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हेलमेट लगाए होता तो बच जाती शिवकुमार की जान

Tue, 26 Mar 2019 11:06 PM IST
siddharthnagar Published by: राकेश पांडेय Updated Tue, 26 Mar 2019 11:06 PM IST
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हेलमेट लगाए होता तो बच जाती शिवकुमार की जान
शिवकुमार की मौत के बाद गमजदा घरवाले। - फोटो : अमर उजाला
चिल्हिया। शोहरतगढ़-सनई मार्ग पर चिल्हिया थाना क्षेत्र के गौहनिया गांव में पास सोमवार देर शाम हुए सड़क हादसे में घायल शिवकुमार(18) की मौत हो गई। सिर में गंभीर चोट लगने से मौत की बात सामने आ रही है। वह हेलमेट लगाया होता तो शायद शिवकुमार की जान बच जाती। वहीं, दूसरे युवक का जिला अस्पताल में इलाज हो रहा है।
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चिल्हिया थाना क्षेत्र के बूढ़पार गांव निवासी18 वर्षीय शिवकुमार पुत्र रमाकांत शोहरतगढ़- सनई मार्ग पर स्थित गौहनिया गांव के पास बाइक से पहुंचे थे कि सामने से आई बाइक से टक्कर हो गई। हादसे में शिवकुमार के अलावा दूसरे बाइक पर सवार चिल्हिया थाना क्षेत्र के लुचुईया गांव निवासी अनीश (20) पुत्र रामपूजन भी जख्मी हो गया था। दोनों ने हेलमेट नहीं पहना था। आसपास के लोगों ने दोनों को जिला अस्पताल ले गए, जहां शिवकुमार को डॉक्टरों ने गंभीर बताते हुए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था। गोरखपुर ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। लोगों के मुताबिक सिर में गंभीर चोट के कारण उसकी मौत हुई। अगर वह हेमलेट पहले होता तो तो शायद उसकी जान बच जाती।
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बुझ गया घर का चिराग, पांच बहनों का छूटा साथ
अतुल शुक्ल
चिल्हिया। शिव कुमार की मौत से घर का चिराग बुझ गया। पांच बहनों में अकेला शिवकुमार घर में सभी का दुलारा था। उसकी मौत ने पूरे घर के उम्मीदों को तोड़ दिया। मौत की खबर मिलते ही रात में घर में कोहराम मच गया। माता- पिता, बहनों का रो -रोकर बेहोश हो जा रही थीं। उन्हें देखकर गांव के सभी लोग अपने आंसू रोक न सके।
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बूढ़ापार निवासी शिवकुमार अपने पिता के साथ मुंबई में रहता था। पिता के काम में हाथ बटा रहा था। दोनों एक वहां एक साथ काम करते थे। परिवार के बढ़ते बोझ को देख शिव कुमार बर्दाश्त नहीं कर सका और पिता के बोझ को खुद का बोल समझाते हुए वह मुंबई चला गया था। अभी एक माह पहले ही वह घर आया था। किसी काम से चिल्हिया गया था और देर साम को अपने घर लौट रहा था। गांव की ओर मुड़ा ही था कि हादसे का शिकार हो गया। देर रात गांव में मौत की सूचना पहुंची तो परिजन गमगीन हो उठे। गावं में चित्कार मच गई। सुबह होते ही गांव के लोग घर की ओर चल दिए। परिजनों को बिलखता देख। हर किसी की आंखें नम हो गईं। मृतक की मां पाती के अलावा पांच बहने जानकी 11 वर्ष, मुस्कान 9 वर्ष, मानसी 7 वर्ष, ललिता 5 वर्ष, मंजू तीन वर्ष की है।
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