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रसोइया कर्मचारी यूनियन ने दिया धरना
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 08 Dec 2017 10:46 PM IST
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सहकारी कर्मचारियों ने मांगों को लेकर दिया धरना
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सिद्धार्थनगर। 11 माह से बकाया मानदेय भुगतान करने सहित अन्य मांगों को लेकर मिड-डे- मील रसोइया कर्मचारी यूनियन ने बीएसए कार्यालय पर धरना दिया। मांगों को लेकर बीएसए को ज्ञापन सौंपा और समस्याओं के जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
जिला संयोजक विजयनाथ तिवारी ने कहा कि रसोइया कर्मचारियों के साथ अन्याय किया जा रहा है। 11 माह हो गए, अभी तक मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। ऐसे में रसोइया कर्मचारियों के समक्ष खाने और बच्चों को पढ़ाने में भी संकट पैदा हो गया है। मगर मानदेय भुगतान के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। बकाया मानदेय का भुगतान जल्द से जल्द किया जाए। स्कूलों में रसोइया के अलावा जबरिया फील्ड साफ करवाया जाता है जो निंदनीय है, जिसे संगठन किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगा।
सुबह 10 से तीन बजे से रसोइयों को बिना किसी वजह के विद्यालय पर रोका जाता है, जबकि तीन बजे तक विद्यालय पर कोई काम नहीं रहता है। इस प्रक्रिया को हर हाल में बंद करवाया जाए। महंगाई को देखते हुए कर्मचारियों का 18 हजार रुपये मानदेय किया जाए, जिससे घर परिवार चल सके। इसके अलावा राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। कहा कि अगर मांगें पूरी नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान ध्रुवचंद, अर्जुन चौबे, कृपाशंकर, पंकज प्रसाद गौड़, प्रमिला, केशमती, सुमन, इंद्रावती, अंबिका, नीलम, गुजराती, राधिका, रामपियारे और कुसलावती आदि मौजूद थे।
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जिला संयोजक विजयनाथ तिवारी ने कहा कि रसोइया कर्मचारियों के साथ अन्याय किया जा रहा है। 11 माह हो गए, अभी तक मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। ऐसे में रसोइया कर्मचारियों के समक्ष खाने और बच्चों को पढ़ाने में भी संकट पैदा हो गया है। मगर मानदेय भुगतान के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। बकाया मानदेय का भुगतान जल्द से जल्द किया जाए। स्कूलों में रसोइया के अलावा जबरिया फील्ड साफ करवाया जाता है जो निंदनीय है, जिसे संगठन किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगा।
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सुबह 10 से तीन बजे से रसोइयों को बिना किसी वजह के विद्यालय पर रोका जाता है, जबकि तीन बजे तक विद्यालय पर कोई काम नहीं रहता है। इस प्रक्रिया को हर हाल में बंद करवाया जाए। महंगाई को देखते हुए कर्मचारियों का 18 हजार रुपये मानदेय किया जाए, जिससे घर परिवार चल सके। इसके अलावा राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। कहा कि अगर मांगें पूरी नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान ध्रुवचंद, अर्जुन चौबे, कृपाशंकर, पंकज प्रसाद गौड़, प्रमिला, केशमती, सुमन, इंद्रावती, अंबिका, नीलम, गुजराती, राधिका, रामपियारे और कुसलावती आदि मौजूद थे।
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