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Siddharthnagar News: परशुराम लक्ष्मण संवाद का मंचन देख श्रद्धालु हो गए मंत्रमुग्ध
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पकडी क्षेत्र के मेहनौली गांव में आयोजित रामलीला में परशुराम लक्ष्मण संबाद का मंचन करते कलाकार।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पकड़ी बाजार। मेहनौली गांव में चल रही रामलीला में बृहस्पतिवार को अयोध्या के कलाकारों ने परशुराम लक्ष्मण संवाद का मंचन कर पंडाल में बैठे लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच पर दिखाया गया कि शिव धनुष टूटने की ध्वनि मंचला पर्वत पर तपस्या कर रहे परशुराम के कानों तक पहुंचती है, वह चल पड़ते हैं। राजा जनक के दरबार में पहुंचते हैं, वहां शिव धनुष टूटा देख क्रोधित हो जाते हैं।
उनका क्रोध देखकर राजा जनक घबरा जाते हैं, और प्रणाम करते हैं। परशुराम पूछते हैं कि इस धनुष को तोड़ने का दुस्साहस किसने किया, तो राम प्रणाम करते हुए बोले इस शिव धनुष को तोड़ने वाला शिव का दास ही होगा मुनिवर। मुझे क्षमा करें। तब लक्ष्मण बोले यह अपराध नहीं है, फिर भी भाई ने क्षमा मांग ली है। हम भाइयों ने बाल्यवस्था में बहुत सी धनुही तोड़ी है, पर आपने कभी ऐसा क्रोध नहीं किया। आप जैसे ब्राह्मण को क्रोध शोभा नहीं देता।
परशुराम बोले नादान बालक मैंने 21 बार पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन किया है। श्रीराम विनम्र भाव से बोले एक क्षत्रिय की गलती से सभी क्षत्रिय को नष्ट करना उचित नहीं है आप तो क्षत्रिय के अहंकार को नष्ट करना चाहते थे। यह सुनकर परशुराम बोले प्रभु मैं आपको पहचानने में भूल कर गया।
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पकड़ी बाजार। मेहनौली गांव में चल रही रामलीला में बृहस्पतिवार को अयोध्या के कलाकारों ने परशुराम लक्ष्मण संवाद का मंचन कर पंडाल में बैठे लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच पर दिखाया गया कि शिव धनुष टूटने की ध्वनि मंचला पर्वत पर तपस्या कर रहे परशुराम के कानों तक पहुंचती है, वह चल पड़ते हैं। राजा जनक के दरबार में पहुंचते हैं, वहां शिव धनुष टूटा देख क्रोधित हो जाते हैं।
उनका क्रोध देखकर राजा जनक घबरा जाते हैं, और प्रणाम करते हैं। परशुराम पूछते हैं कि इस धनुष को तोड़ने का दुस्साहस किसने किया, तो राम प्रणाम करते हुए बोले इस शिव धनुष को तोड़ने वाला शिव का दास ही होगा मुनिवर। मुझे क्षमा करें। तब लक्ष्मण बोले यह अपराध नहीं है, फिर भी भाई ने क्षमा मांग ली है। हम भाइयों ने बाल्यवस्था में बहुत सी धनुही तोड़ी है, पर आपने कभी ऐसा क्रोध नहीं किया। आप जैसे ब्राह्मण को क्रोध शोभा नहीं देता।
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परशुराम बोले नादान बालक मैंने 21 बार पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन किया है। श्रीराम विनम्र भाव से बोले एक क्षत्रिय की गलती से सभी क्षत्रिय को नष्ट करना उचित नहीं है आप तो क्षत्रिय के अहंकार को नष्ट करना चाहते थे। यह सुनकर परशुराम बोले प्रभु मैं आपको पहचानने में भूल कर गया।
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