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Siddharthnagar News: दलालों के झांसे में न आएं, हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के लिए खुद करें आवेदन
Wed, 23 Aug 2023 12:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 23 Aug 2023 12:08 AM IST
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सिद्धार्थनगर। अगर आपको वाहन में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाना है तो एआरटीओ कार्यालय जाने की जरूरत नहीं है। वहां घूम रहे दलाल आप से अनाप-शनाप रुपये वसूल लेंगे। वैसे, एआरटीओ कार्यालय से हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट का दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। इसके लिए एजेंसी बनी हुई है। वाहन के कागजात के साथ किसी भी जनसेवा केंद्र से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। नंबर प्लेट आपके घर पहुंच जाएगा।
गलती से अगर एआरटीओ कार्यालय पर पहुंच गए तो बाहर घूमने वाले दलालों की गिरफ्त में आ जाएंगे। बिना किसी काम के वह केवल साथ लेकर जाकर आवेदन कराने के नाम पर 200-400 रुपये अधिक वसूली कर लेंगे। जबकि उस कार्य को आप खुद आसानी कर सकते हैं। जागरूकता के अभाव में लोग इस प्रकार से ठग जा रहे हैं। एआरटीओ कार्यालय पर पड़ताल में यह हकीकत सामने आई। ऐसे में जागरूक होने की जरूरत है नहीं तो दलाल आपका दोहन कर लेंगे।
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इस प्रकार जाल में फंसाते हैं दलाल
एआरटीओ कार्यालय के आसपास वाहन से जुड़े ऑनलाइन कार्य करने वाले लोग घूमते हैं। वह देखते रहते हैं कि कार्यालय में घुसने के बाद कौन व्यक्ति हर बाबू के कमरे को झांक रहा है। इधर से उधर दौड़ रहा है। कुछ देर तक उसपर निगाह रखने के बाद बाहर आते ही पूछते हैं क्या काम है भाई साहब। जैसे बोले कि भइया हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट बनवाना है। कार्यालय के लोग कह रहे हैं कि यहां से नहीं बनेगा बाहर जाकर आवेदन करो। इसके बाद दलाल तपाक से बोलेंगे, अरे यह तो बड़ा झमेले वाला काम है। आप घूमते रह जाओगे। चलो हम ले चलते हैं एक ऑनलाइन वाले के पास। वहां सबकुछ करवा देंगे। इसके बाद घर पर नंबर प्लेट पहुंच जाएगा। फिर सामने वाला सोचता है, चलाे काम हो जाएगा। दलाल वहां ले जाकर आवेदन करवा देते हैं। इसके बाद सरकारी शुल्क के अलावा 200 से 400 रुपये अधिक वसूल लेते हैं। पड़ताल में उनके कार्य करने तरीका देखने को मिला।
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इस प्रकार फंस गए लोग
बांसी तहसील क्षेत्र के निवासी रमेश कुमार सोमवार को एआरटीओ कार्यालय पर पहुंचे थे। उनकी बाइक पुरानी है। वह मुंबई में रहते हैं। चेकिंग के दौरान बार-बार चेतावनी के कारण परिवार के लोगों ने हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने के लिए कहा। उन्हें जानकारी थी कि सबकुछ एआरटीओ कार्यालय से होता तो वह पहुंच गए। यहां जब कार्यालय में बात हुई तो कर्मचारियों ने बताया कि हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के लिए यहां से कुछ नहीं होता है। बाहर ऑनलाइन आवेदन करना है। वह घूम रहे थे कि इसी परिसर के बाहर एक व्यक्ति मिला। पूछा कि क्या काम है। रमेश ने बताया तो उसने कहा कि चलो हम करवा देते हैं। इसके बाद आठ सौ रुपये ले लिए। जबकि सरकारी फीस 482 रुपये है। 500 रुपये में सब कुछ हो जाता है। ऐसा ही मजगवां के सुशील कुमार उपाध्याय के साथ हुआ। उन्होंने बताया कि बाइक का हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाना था। एआरटीओ कार्यालय पर एक आदमी मिला। उसने कहा कि हम सबकुछ कर देंगे। नंबर प्लेट मिल जाएगा। मैंने 800 रुपये देकर आवेदन करवा दिया। बोला है कि जल्द ही नंबर प्लेट मिल जाएगा।
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इस प्रकार खुद करें आवेदन
हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के लिए आपको वाहन के कागजात लेकर किसी साइबर कैफे या जनसेवा केंद्र पर जाना होगा। वहां आपको गाड़ी के कागजात देने होंगे। अगर शहर की एजेंसी है तो ठीक है, नहीं तो संबंधित वाहन की नजदीकी एजेंसी के जरिए आवेदन हो जाएगा। आवेदन के एक सप्ताह से एक माह के अंदर नंबर प्लेट मिल जाता है। बाइक के नंबर प्लेट के लिए 482 रुपये और कार के लिए 900 रुपये सरकारी शुल्क है। इस प्रकार अन्य वाहनों के लिए शुल्क निर्धारित है। लेकिन, दलाल के चक्कर में फंसने पर बाइक के लिए आठ सौ और कार के लिए 1200-1400 रुपये तक ले लेते हैं। जबकि उन्हें करना कुछ भी नहीं है।
