूचना दी थी, जिससे उसे कर्ज मांगने वालों से थोड़ी राहत मिल सके।
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