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गांवों को बचाने के लिए बने बांध जर्जर, सहमे ग्रामीण

Thu, 30 Jun 2022 11:27 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jun 2022 11:27 PM IST
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Dam built to save villages is dilapidated, villagers scared
गांवों को बचाने के लिए बने बांध जर्जर, सहमे ग्रामीण
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सिद्धार्थनगर/बांसी। बारिश होते ही बांधों की मरम्मत की सच्चाई उजागर होने लगी है। राप्ती व बूढ़ी राप्ती के दोनो तरफ बने बांध वर्तमान में भी चूहों के बनाए बिल व बारिश की कटान से क्षतिग्रस्त है। राप्ती के दक्षिणी पश्चिमी तट पर स्थित डुमरियागंज बांसी बांध कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त था, जिसकी मरम्मत कराई गई थी, लेकिन बारिश होते ही स्थिति पहले जैसी हो गई। बंधों के आसपास के गांवों के लोग बाढ़ की आशंका से सहमे हैं।
प्रत्येक वर्ष बाढ़ का दंश झेलने वाले जिले के लोगों की सुरक्षा एवं बचाव के लिए बने बांधों की बृहस्पतिवार को पड़ताल की गई। बांसी-डुमरियागंज बांध में कई स्थानों पर चूहों के बिल नजर आए। हालत यह है कि इस बांध पर उपखंड कार्यालय के पीछे कई स्थानों पर बारिश से कटान व चूहों के बिल हैं, जो विभाग के अधिकारियों को नजर नहीं आ रहा हैं। यही हाल क्षेत्र के बांसी-पनघटिया, सोनखर-हाटा, ककरही-गोनहा, असोगवा नगवा बांध का है।
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पिछले साल आई बाढ़ में इन सभी बांधो में कई जगहों पर रिसाव हुआ था, जिसे रोकने में विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। यदि इस बार भी नदी में जलस्तर बढ़ा तो इन बांधो पर दबाव बढ़ेगा, जो खतरनाक साबित हो सकता है। क्षेत्र के ग्रामीण नीलेश निषाद, मोहनलाल, रामदास आदि का कहना है कि बांधों की मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूरी की गई है। बांध अब भी जर्जर स्थित में हैं और खतरे को दावत दे रहे हैं।
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पुलिया में फाटक नहीं होने से परेशानी
बांसी। जमींदारी बांध में स्थित पुलिया में फाटक न लगने से लोग सहमे हुए हैं। इनका कहना है कि नदी का जलस्तर बढ़ने पर पुलिया के रास्ते नदी का पानी गांव में भर जाएगा और उन्हे काफी नुकसान उठाना पड़ेगा। इंद्रानगर वार्ड के सभासद के प्रतिनिधि नीलेश निषाद का कहना है कि गरगजवा गांव के नाले का पानी जमींदारी बांध में स्थित पुलिया से नदी में गिरता है और इस पुलिया में फाटक अब तक नहीं लगाया गया। ऐसे में नदी का जलस्तर बढ़ने पर इस पुलिया के रास्ते नदी का पानी गरगजवा, पिपरहिया, कटहा गांव में भर सकता है। उन्होने विभागीय अधिकारियो से पुलिया में फाटक लगाने की मांग की है।
क्षतिग्रस्त दलपतपुर-परसोहन बांध की मरम्मत की दरकार
बिस्कोहर। क्षेत्र का दलपतपुर-परसोहन बांध जर्जर और क्षतिग्रस्त हो गया है। इधर बारिश शुरू होने से तटवर्ती क्षेत्रों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। चंद्रिका, सत्यपाल, राम बनारस, राम केवल गौतम, बहेतू व विनोद आदि का कहना है कि बूढ़ी राप्ती में वर्ष 2014 व 2016 में आई बाढ़ में डेगहर गांव के पास बंधे की कटान हुई थी।

उससे कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे और धन हानि के साथ हजारों एकड़ फसलों का नुकसान हो गया था। जर्जर बांध का मरम्मत नहीं होने से बंधे के पास स्थित दलपतपुर, डेगहर, परसोहन आदि गांवों के लोग बारिश होने से बाढ़ आने की आशंका से चिंतित हैं। कटान स्थल पर नीचे बोरी डालकर ऊपर से मिट्टी व ईट आदि डालकर छोड़ दिया गया है। इस तरह से नदी की कटान को रोकने के लिए इंतजाम किया गया है। यह कटान रोकने के लिए नाकाफी है, जिससे बाढ़ के दौरान खतरा हो सकता है। संवाद
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