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बोले अधिकारी
नए वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट एजेंसी खुद दे रही हैं। वहीं, पुराने वाहनों के लिए संबंधित एजेंसी के माध्यम से नंबर जारी हो रहा है। नंबर प्लेट उन्हीं के माध्यम से मिलता है। उसमें विभाग से कोई मतलब नहीं रहता है। -सुरेश कुमार, एआरटीओ
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गलती से अगर एआरटीओ कार्यालय पर पहुंच गए तो बाहर घूमने वाले दलालों की गिरफ्त में आ जाएंगे। बिना किसी काम के वह केवल साथ लेकर जाकर आवेदन कराने के नाम पर 200-400 रुपये अधिक वसूली कर लेंगे। जबकि उस कार्य को आप खुद आसानी कर सकते हैं। जागरूकता के अभाव में लोग इस प्रकार से ठग जा रहे हैं। एआरटीओ कार्यालय पर पड़ताल में यह हकीकत सामने आई। ऐसे में जागरूक होने की जरूरत है नहीं तो दलाल आपका दोहन कर लेंगे।
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इस प्रकार जाल में फंसाते हैं दलाल
एआरटीओ कार्यालय के आसपास वाहन से जुड़े ऑनलाइन कार्य करने वाले लोग घूमते हैं। वह देखते रहते हैं कि कार्यालय में घुसने के बाद कौन व्यक्ति हर बाबू के कमरे को झांक रहा है। इधर से उधर दौड़ रहा है। कुछ देर तक उसपर निगाह रखने के बाद बाहर आते ही पूछते हैं क्या काम है भाई साहब। जैसे बोले कि भइया हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट बनवाना है। कार्यालय के लोग कह रहे हैं कि यहां से नहीं बनेगा बाहर जाकर आवेदन करो। इसके बाद दलाल तपाक से बोलेंगे, अरे यह तो बड़ा झमेले वाला काम है। आप घूमते रह जाओगे। चलो हम ले चलते हैं एक ऑनलाइन वाले के पास। वहां सबकुछ करवा देंगे। इसके बाद घर पर नंबर प्लेट पहुंच जाएगा। फिर सामने वाला सोचता है, चलाे काम हो जाएगा। दलाल वहां ले जाकर आवेदन करवा देते हैं। इसके बाद सरकारी शुल्क के अलावा 200 से 400 रुपये अधिक वसूल लेते हैं। पड़ताल में उनके कार्य करने तरीका देखने को मिला।
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इस प्रकार फंस गए लोग
बांसी तहसील क्षेत्र के निवासी रमेश कुमार सोमवार को एआरटीओ कार्यालय पर पहुंचे थे। उनकी बाइक पुरानी है। वह मुंबई में रहते हैं। चेकिंग के दौरान बार-बार चेतावनी के कारण परिवार के लोगों ने हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने के लिए कहा। उन्हें जानकारी थी कि सबकुछ एआरटीओ कार्यालय से होता तो वह पहुंच गए। यहां जब कार्यालय में बात हुई तो कर्मचारियों ने बताया कि हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के लिए यहां से कुछ नहीं होता है। बाहर ऑनलाइन आवेदन करना है। वह घूम रहे थे कि इसी परिसर के बाहर एक व्यक्ति मिला। पूछा कि क्या काम है। रमेश ने बताया तो उसने कहा कि चलो हम करवा देते हैं। इसके बाद आठ सौ रुपये ले लिए। जबकि सरकारी फीस 482 रुपये है। 500 रुपये में सब कुछ हो जाता है। ऐसा ही मजगवां के सुशील कुमार उपाध्याय के साथ हुआ। उन्होंने बताया कि बाइक का हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाना था। एआरटीओ कार्यालय पर एक आदमी मिला। उसने कहा कि हम सबकुछ कर देंगे। नंबर प्लेट मिल जाएगा। मैंने 800 रुपये देकर आवेदन करवा दिया। बोला है कि जल्द ही नंबर प्लेट मिल जाएगा।
इस प्रकार खुद करें आवेदन
हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के लिए आपको वाहन के कागजात लेकर किसी साइबर कैफे या जनसेवा केंद्र पर जाना होगा। वहां आपको गाड़ी के कागजात देने होंगे। अगर शहर की एजेंसी है तो ठीक है, नहीं तो संबंधित वाहन की नजदीकी एजेंसी के जरिए आवेदन हो जाएगा। आवेदन के एक सप्ताह से एक माह के अंदर नंबर प्लेट मिल जाता है। बाइक के नंबर प्लेट के लिए 482 रुपये और कार के लिए 900 रुपये सरकारी शुल्क है। इस प्रकार अन्य वाहनों के लिए शुल्क निर्धारित है। लेकिन, दलाल के चक्कर में फंसने पर बाइक के लिए आठ सौ और कार के लिए 1200-1400 रुपये तक ले लेते हैं। जबकि उन्हें करना कुछ भी नहीं है।
बोले अधिकारी
नए वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट एजेंसी खुद दे रही हैं। वहीं, पुराने वाहनों के लिए संबंधित एजेंसी के माध्यम से नंबर जारी हो रहा है। नंबर प्लेट उन्हीं के माध्यम से मिलता है। उसमें विभाग से कोई मतलब नहीं रहता है। -सुरेश कुमार, एआरटीओ