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Siddharthnagar News: कॅरियर का ताना-बाना जोड़ने में टूट रहे बच्चे, सावधानी जरूरी
Thu, 13 Jul 2023 12:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 13 Jul 2023 12:28 AM IST
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सिद्धार्थनगर। बेहतर कॅरियर बनाने की जिद में टूट रहे किशोर, किशोरियाें के आत्महत्या करने के मामलों से परिजन सहमे हुए हैं। मनोरोग विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर आपका बच्चा 13 से 17 साल की उम्र का है। स्कूल से आने के बाद अकेला रहना पसंद करता है। भीषण गर्मी में पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने की जिद करता है। उसकी पसंद बदलने लगी है। या फिर खाना खाने में रुचि नहीं लेता है। छोटी-छोटी बातों को लेकर जिद करता है। तो सावधान हो जाइए।
जिले में बोर्ड परीक्षा के दौरान पेपर अच्छा नहीं होने के कारण एक इंटर की छात्रा ने कमरे की कुंडी से फंदे से लटक आत्महत्या कर ली। वहीं आईटीआई की एक छात्रा के भी आत्महत्या करने का मामला सामने आया। जिसके बाद लोगों में किशोरों के बदलती प्रवृति पर बहस शुरू हो गई है। मनोरोग विशेषज्ञ के अनुसार जब बच्चे युवावस्था के पहले व किशोरावस्था के बीच में होते हैं, तो वह अपने अंदर बदलाव पाते हैं, जिससे वह अलग रहना पसंद करते हैं, माता-पिता के बजाय वह अपने मित्रों पर विश्वास करते हैं। यदि आप का बच्चा ऐसा कर रहा है तो सावधान हो जाइए, क्योंकि बच्चा यदि ऐसा कर रहा है तो खुद का नुकसान कर सकता है।
बच्चों को अकेला छोड़ने से बचें
सहायक आचार्य समाजशास्त्र डॉ. मयंक कुशवाहा बताते हैं कि 13 से 17 साल के बच्चों के माता-पिता को इस उम्र में बच्चों को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए, जब बच्चे अकेले रहते हैं तो उनके अंदर बहुत बदलाव आ जाता है। जिससे वह माता-पिता के बजाय अपने मित्रों पर भरोसा करना शुरु कर देते हैं और दूसरों को देखकर उन्हीं की तरह बनने का प्रयास करते हैं। जब वह पूरा नहीं होता है तो उनके अंदर बदलाव आने लगता है और वह अपने लक्ष्य में कामयाब न होने पर गलत कदम उठा लेते हैं।
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केस एक- पेपर ठीक नहीं हुआ तो कर ली आत्महत्या
उसका थाना क्षेत्र के एक गांव की लड़की ने अपने इंटर परीक्षा के दौरान पेपर ठीक नहीं होने से कम नंबर आने की आशंका में कमरे में कुंडी के सहारे फंदे से लटक जान दे दी थी। जानकार कहते हैं कि यदि माता-पिता उसके मनोदशा को समझ पाए होते और उस पर अधिक नंबर लाने का दबाव नहीं होता तो शायद वह आज जिंदा होती।
केस दो- बेहतर कॅरियर के दबाव में दे दी जान
शहर के एक आईटीआई कॉलेज की छात्रा ने बेहतर कॅरियर की जद्दोजहद में फंदे से लटक कर जान दे दी थी। पड़ोसी बताते हैं कि वह खुद का कॅरियर संवार परिजनों को भी संभालने की जिम्मेदारी से टूट गई थी। जिससे यह आत्मघाती कदम उठा लिया। अब माता-पिता खुद को कोसते हैं कि काश बेटी से बात कर उसके मन की बात समझ उसे समझा पाते तो वह उनके बीच होती।
केस तीन- बहन से बात करने पर कर दी हत्या
इटवा क्षेत्र में एक युवक ने अपनी बहन से बात करने वाले दूसरे युवक को बस्ती जिले में ले जाकर हत्या कर दी थी। पुलिस जांच में पकड़े जाने के बाद उसने कहा कि मेरी बहन से कोई बात करें यह पसंद नहीं था, इसीलिए हत्या कर दी। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि अगर परिजन उसके व्यवहार पर नजर रखते तो वह इस तरह आपराधिक कृत्य नहीं करता।
किशोरों में बढ़ रही घातक प्रवृति
