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राशन पाने में इंटरनेट बन रहा रोड़ा

Tue, 06 Jul 2021 10:21 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 06 Jul 2021 10:21 PM IST
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E-posh machine-consumers become a network bottleneck
ई-पॉश मशीन-उपभोक्ताओं के बीच नेटवर्क बना रोड़ा
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राशन के लिए दो किमी दूर जाकर अंगूठा लगाते हैं ग्रामीण
नेपाल सीमा से सटे गांवों में नेटवर्क की दिक्कत, ई-पॉश मशीन से वितरण का है नियम
बॉर्डर क्षेत्र के बढ़नी, शोहरतगढ़, बर्डपुर, लोटन ब्लॉक क्षेत्र के गांवों में समस्या
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। नेपाल सीमा से सटे चार ब्लॉक क्षेत्र के गांव के उपभोक्ताओं के राशन में इंटरनेट रोड़ा बन रहा है। इंटरनेट काम नहीं करने से ई-पॉश मशीन नहीं चल पाती हैं। नेटवर्क के लिए कोटेदार और उपभोक्ताओं को गांव से दो किलोमीटर दूर जाकर बाग या अन्य स्थानों बैठते हैं और नेट मिलने के बाद अंगूठा लगवाते हैं। इसके बाद उपभोक्ताओं को राशन मिल पाता है। इससे उपभोक्ता और कोटेदार दोनों परेशान हैं, लेकिन इसका हल नहीं निकल रहा है। राशन की कालाबाजारी को रोकने के लिए शासन ने वितरण व्यवस्था में कई बदलाव किया है। सही व्यक्ति को राशन मिले इसके लिए ई- पॉश मशीन से वितरण व्यवस्था शुरू की गई है। इंटरनेट के जरिए ई- पॉश मशीन पर अंगूठा लगाने और मैच करने के बाद ही राशन देने का नियम है। मगर इंटरनेट ने भारत- नेपाल सीमावर्ती गांवों में परेशानी का केंद्र बना है। कारण नेटवर्क नहीं होने से मशीन काम नहीं करती है। बढ़नी ब्लॉक क्षेत्र ढ़ेकहरी बुजुर्ग भारत-नेपाल सीमा सटा है। गांव में राशन कार्डधारकों की संख्या अधिक है। यहां राशन वितरण में बहुत समस्या है। कोटेदार ओमप्रकाश चौधरी ने बताया कि नेटवर्क खराब होने के कारण वैकल्पिक व्यवस्था का सहारा लेना पड़ता है। गांव से दूर बाग में जाते हैं और कई बार घूमने के बाद नेटवर्क पड़ता है तो अंगूठा लगता है। उपभोक्ता विशनु रंगवा, रऊफ, प्रेमा बेगम, शंकर रंगवा ने कहा कि हर माह राशन लेने के लिए परेशान होना पड़ता है। गांव से दूर जाकर अंगूठा लगाते हैं और फिर कोटेदार के घर पहुंचकर राशन लेते हैं। इस बाबत जिला पूर्ति अधिकारी बृजेश कुमार मिश्र ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र में नेटवर्क की समस्या रहती है। फिर भी कोटेदार मशीन से ही राशन वितरण करते हैं और पूरी पारदर्शिता से वितरण हो रहा है।
मशीन में लगा सिम नहीं करता काम
ई-पॉश मशीन मिलने के बाद से ही सिम काम नहीं कर रहा है। बॉर्डर क्षेत्र में तो और बुरी स्थिति है। कोटेदार दूसरे कंपनी के सिम से वाईफाई से मशीन को जोड़ते हैं, तब जाकर काम होता है। इस संबंध में कई बार कोटेदार आवाज भी उठा चुके हैं, लेकिन विभाग ध्यान नहीं दे रहा है।
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100 से अधिक कोटेदार
आंकड़ों पर गौर करें तो भारत-नेपाल सीमा से सटे बर्डपुर, लोटन, शोहरतगढ़ और बढ़नी ब्लॉक क्षेत्र लगाता है। नेपाल सीमा से सटे गांवों में तीन किलोमीटर के दायरे में नेटवर्क की समस्या रहती है। चार ब्लॉक के लगभग 60 से अधिक गांव में कोटे की दुकान हैं। नेटवर्क नहीं होने से इन्हें अधिक परेशानी होती है।
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