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नोडल अधिकारी ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के नाम पर मारा छापा
Mon, 03 Jun 2019 11:10 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
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Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 03 Jun 2019 11:10 PM IST
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सिद्धार्थनगर। आयुष्मान योजना के नोडल अधिकारी डॉ. प्रशांत अस्थाना पर तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सौम्या पांडेय के नाम पर निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम पर छापा मारने का आरोप लगा है। जांच के नाम पर निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम से रुपये वसूलने की भी बात कही गई है। सीएमओ ने मामले की जांच के लिए इटवा सीएचसी अधीक्षक डॉ. वीके वैद्य व उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. डीके चौधरी को नामित किया है। सीएमओ ने तीन दिन के अंदर पूरे मामले की रिपोर्ट भी मांगी है।
जिले के कई नर्सिंग होम और निजी अस्पतालों के संचालकों ने नोडल अधिकारी प्रशांत अस्थाना पर आरोप लगाया था कि तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सौम्या पांडेय के नाम पर गलत से तरीके से छापा मारा गया। इस दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट का गैर जनपद स्थानांतरण हो चुका था। इसकी जानकारी जब संचालकों को हुई तो उन्होंने इसकी शिकायत सीएमओ से की। आरोप है कि छापे के नाम पर डॉ. प्रशांत अस्थाना ने निजी अस्पताल संचालकों और नर्सिंग होम से लेन-देन के नाम पर रुपये भी वसूले। मामले में जब दबाव पड़ा तो सीएमओ ने आनन-फानन में दो चिकित्सकों को जांच की जिम्मेदारी सौंपते हुए तीन दिनों के अंदर रिपोर्ट मांगी है। बता दें, डॉ. प्रशांत अस्थाना का शुरू से ही विवाद से नाता रहा है। बर्डपुर पीएचसी पर तैनाती के समय प्राइवेट प्रैक्टिस करते समय रुपये लेते हुए वीडियो भी वायरल हुआ था। मामले की जांच सदर एसडीएम को सौंपी गई थी। इसके बाद कार्रवाई के तौर पर जिला मुख्यालय अटैच किया गया था। इसके बाद से प्रशासन की कृपा दृष्टि बरसी तो कई विभागों के नोडल अधिकारी बना दिए गए। इसके बाद से लगातार छापेमारी के नाम पर रुपये वसूलने के आरोप लगते रहे। दबाव पड़ने पर सीएमओ ने यह कदम उठाया है। सीएमओ डॉ. आरके मिश्र ने बताया कि मामले की जांच के लिए डॉ. वीके वैद्य और डॉ. डीके चौधरी को जिम्मेदारी दी गई है। तीन दिनों के अंदर रिपोर्ट मांगी गई है।
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जिले के कई नर्सिंग होम और निजी अस्पतालों के संचालकों ने नोडल अधिकारी प्रशांत अस्थाना पर आरोप लगाया था कि तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सौम्या पांडेय के नाम पर गलत से तरीके से छापा मारा गया। इस दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट का गैर जनपद स्थानांतरण हो चुका था। इसकी जानकारी जब संचालकों को हुई तो उन्होंने इसकी शिकायत सीएमओ से की। आरोप है कि छापे के नाम पर डॉ. प्रशांत अस्थाना ने निजी अस्पताल संचालकों और नर्सिंग होम से लेन-देन के नाम पर रुपये भी वसूले। मामले में जब दबाव पड़ा तो सीएमओ ने आनन-फानन में दो चिकित्सकों को जांच की जिम्मेदारी सौंपते हुए तीन दिनों के अंदर रिपोर्ट मांगी है। बता दें, डॉ. प्रशांत अस्थाना का शुरू से ही विवाद से नाता रहा है। बर्डपुर पीएचसी पर तैनाती के समय प्राइवेट प्रैक्टिस करते समय रुपये लेते हुए वीडियो भी वायरल हुआ था। मामले की जांच सदर एसडीएम को सौंपी गई थी। इसके बाद कार्रवाई के तौर पर जिला मुख्यालय अटैच किया गया था। इसके बाद से प्रशासन की कृपा दृष्टि बरसी तो कई विभागों के नोडल अधिकारी बना दिए गए। इसके बाद से लगातार छापेमारी के नाम पर रुपये वसूलने के आरोप लगते रहे। दबाव पड़ने पर सीएमओ ने यह कदम उठाया है। सीएमओ डॉ. आरके मिश्र ने बताया कि मामले की जांच के लिए डॉ. वीके वैद्य और डॉ. डीके चौधरी को जिम्मेदारी दी गई है। तीन दिनों के अंदर रिपोर्ट मांगी गई है।
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