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अध्ययन के लिए मिला मृत मानव शरीर
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अध्ययन के लिए मिला मृत मानव शरीर
सिद्धार्थनगर। मावध प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में विद्यार्थियों को शरीर रचना के अध्ययन के लिए मृत मानव शरीर प्राप्त हुआ है। मृत शरीर को एनाटॉमी विभाग में सुरक्षित रख दिया गया है। 14 फरवरी एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू होने के बाद प्रायोगिक अध्ययन में यह बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा। पुलिस के सहयोग से मेडिकल कॉलेज को मृत शरीर प्राप्त हुआ है।
मेडिकल कॉलेज में प्रथम सत्र में एबीबीएस की पढ़ाई शुरू होने वाली है। कक्षाएं शुरू करने के साथ ही प्रायोगिक अध्ययन की तैयारी की जा रही है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मृत शरीर मुहैया कराने के लिए पुलिस विभाग से अनुरोध किया था। मेडिकल कॉलेज में शारीरिक अध्ययन के लिए और मृत शरीर की आवश्यकता है। शोध के लिए मृत शरीर बेहद महत्वपूर्ण है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस की मदद से मेडिकल कॉलेज को मृत मानव शरीर प्राप्त हुआ है।
72 घंटे बाद पुलिस सौंप सकती है मृत शरीर
पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह ने बताया कि पुलिस एक्ट की धारा 35 के अंतर्गत मेडिकल कॉलेज को मृत शरीर मुहैया कराया गया है। मृत शरीर को उसकी रचना के अध्ययन के लिए एनाटॉमी विभाग में सुरक्षित रखा गया है। कोई व्यक्ति हुलिया के आधार पर मृत शरीर को अपने परिजन का होने की दावा करता है तो उसे मेडिकल कॉलेज भेजकर पहचान कराई जा सकती है। यदि वह शव, किसी के परिवार के सदस्य का होगा तो उसे अंत्येष्टि के लिए सौंप दिया जाएगा। भविष्य में जब मृत शरीर की अंत्येष्टि करने की नौबत आएगी तो मेडिकल कॉलेज को पुलिस से अनुमति लेनी होगी। सामान्य मौत होने पर कोई व्यक्ति 72 घंटे में अगर यह दावा न करे कि मृत व्यक्ति उसके परिवार का सदस्य था तो शव को अध्ययन के लिए सौंपा जा सकता है।
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बिना पंजीयन के भी परिजन कर सकते हैं देहदान
यदि कोई चाहता है कि दुनिया में न रहने के बाद बाद भी उसका शरीर, देश और समाज के काम आए तो वह देहदान के लिए पंजीयन करा सकता है। जो लोग पंजीयन कराते हैं, उनके निधन के बाद उनकी इच्छा के अनुसार, परिजन मृत शरीर को मेडिकल कॉलेज को सौंप देते हैं। जिनका देहदान होता है, वे अपने जीवनकाल के बाद चिकित्सा शिक्षा में उपयोगी साबित होते हैं। यदि कोई व्यक्ति अपनी माता या पिता के निधन के बाद उनके मृत शरीर को दान करने के लिए इच्छुक होता है तो बिना पंजीयन के भी देहदान किया जा सकता है। प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में देहदान का पंजीयन किया जा रहा है। जरूरत पड़ती है तो देहदान करने वाले व्यक्ति के बारे में पुलिस से सत्यापन कराया जाता है, लेकिन में परिजन को परेशान होने की नौबत नहीं आती है। अच्छे कार्य के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन के साथ पुलिस भी सहयोग करती है।
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सिद्धार्थनगर। मावध प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में विद्यार्थियों को शरीर रचना के अध्ययन के लिए मृत मानव शरीर प्राप्त हुआ है। मृत शरीर को एनाटॉमी विभाग में सुरक्षित रख दिया गया है। 14 फरवरी एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू होने के बाद प्रायोगिक अध्ययन में यह बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा। पुलिस के सहयोग से मेडिकल कॉलेज को मृत शरीर प्राप्त हुआ है।
मेडिकल कॉलेज में प्रथम सत्र में एबीबीएस की पढ़ाई शुरू होने वाली है। कक्षाएं शुरू करने के साथ ही प्रायोगिक अध्ययन की तैयारी की जा रही है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मृत शरीर मुहैया कराने के लिए पुलिस विभाग से अनुरोध किया था। मेडिकल कॉलेज में शारीरिक अध्ययन के लिए और मृत शरीर की आवश्यकता है। शोध के लिए मृत शरीर बेहद महत्वपूर्ण है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस की मदद से मेडिकल कॉलेज को मृत मानव शरीर प्राप्त हुआ है।
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72 घंटे बाद पुलिस सौंप सकती है मृत शरीर
पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह ने बताया कि पुलिस एक्ट की धारा 35 के अंतर्गत मेडिकल कॉलेज को मृत शरीर मुहैया कराया गया है। मृत शरीर को उसकी रचना के अध्ययन के लिए एनाटॉमी विभाग में सुरक्षित रखा गया है। कोई व्यक्ति हुलिया के आधार पर मृत शरीर को अपने परिजन का होने की दावा करता है तो उसे मेडिकल कॉलेज भेजकर पहचान कराई जा सकती है। यदि वह शव, किसी के परिवार के सदस्य का होगा तो उसे अंत्येष्टि के लिए सौंप दिया जाएगा। भविष्य में जब मृत शरीर की अंत्येष्टि करने की नौबत आएगी तो मेडिकल कॉलेज को पुलिस से अनुमति लेनी होगी। सामान्य मौत होने पर कोई व्यक्ति 72 घंटे में अगर यह दावा न करे कि मृत व्यक्ति उसके परिवार का सदस्य था तो शव को अध्ययन के लिए सौंपा जा सकता है।
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बिना पंजीयन के भी परिजन कर सकते हैं देहदान
यदि कोई चाहता है कि दुनिया में न रहने के बाद बाद भी उसका शरीर, देश और समाज के काम आए तो वह देहदान के लिए पंजीयन करा सकता है। जो लोग पंजीयन कराते हैं, उनके निधन के बाद उनकी इच्छा के अनुसार, परिजन मृत शरीर को मेडिकल कॉलेज को सौंप देते हैं। जिनका देहदान होता है, वे अपने जीवनकाल के बाद चिकित्सा शिक्षा में उपयोगी साबित होते हैं। यदि कोई व्यक्ति अपनी माता या पिता के निधन के बाद उनके मृत शरीर को दान करने के लिए इच्छुक होता है तो बिना पंजीयन के भी देहदान किया जा सकता है। प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में देहदान का पंजीयन किया जा रहा है। जरूरत पड़ती है तो देहदान करने वाले व्यक्ति के बारे में पुलिस से सत्यापन कराया जाता है, लेकिन में परिजन को परेशान होने की नौबत नहीं आती है। अच्छे कार्य के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन के साथ पुलिस भी सहयोग करती है।