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बुद्ध पार्क में शांति है न सुकून, हरियाली गायब
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 12 Dec 2015 11:53 PM IST
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रोजमर्रा की भागदौड़ के बाद सुकून के चंद पलों की तलाश में लोग पार्कों में भागते हैं। हरी मखमली खास में फुर्सत के क्षण बिताकर मन-मस्तिष्क को तरोताजा बनाते हैं, मगर जिला मुख्यालय के लोगों को यह ताजगी भी नसीब नहीं है। यहां का बुद्ध विहार पार्क विरान और उजाड़ पड़ा हुआ है।
हरियाली के नाम पर पार्क में घासफूस और झाड़ियां हैं। मनोरंजन के लिए बने झूले, बेंच, तालाब सब उपेक्षित पड़े हैं। गंदगी के ढेर में पड़ा पार्क लोगों को आकर्षित नहीं कर पा रहा। नतीजा लोगों को घरों में ही दुबके रहना पड़ रहा है अशोक चौराहा से साड़ी तिराहा मार्ग पर जिलाधिकारी आवास के सामने बना बुद्ध विहार पार्क लोगों के लिए मनोरंजन का प्रमुख केंद्र है।
दिनभर की थकान के बाद लोग फुर्सत के क्षण बिताने के लिए यहां आते हैं। मगर लंबे समय से देख-भाल न होने से पार्क उपेक्षित हो गया है। यहां उपलब्ध संसाधन भी बेकार पड़े हैं। बच्चों के मनोरंजन के लिए लगे झूले टूट चुके हैं। लोगों के बैठने के लिए बने बेंच क्षतिग्रस्त हैं। पार्क में बना तालाब गंदगी से भरा है।
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खेलकूद के अन्य साधनों का भी कोई पुरसाहाल नहीं है। फूलों की क्यारियां मुरझा रही हैं। उपेक्षा का आलम यह है कि हरी मखमली घास की जगह झाड़-झंखाड़ उगी हुई है। भगवान बुद्ध के नाम पर स्थापित पार्क में सुकून के पल बिताना लोगों के लिए मुमकिन नहीं रहा। नतीजा यहां लगातार संख्या घटती जा रही है।
लोग बच्चों को घरों में रखना ही मुनासिब समझते हैं। पार्क की दुर्दशा दूर कराने के लिए कई बार वन विभाग के अधिकारियों से लोगों ने दरखास्त भी की, मगर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही। नौगढ़ वन विभाग के रेंजर हरिशंकर शुक्ल ने बताया कि बजट के अभाव में पार्क की दुर्दशा बनी हुई है। बजट मांगा जाता है, लेकिन बजट मिलता ही नहीं है। एक ही चौकीदार के सहारे पूरा पार्क की व्यवस्था चल रहा है।
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हरियाली के नाम पर पार्क में घासफूस और झाड़ियां हैं। मनोरंजन के लिए बने झूले, बेंच, तालाब सब उपेक्षित पड़े हैं। गंदगी के ढेर में पड़ा पार्क लोगों को आकर्षित नहीं कर पा रहा। नतीजा लोगों को घरों में ही दुबके रहना पड़ रहा है अशोक चौराहा से साड़ी तिराहा मार्ग पर जिलाधिकारी आवास के सामने बना बुद्ध विहार पार्क लोगों के लिए मनोरंजन का प्रमुख केंद्र है।
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दिनभर की थकान के बाद लोग फुर्सत के क्षण बिताने के लिए यहां आते हैं। मगर लंबे समय से देख-भाल न होने से पार्क उपेक्षित हो गया है। यहां उपलब्ध संसाधन भी बेकार पड़े हैं। बच्चों के मनोरंजन के लिए लगे झूले टूट चुके हैं। लोगों के बैठने के लिए बने बेंच क्षतिग्रस्त हैं। पार्क में बना तालाब गंदगी से भरा है।
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खेलकूद के अन्य साधनों का भी कोई पुरसाहाल नहीं है। फूलों की क्यारियां मुरझा रही हैं। उपेक्षा का आलम यह है कि हरी मखमली घास की जगह झाड़-झंखाड़ उगी हुई है। भगवान बुद्ध के नाम पर स्थापित पार्क में सुकून के पल बिताना लोगों के लिए मुमकिन नहीं रहा। नतीजा यहां लगातार संख्या घटती जा रही है।
लोग बच्चों को घरों में रखना ही मुनासिब समझते हैं। पार्क की दुर्दशा दूर कराने के लिए कई बार वन विभाग के अधिकारियों से लोगों ने दरखास्त भी की, मगर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही। नौगढ़ वन विभाग के रेंजर हरिशंकर शुक्ल ने बताया कि बजट के अभाव में पार्क की दुर्दशा बनी हुई है। बजट मांगा जाता है, लेकिन बजट मिलता ही नहीं है। एक ही चौकीदार के सहारे पूरा पार्क की व्यवस्था चल रहा है।