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बाढ़ से बचाव में ढाल बनेंगे आपदा मित्र
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बाढ़ से बचाव में ढाल बनेंगे आपदा मित्र
300 प्रशिक्षित आपदा मित्र एनडीआरएफ के जवानों की तरह करेंगे काम
सिद्धार्थनगर। बाढ़ की त्रासदी में फंसे लोगों को मदद पहुंचाने में इस बार आपदा मित्र ढाल बनकर काम करेंगे। एनडीआरएफ के जवानों की तरह वह विषम परिस्थितियों में बचाव का कार्य करेंगे और राहत पहुंचाने में मदद करेंगे। इसके लिए 300 पुरुष और महिला आपदा मित्र को प्रशिक्षित कर उन्हें संसाधन से लैस किया जाएगा।
जनपद की गिनती प्रदेश के तराई क्षेत्रों में होती है। जिले की 68 किमी सीमा नेपाल से लगती है। इसी बीच में नेपाल से निकलकर क्षेत्र में कई नदी और नाले आए हुए हैं। जहां से नियमित पानी आता रहता है। बरसात के समय में नेपाल की ओर से पानी छोड़े जाने के बाद बाढ़ के हालात उत्पन्न हो जाते हैं। जनपद का लगभग सभी हिस्सा बाढ़ की चपेट में रहता है। कारण जिले में नदियों का जाल फैला हुआ है। ऐसे में जनजीवन पटरी से उतर जाती है। बाढ़ में फंसकर लोगों को परेशानी होती है। जानमाल का भी खतरा बना रहता है।
महीनों तक एनडीआरएफ की टीम बचाव और राहत सामग्री पहुंचाने में जुटी रहती है। संख्या कम होने से बाढ़ में फंसे लोगों को परेशानी होती है। समय से राहत सामग्री भी नहीं पहुंच पाता है, इसीलिए इस बार बाढ़ से बचाव को लेकर प्रशासन अलर्ट हो गया है। बाढ़ से बचाव में एक फौज खड़ी रहेगी, जिसका नाम आपदा मित्र है।
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जिले में 300 आपदा मित्रों का चयन किया गया है। इन्हें राज्य आपदा मोचन बल की ओर से प्रशिक्षित किया जा रहा है। 200 लोगों को बाढ़ से बचाव के प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है। ये 28 जून को प्रशिक्षण प्राप्त कर लौट आएंगे। यह पूर्ण रूप से संसाधन से लैस रहेंगे। एनडीआरएफ के जवानों की तरह कदम से कदम मिलाकर कार्य करेंगे। संख्या बल अधिक होने से लोगों को समय से राहत पहुंचाया जा सकेगा। इस संबंध में एडीएम उमाशंकर ने बताया कि आपदा मित्रों का एक दल प्रशिक्षण के लिए गया है।
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300 प्रशिक्षित आपदा मित्र एनडीआरएफ के जवानों की तरह करेंगे काम
सिद्धार्थनगर। बाढ़ की त्रासदी में फंसे लोगों को मदद पहुंचाने में इस बार आपदा मित्र ढाल बनकर काम करेंगे। एनडीआरएफ के जवानों की तरह वह विषम परिस्थितियों में बचाव का कार्य करेंगे और राहत पहुंचाने में मदद करेंगे। इसके लिए 300 पुरुष और महिला आपदा मित्र को प्रशिक्षित कर उन्हें संसाधन से लैस किया जाएगा।
जनपद की गिनती प्रदेश के तराई क्षेत्रों में होती है। जिले की 68 किमी सीमा नेपाल से लगती है। इसी बीच में नेपाल से निकलकर क्षेत्र में कई नदी और नाले आए हुए हैं। जहां से नियमित पानी आता रहता है। बरसात के समय में नेपाल की ओर से पानी छोड़े जाने के बाद बाढ़ के हालात उत्पन्न हो जाते हैं। जनपद का लगभग सभी हिस्सा बाढ़ की चपेट में रहता है। कारण जिले में नदियों का जाल फैला हुआ है। ऐसे में जनजीवन पटरी से उतर जाती है। बाढ़ में फंसकर लोगों को परेशानी होती है। जानमाल का भी खतरा बना रहता है।
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महीनों तक एनडीआरएफ की टीम बचाव और राहत सामग्री पहुंचाने में जुटी रहती है। संख्या कम होने से बाढ़ में फंसे लोगों को परेशानी होती है। समय से राहत सामग्री भी नहीं पहुंच पाता है, इसीलिए इस बार बाढ़ से बचाव को लेकर प्रशासन अलर्ट हो गया है। बाढ़ से बचाव में एक फौज खड़ी रहेगी, जिसका नाम आपदा मित्र है।
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जिले में 300 आपदा मित्रों का चयन किया गया है। इन्हें राज्य आपदा मोचन बल की ओर से प्रशिक्षित किया जा रहा है। 200 लोगों को बाढ़ से बचाव के प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है। ये 28 जून को प्रशिक्षण प्राप्त कर लौट आएंगे। यह पूर्ण रूप से संसाधन से लैस रहेंगे। एनडीआरएफ के जवानों की तरह कदम से कदम मिलाकर कार्य करेंगे। संख्या बल अधिक होने से लोगों को समय से राहत पहुंचाया जा सकेगा। इस संबंध में एडीएम उमाशंकर ने बताया कि आपदा मित्रों का एक दल प्रशिक्षण के लिए गया है।