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Siddharthnagar News: नहाने से पहले खुले बदन रहने से बच्चों को हो रहा निमोनिया
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सिद्धार्थनगर। सर्द मौसम में बच्चों को नहलाने के दौरान भी सावधानी बरतने की जरूरत है। चाहे उन्हें ताजे पानी से नहलाएं या गर्म किए पानी से, कपड़े उतारने और नहलाने के बीच ज्यादा अंतराल होने से बच्चों के सर्दी का शिकार होने की आशंका है। ऐसी स्थिति में उनकी पसलियां तेज चलने लगती हैं और निमोनिया होने का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टरों के पास आने वालों में 40 फीसदी निमोनिया के मरीज हैं। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल काॅलेज में वर्तमान समय में ओपीडी में बच्चों की संख्या बढ़ गई है। ओपीडी में प्रतिदिन 100 से 150 बच्चे आ रहे है। इसमें 30 से 40 बच्चों में निमोनिया का लक्षण मिल रहा है। बच्चे ठंड से और भी अधिक बीमार पड़ जा रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. नम्रता चौधरी ने बताया कि बीते 15 दिनों में तापमान गिरा है। इस मौसम में खुले पैर, सिर-कान की वजह से बच्चों को ठंड लग जा रही है। नहाने से पहले 5-10 मिनट खुले बदन रहना भी बच्चों के लिए घातक है।
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छोटे बच्चे रात में रजाई से बाहर निकल जाने पर भी बीमार पड़ रहे हैं। जुकाम-खांसी, सीने में जकड़न, बुखार की दिक्कत हो रही है। लापरवाही से बच्चे निमोनिया के शिकार बन जा रहे हैं। गलसुआ, टॉन्सिल, गले में सूजन-दर्द की परेशानी भी मिल रही है।
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डॉक्टरों के पास आने वालों में 40 फीसदी निमोनिया के मरीज हैं। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल काॅलेज में वर्तमान समय में ओपीडी में बच्चों की संख्या बढ़ गई है। ओपीडी में प्रतिदिन 100 से 150 बच्चे आ रहे है। इसमें 30 से 40 बच्चों में निमोनिया का लक्षण मिल रहा है। बच्चे ठंड से और भी अधिक बीमार पड़ जा रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. नम्रता चौधरी ने बताया कि बीते 15 दिनों में तापमान गिरा है। इस मौसम में खुले पैर, सिर-कान की वजह से बच्चों को ठंड लग जा रही है। नहाने से पहले 5-10 मिनट खुले बदन रहना भी बच्चों के लिए घातक है।
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छोटे बच्चे रात में रजाई से बाहर निकल जाने पर भी बीमार पड़ रहे हैं। जुकाम-खांसी, सीने में जकड़न, बुखार की दिक्कत हो रही है। लापरवाही से बच्चे निमोनिया के शिकार बन जा रहे हैं। गलसुआ, टॉन्सिल, गले में सूजन-दर्द की परेशानी भी मिल रही है।