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Siddharthnagar News: 10 वर्ष के अनुभव वाले डॉक्टर भी मेडिकल कॉलेज में बन पाएंगे एसोसिएट प्रोफेसर
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-सीएचसी, पीएचसी व जिला अस्पताल के डॉक्टर को मेडिकल कॉलेज उपाधि के साथ होगी तैनाती
-10 साल से अधिक अनुभव वाले डॉक्टर बनेंगे एसोसिएट प्रोफेसर, एनएमसी ने शुरू की पहल
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के नए नियम से सरकारी अस्पतालों में 10 साल का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ डॉक्टर को अब एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया जा सकेगा। वहीं दो वर्ष का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ सहायक प्रोफेसर बनाए जा सकेंगे। इससे मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों की कमी को दूर किया जाएगा। इससे शिक्षण कार्य के साथ स्वास्थ्य में भी बेहतर बदलाव होगा।
एनएमसी के इस बदलाव से मेडिकल काॅलेज को अब चिकित्सा के साथ शिक्षकों की कमी को भी दूर किया जाएगा। वहीं पीजी की कक्षाओं को संचालित करने में भी काफी सहूलियत मिलेगी, लेकिन ऐसे डॉक्टर को नियुक्ति के दो वर्ष में जैव चिकित्सा अनुसंधान में बुनियादी पाठ्यक्रम पूरा करना होगा।
नई गाइडलाइन में कम से कम 220 बेड वाले सरकारी अस्पताल में न्यूनतम दो साल के अनुभव के साथ पीजी डिग्री वाले डॉक्टर सीनियर रेजिडेंट के रूप में बिना अनुभव के सहायक प्रोफेसर बनने के लिए पात्र होंगे। इसके साथ ही पीजी पाठ्यक्रम अब दो संकाय सदस्यों और दो सीटों के साथ शुरू किए जा सकेंगे। जबकि पहले तीन संकाय और एक वरिष्ठ रेजिडेंट की आवश्यकता थी।
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इसमें किसी मेडिकल कॉलेज में 10 साल का शैक्षणिक अनुभव वाले इसके लिए पात्र होंगे। लेकिन पांच साल का प्रोफेसर के रूप में शैक्षणिक अनुभव जरूरी किया गया है। अब डीन, डायरेक्टर, प्रिसिंपल और चिकित्सा अधीक्षक अब विभागाध्यक्ष का पद नहीं रख पाएंगे। सरकारी चिकित्सा संस्थानों में तीन वर्ष का शिक्षण अनुभव रखने वाले वरिष्ठ विशेषज्ञ अब प्रोफेसर के पद के लिए पात्र होंगे।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो राजेश मोहन ने बताया कि इस नियम से मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों की कमी दूर होगी। वहीं जिला अस्पताल व अशैक्षणिक अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों के अनुभव का छात्रों को लाभ मिलेगा। जो स्वास्थ्य कर्मियों के लिए एक शिक्षक के रूप में उकेरने का एक बेहतर मौका होगा।
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-10 साल से अधिक अनुभव वाले डॉक्टर बनेंगे एसोसिएट प्रोफेसर, एनएमसी ने शुरू की पहल
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के नए नियम से सरकारी अस्पतालों में 10 साल का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ डॉक्टर को अब एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया जा सकेगा। वहीं दो वर्ष का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ सहायक प्रोफेसर बनाए जा सकेंगे। इससे मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों की कमी को दूर किया जाएगा। इससे शिक्षण कार्य के साथ स्वास्थ्य में भी बेहतर बदलाव होगा।
एनएमसी के इस बदलाव से मेडिकल काॅलेज को अब चिकित्सा के साथ शिक्षकों की कमी को भी दूर किया जाएगा। वहीं पीजी की कक्षाओं को संचालित करने में भी काफी सहूलियत मिलेगी, लेकिन ऐसे डॉक्टर को नियुक्ति के दो वर्ष में जैव चिकित्सा अनुसंधान में बुनियादी पाठ्यक्रम पूरा करना होगा।
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नई गाइडलाइन में कम से कम 220 बेड वाले सरकारी अस्पताल में न्यूनतम दो साल के अनुभव के साथ पीजी डिग्री वाले डॉक्टर सीनियर रेजिडेंट के रूप में बिना अनुभव के सहायक प्रोफेसर बनने के लिए पात्र होंगे। इसके साथ ही पीजी पाठ्यक्रम अब दो संकाय सदस्यों और दो सीटों के साथ शुरू किए जा सकेंगे। जबकि पहले तीन संकाय और एक वरिष्ठ रेजिडेंट की आवश्यकता थी।
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इसमें किसी मेडिकल कॉलेज में 10 साल का शैक्षणिक अनुभव वाले इसके लिए पात्र होंगे। लेकिन पांच साल का प्रोफेसर के रूप में शैक्षणिक अनुभव जरूरी किया गया है। अब डीन, डायरेक्टर, प्रिसिंपल और चिकित्सा अधीक्षक अब विभागाध्यक्ष का पद नहीं रख पाएंगे। सरकारी चिकित्सा संस्थानों में तीन वर्ष का शिक्षण अनुभव रखने वाले वरिष्ठ विशेषज्ञ अब प्रोफेसर के पद के लिए पात्र होंगे।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो राजेश मोहन ने बताया कि इस नियम से मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों की कमी दूर होगी। वहीं जिला अस्पताल व अशैक्षणिक अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों के अनुभव का छात्रों को लाभ मिलेगा। जो स्वास्थ्य कर्मियों के लिए एक शिक्षक के रूप में उकेरने का एक बेहतर मौका होगा।