फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   Discussion on the name of Madhav Nepal in the midst of Oli-Prachand tussle

ओली-प्रचंड के झगड़े के बीच माधव नेपाल के नाम पर चर्चा, नहीं चाहते मध्यावधि चुनाव

Thu, 12 Nov 2020 04:40 AM IST
दुष्यंत शर्मा ध्रुव यादव, कपिलवस्तु (सिद्धार्थनगर)
ध्रुव यादव, कपिलवस्तु (सिद्धार्थनगर) Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 12 Nov 2020 04:40 AM IST
विज्ञापन
Discussion on the name of Madhav Nepal in the midst of Oli-Prachand tussle
Prachand and kp sharma oli - फोटो : पीटीआई

 नेपाल में सत्ता की खींचतान फिर शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और प्रचंड के बीच छिड़ी जंग में अगले पीएम के रूप में सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ नेता व पूर्व पीएम माधव कुमार नेपाल के नाम की चर्चा तेज है। माधव नेपाल का नाम ओली समर्थकों की ओर से शुरू किया गया। नेपाल के राजनीतिक जानकार इसे ओली के खिलाफ एकजुट हुए विरोधियों में फूट डालने की कोशिश के रूप में देखे रहे हैं। 

विज्ञापन


 नेपाल में पिछले चार महीने से सत्ता की खींचतान चल रही है। प्रचंड और उनकी पार्टी नेकपा माओवादी का मजबूत व अलग अस्तित्व रहा है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ओली के साथ जाने से प्रचंड का रुतबा कम हुआ है और नेकपा माओवादी का नेकपा एमाले के साथ विलय के बाद इस लड़ाका पार्टी का अस्तित्व भी लुप्तप्राय -सा हो गया है। अब हालात ये हैं कि अस्तित्व बचाने के लिए प्रचंड प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की घेराबंदी में जुट गए हैं। इनके साथ कभी ओली समर्थक रहे पार्टी के वरिष्ठ नेता बाम देव गौतम, नारायण काजी श्रेष्ठ तथा माधव कुमार नेपाल खुलकर ओली के विरोध में खड़े हैं।
विज्ञापन


नेपाली संसद के अंकगणित पर गौर करें तो प्रचंड गुट के 36 सांसद हैं जिनके समर्थन वापस ले लेने से ओली सरकार अल्पमत में आ जाएगी। लेकिन प्रचंड और उनके साथ ओली विरोधी खेमा सरकार गिरने और मध्यावधि चुनाव का रिस्क नहीं लेना चाहते। चुनाव में जन भावनाएं ओली के पक्ष में जाने की आशंका है। लिहाजा ओली विरोधी खेमा ऐसी स्थिति से बचना चाह रहा है। ओली के अपदस्थ होने की स्थिति में प्रचंड के प्रधानमंत्री पद पर मजबूत दावेदारी थी लेकिन पिछले दो दिन से नेपाल की राजनीति में चौंकाने वाला मोड़ आया है। काठमांडू के राजनीतिक गलियारों में ओली के बाद माधव नेपाल के नाम की चर्चा तेज है।
विज्ञापन
विज्ञापन


 सूत्र बताते हैं कि भारत के गुप्तचर संस्था रॉ के चीफ से ओली की अकेले मुलाकात के बाद ओली के खिलाफ तीसरी बार मोर्चे बंदी शुरू हुई है। खबर आ रही है कि ओली कुर्सी छोड़ने को तैयार हैं लेकिन प्रचंड के लिए नहीं। ओली खेमे की ओर से माधव नेपाल का नाम चलाया जा रहा है। इधर अपना नाम आने पर  माधव नेपाल भी सक्रिय हो गए हैं। नेपाल में सत्ता को लेकर जो उठापटक चल रही है उसे देखते हुए अगले  सप्ताह तक कुछ भी हो सकने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। नेपाल के ताजा राजनीतिक घटनाक्रम पर नेपाली कांग्रेस की रहस्यमय खामोशी पर भी राजनीतिक विश्लेषकों की नजर है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed