फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   combine cunducted without reaper

Siddharthnagar News: बिना रिपर के चली कंबाइन, पराली जलाते रहे किसान

Mon, 20 Nov 2023 12:40 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Mon, 20 Nov 2023 12:40 AM IST
विज्ञापन
combine cunducted without reaper
नगर पंचायत बिस्कोहर के विश्वनाथ नगर डेगहर के आसपास सिवान में जल रही पराली से उठता धुंआ। संवाद
फोटो-
विज्ञापन

-अधिकारियों ने कंबाइन मालिकों के खिलाफ नहीं की कार्रवाई
किसानों के पराली जलाने से शहर से गांव तक बिगड़ा पर्यावरण
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। किसानों की लापरवाही से शहर से गांव तक हवा में प्रदूषण की मात्रा बढ़ गई है। लोगों की सेहत पर इसका खराब असर पड़ रहा है। इसमें अधिकारियों की लापरवाही भी सामने आ रही है। जिलाधिकारी के निर्देश के बावजूद कंबाइन मशीनों के साथ रिपर नहीं चलाए गए। जागरूक किसानों का कहना है कि यदि सख्तीपूर्वक कंबाइन के साथ रिपर चलाए गए होते तो आधे डंठल खेत में खड़े नहीं होते और जलाने की तस्वीर भी सामने नहीं आती।
जिले में पराली जलाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। दीपावली के बाद शहर में पीएम-10 का स्तर 173 पहुंच गया था। कई दिन बीतने के बावजूद भी हवा में प्रदूषण का स्तर 154 बना हुआ है। रसायन विज्ञान के शिक्षक सुरेश राव ने बताया कि हवा में धुआं का स्तर बढ़ने के कारण पीएम-10 बढ़ जाता है। सर्द मौसम में धुआं ऊपर नहीं जाता है और वातावरण में धुंध बनकर रह जाता है। पराली जलाने के कारण ही हवा की गुणवत्ता सुधर नहीं रही है। संयुक्त निदेशक कृषि आरके विश्वकर्मा ने बताया कि जिले में बिना रिपर के साथ कटाई करने के मामले में कंबाइन मालिकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है।
विज्ञापन


अधिकारियों ने बरती लापरवाही
कटाई के पहले ही प्रशासन ने चेतावनी दी थी कि बिना रिपर के कंबाइन मशीन से कटाई न हो, लेकिन खेतों में खड़े आधे डंठल गवाही दे रही हैं कि बिना रिपर के कंबाइन चलाई गई है। किसानों के अनुसार, कंबाइन वालों ने रिपर के साथ कटाई का रेट डेढ़ गुना कर दिया था, जबकि सभी कंबाइन के साथ रिपर की सुविधा भी नहीं थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

खरिकौरा के गोपाल तिवारी ने कहा कि एक बीघा फसल कंबाइन से कटवाने में 600 रुपये, मजदूरों से कटवाने में 1000 रुपये और रिपर के साथ कंबाइन मशीन से कटाई कराने में 900 रुपये खर्च हो रहे हैं। औदही कलां के राम औतार ने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि सख्तीपूर्वक कंबाइन के साथ रिपर चलवाए जाएं और कटाई की उचित दर भी तय करें।


किसानों की नैतिक जिम्मेदारी है कि पराली न जलाएं। पराली जलाने के थोड़े से फायदे में हमें पर्यावरण खराब नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे बीमारी फैल सकती है।

-रामचंद्र, धौरी कुइंया
पराली जलने से धरती जलती है तो उर्वरा शक्ति नष्ट हो जाती है। इसमें हमारा नुकसान है। किसान को चाहिए कि खेत को बंजर बनाने की गलती न करें।
-बुद्धू, कबुलिहा
पराली जलाने से किसानों को लगता है कि उनकी कुछ बचत हो गई, लेकिन सोच ही गलत है। पराली जलाने से यदि किसान के घर कोई बीमार हुआ तो बचत से अधिक नुकसान हो जाएगा।
-सिद्धू , बनकसिया
जागरूकता के बावजूद भी किसान पराली जला रहे हैं। यह गलत तरीका है। सर्द मौसम में धुएं से लोग बीमार हो रहे हैं। किसानों को जिम्मेदार होना चाहिए।
-रामवृक्ष यादव, अजगरा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed