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गर्मी में ठंडा हो गया ठंडे का धंधा
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कोरोना: गर्मी में आइसक्रीम का व्यापार ठंडा
कोरोना संक्रमण काल से व्यापारी तबाह हुए
कारोबारियों का लाखों का रुपये का नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कोरोना संक्रमण फैलने के डर से ज्यादातर लोगों ने इस गर्मी के मौसम में भी कोल्डड्रिंक पीना छोड़ दिए हैं। इससे कोल्डड्रिंक का कारोबार एकदम मंदा हो गया है। 10 फीसदी भी कोल्डड्रिंक की बिक्री नहीं रह गई है। इससे शीतलपेय का कारोबार करने वालों को करोड़ों रुपये का झटका लगा है।
गर्मी के मौसम में सड़कों के किनारे खड़े होकर कोल्डड्रिंक पीने वाले बहुत लोग होते थे। शादी-विवाह में भी कोल्डड्रिंक की बहुत खपत होती थी लेकिन, अप्रैल से ही कोरोना की दूसरी लहर के भयावह रूप ले लेने से ज्यादातर लोगों ने कोल्डड्रिंक पीने से तौबा कर ली। आम धारणा है कि ठंड के कारण यह संक्रमण लोगों को अपनी चपेट में लेता है। शुरुआती संक्रमण भी गले में होता है, इसलिए गला पकड़ लेने के डर से लोगों ने शीतलपेयों को दरकिनार कर दिया। जो शादी-विवाह हो रहे हैं, उसमें भी कोल्डड्रिंक की मांग नहीं है। इसकी वजह से कोल्डड्रिंक का कारोबार लगभग 90 फीसदी तक सिमट गया है।
आइसक्रीम और फ्रूट जूस
विभिन्न प्रकार के आइसक्रीम की बिक्री बहुत कम हो गई है। इसी प्रकार विभिन्न प्रकार के फ्रूट जूूस भी बाजार से इस बार गायब हैं। फ्रीज में रखकर बेचे जाने वाली लस्सी और दूध जैसी पेय पदार्थ की न बिक्री हो रही है और न ही सप्लाई आ रही है।
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40 करोड़ के कारोबार के नुकसान का अनुमान
गर्मी के सीजन में शीतलपेयों का जिले में कारोबार लगभग 40 से 50 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है। जिला मुख्यालय के थोक कारोबारी हरिद्वार प्रसाद ने बताया कि जिले में कुल आठ एजेंसी हैं। सभी पर कोल्डड्रिंक की बिक्री बिल्कुल नहीं है। इस बार शादी-विवाह में भी कोल्डड्रिंक की मांग एकदम नहीं है। कोल्डड्रिंक पीने से गला न पकड़ ले और उन्हें अस्पताल न जाना पड़े, इस डर से कोल्डड्रिंक पीकर कोई गलती नहीं करना चाहता है। पिछले साल के कोरोना में व्यापार की स्थिति इतनी खराब नहीं थी।
सर्दी होने का भय
कोरोना संक्रमण के दौर में सर्दी, जुकाम से बचने के लिए लोग कोल्डड्रिंक पीने से परहेज कर रहे हैं। मेडिकल अफसर डॉ. आशीष कुमार सत्यार्थी के अनुसार बदलते मौसम में शीतल पेय पदार्थों से परहेज करना चाहिए, इसमें सर्दी होने का जोखिम ज्यादा है। इस दौर में सर्दी जुकाम से बचने की आवश्यकता है।
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कोरोना संक्रमण काल से व्यापारी तबाह हुए
कारोबारियों का लाखों का रुपये का नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कोरोना संक्रमण फैलने के डर से ज्यादातर लोगों ने इस गर्मी के मौसम में भी कोल्डड्रिंक पीना छोड़ दिए हैं। इससे कोल्डड्रिंक का कारोबार एकदम मंदा हो गया है। 10 फीसदी भी कोल्डड्रिंक की बिक्री नहीं रह गई है। इससे शीतलपेय का कारोबार करने वालों को करोड़ों रुपये का झटका लगा है।
गर्मी के मौसम में सड़कों के किनारे खड़े होकर कोल्डड्रिंक पीने वाले बहुत लोग होते थे। शादी-विवाह में भी कोल्डड्रिंक की बहुत खपत होती थी लेकिन, अप्रैल से ही कोरोना की दूसरी लहर के भयावह रूप ले लेने से ज्यादातर लोगों ने कोल्डड्रिंक पीने से तौबा कर ली। आम धारणा है कि ठंड के कारण यह संक्रमण लोगों को अपनी चपेट में लेता है। शुरुआती संक्रमण भी गले में होता है, इसलिए गला पकड़ लेने के डर से लोगों ने शीतलपेयों को दरकिनार कर दिया। जो शादी-विवाह हो रहे हैं, उसमें भी कोल्डड्रिंक की मांग नहीं है। इसकी वजह से कोल्डड्रिंक का कारोबार लगभग 90 फीसदी तक सिमट गया है।
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आइसक्रीम और फ्रूट जूस
विभिन्न प्रकार के आइसक्रीम की बिक्री बहुत कम हो गई है। इसी प्रकार विभिन्न प्रकार के फ्रूट जूूस भी बाजार से इस बार गायब हैं। फ्रीज में रखकर बेचे जाने वाली लस्सी और दूध जैसी पेय पदार्थ की न बिक्री हो रही है और न ही सप्लाई आ रही है।
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40 करोड़ के कारोबार के नुकसान का अनुमान
गर्मी के सीजन में शीतलपेयों का जिले में कारोबार लगभग 40 से 50 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है। जिला मुख्यालय के थोक कारोबारी हरिद्वार प्रसाद ने बताया कि जिले में कुल आठ एजेंसी हैं। सभी पर कोल्डड्रिंक की बिक्री बिल्कुल नहीं है। इस बार शादी-विवाह में भी कोल्डड्रिंक की मांग एकदम नहीं है। कोल्डड्रिंक पीने से गला न पकड़ ले और उन्हें अस्पताल न जाना पड़े, इस डर से कोल्डड्रिंक पीकर कोई गलती नहीं करना चाहता है। पिछले साल के कोरोना में व्यापार की स्थिति इतनी खराब नहीं थी।
सर्दी होने का भय
कोरोना संक्रमण के दौर में सर्दी, जुकाम से बचने के लिए लोग कोल्डड्रिंक पीने से परहेज कर रहे हैं। मेडिकल अफसर डॉ. आशीष कुमार सत्यार्थी के अनुसार बदलते मौसम में शीतल पेय पदार्थों से परहेज करना चाहिए, इसमें सर्दी होने का जोखिम ज्यादा है। इस दौर में सर्दी जुकाम से बचने की आवश्यकता है।