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहम्मद अफजल खान ने बताया कि 13 से 17 साल की उम्र के छात्र-छात्राओं में पैरासुसाइड बिहैवियर बढ़ता है। इनके व्यवहार एवं प्रवृति पर परिजनों को नजर रखने की जरूरत है। इस उम्र में बच्चे जिद पूरी न होने पर खुद का नुकसान करने लगते हैं इसलिए इनसे हर समय बात कर उनकी समस्याएं सुनने और उसके निदान पर चर्चा करने की जरूरत है। जिससे उन्हें घातक मनोदशा से उबारा जा सके।
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जिले में बोर्ड परीक्षा के दौरान पेपर अच्छा नहीं होने के कारण एक इंटर की छात्रा ने कमरे की कुंडी से फंदे से लटक आत्महत्या कर ली। वहीं आईटीआई की एक छात्रा के भी आत्महत्या करने का मामला सामने आया। जिसके बाद लोगों में किशोरों के बदलती प्रवृति पर बहस शुरू हो गई है। मनोरोग विशेषज्ञ के अनुसार जब बच्चे युवावस्था के पहले व किशोरावस्था के बीच में होते हैं, तो वह अपने अंदर बदलाव पाते हैं, जिससे वह अलग रहना पसंद करते हैं, माता-पिता के बजाय वह अपने मित्रों पर विश्वास करते हैं। यदि आप का बच्चा ऐसा कर रहा है तो सावधान हो जाइए, क्योंकि बच्चा यदि ऐसा कर रहा है तो खुद का नुकसान कर सकता है।
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बच्चों को अकेला छोड़ने से बचें
सहायक आचार्य समाजशास्त्र डॉ. मयंक कुशवाहा बताते हैं कि 13 से 17 साल के बच्चों के माता-पिता को इस उम्र में बच्चों को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए, जब बच्चे अकेले रहते हैं तो उनके अंदर बहुत बदलाव आ जाता है। जिससे वह माता-पिता के बजाय अपने मित्रों पर भरोसा करना शुरु कर देते हैं और दूसरों को देखकर उन्हीं की तरह बनने का प्रयास करते हैं। जब वह पूरा नहीं होता है तो उनके अंदर बदलाव आने लगता है और वह अपने लक्ष्य में कामयाब न होने पर गलत कदम उठा लेते हैं।
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केस एक- पेपर ठीक नहीं हुआ तो कर ली आत्महत्या
उसका थाना क्षेत्र के एक गांव की लड़की ने अपने इंटर परीक्षा के दौरान पेपर ठीक नहीं होने से कम नंबर आने की आशंका में कमरे में कुंडी के सहारे फंदे से लटक जान दे दी थी। जानकार कहते हैं कि यदि माता-पिता उसके मनोदशा को समझ पाए होते और उस पर अधिक नंबर लाने का दबाव नहीं होता तो शायद वह आज जिंदा होती।
केस दो- बेहतर कॅरियर के दबाव में दे दी जान
शहर के एक आईटीआई कॉलेज की छात्रा ने बेहतर कॅरियर की जद्दोजहद में फंदे से लटक कर जान दे दी थी। पड़ोसी बताते हैं कि वह खुद का कॅरियर संवार परिजनों को भी संभालने की जिम्मेदारी से टूट गई थी। जिससे यह आत्मघाती कदम उठा लिया। अब माता-पिता खुद को कोसते हैं कि काश बेटी से बात कर उसके मन की बात समझ उसे समझा पाते तो वह उनके बीच होती।
केस तीन- बहन से बात करने पर कर दी हत्या
इटवा क्षेत्र में एक युवक ने अपनी बहन से बात करने वाले दूसरे युवक को बस्ती जिले में ले जाकर हत्या कर दी थी। पुलिस जांच में पकड़े जाने के बाद उसने कहा कि मेरी बहन से कोई बात करें यह पसंद नहीं था, इसीलिए हत्या कर दी। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि अगर परिजन उसके व्यवहार पर नजर रखते तो वह इस तरह आपराधिक कृत्य नहीं करता।
किशोरों में बढ़ रही घातक प्रवृति
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहम्मद अफजल खान ने बताया कि 13 से 17 साल की उम्र के छात्र-छात्राओं में पैरासुसाइड बिहैवियर बढ़ता है। इनके व्यवहार एवं प्रवृति पर परिजनों को नजर रखने की जरूरत है। इस उम्र में बच्चे जिद पूरी न होने पर खुद का नुकसान करने लगते हैं इसलिए इनसे हर समय बात कर उनकी समस्याएं सुनने और उसके निदान पर चर्चा करने की जरूरत है। जिससे उन्हें घातक मनोदशा से उबारा जा सके।