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मुखिया को छीना, पत्नी और मासूमों पर टूटा गमों का पहाड़
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कोरोना ने मुखिया को छीना, परिवार हुआ बेसहारा
उन परिवारों की कहानी, दु:ख की कोई सीमा नहीं, पत्नी और बच्चे हुए बेसहारा
रबींद्र कुमार गुप्ता
डुमरियागंज। घर के मुखिया की कोरोना से मृत्यु क्या हुई परिवार बेसहारा हो गया। पत्नी, तीन बच्चों और दोनों पैरों से विकलांग भाई को दो जून की रोटी मिलनी मुश्किल हो गई है। बच्चों की पढ़ाई के बारे में तो सोच भी नहीं सकते।
नगर के पीपुल्स इंटर कॉलेज के सामने रहने वाले गणेश कुमार (49) पेशे से इलेक्ट्रिीशियन थे। छोटे-मोटे कार्यक्रमों में साउंड सिस्टम का भी काम देखते थे। इसी से पत्नी, तीन बच्चों के साथ विकलांग भाई का पेट पालते थे। कोरोना काल में गणेश की तबीयत अचानक खराब हुई। अस्पताल जाने पर पता चला कि आक्सीजन लेवल काफी घट गया है। जैसे-तैसे विकलांग भाई रमेश उर्फ भीखू मोहल्ले और दोस्तों की मदद से इलाज कराने लगे, मगर गणेश की मौत हो गई। गणेश की पत्नी विद्यामती बताती हैं कि घर में कमाने वाले वही अकेले थे। उनकी ही कमाई से बच्चों की पढ़ाई के साथ परिवार का भरण पोषण होता था। उनके नहीं रहने पर सबसे बड़ा संकट पेट पालने का हो गया है।
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शिक्षक पति को छीना, सदमे में पत्नी
ज्योतिष चंद्र श्रीवास्तव एक निजी स्कूल में शिक्षक थे। कोरोना महामारी की चपेट में आकर उनकी मौत हो गई। इस कारण परिवार पर वर्तमान में भरण-पोषण की समस्या हो गई है। पत्नी अरुणा श्रीवास्तव कहती हैं कि पति की मौत से सब कुछ बिखर गया। पेट पालने के अलावा अब एक ही चिंता सता रही है कि बच्चों की पढ़ाई कहीं छूट न जाए। सरकार व प्रशासन से उम्मीद है कि कोई मदद मिल जाए। अरुणा ने बताया बड़े बेटे राजकमल की मानसिक हालत ठीक नहीं रहती है। बड़ी बेटी भी शादी योग्य हो रही है। उसकी शादी कैसे करेंगे यह चिंचा भी खाए जा रही है।
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उन परिवारों की कहानी, दु:ख की कोई सीमा नहीं, पत्नी और बच्चे हुए बेसहारा
रबींद्र कुमार गुप्ता
डुमरियागंज। घर के मुखिया की कोरोना से मृत्यु क्या हुई परिवार बेसहारा हो गया। पत्नी, तीन बच्चों और दोनों पैरों से विकलांग भाई को दो जून की रोटी मिलनी मुश्किल हो गई है। बच्चों की पढ़ाई के बारे में तो सोच भी नहीं सकते।
नगर के पीपुल्स इंटर कॉलेज के सामने रहने वाले गणेश कुमार (49) पेशे से इलेक्ट्रिीशियन थे। छोटे-मोटे कार्यक्रमों में साउंड सिस्टम का भी काम देखते थे। इसी से पत्नी, तीन बच्चों के साथ विकलांग भाई का पेट पालते थे। कोरोना काल में गणेश की तबीयत अचानक खराब हुई। अस्पताल जाने पर पता चला कि आक्सीजन लेवल काफी घट गया है। जैसे-तैसे विकलांग भाई रमेश उर्फ भीखू मोहल्ले और दोस्तों की मदद से इलाज कराने लगे, मगर गणेश की मौत हो गई। गणेश की पत्नी विद्यामती बताती हैं कि घर में कमाने वाले वही अकेले थे। उनकी ही कमाई से बच्चों की पढ़ाई के साथ परिवार का भरण पोषण होता था। उनके नहीं रहने पर सबसे बड़ा संकट पेट पालने का हो गया है।
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शिक्षक पति को छीना, सदमे में पत्नी
ज्योतिष चंद्र श्रीवास्तव एक निजी स्कूल में शिक्षक थे। कोरोना महामारी की चपेट में आकर उनकी मौत हो गई। इस कारण परिवार पर वर्तमान में भरण-पोषण की समस्या हो गई है। पत्नी अरुणा श्रीवास्तव कहती हैं कि पति की मौत से सब कुछ बिखर गया। पेट पालने के अलावा अब एक ही चिंता सता रही है कि बच्चों की पढ़ाई कहीं छूट न जाए। सरकार व प्रशासन से उम्मीद है कि कोई मदद मिल जाए। अरुणा ने बताया बड़े बेटे राजकमल की मानसिक हालत ठीक नहीं रहती है। बड़ी बेटी भी शादी योग्य हो रही है। उसकी शादी कैसे करेंगे यह चिंचा भी खाए जा रही है।
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