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Siddharthnagar News: कांशीराम आवास रहने योग्य हैं या नहीं, होगी जांच
Tue, 21 Jul 2026 11:41 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 21 Jul 2026 11:41 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शहर के कांशीराम आवास के जर्जर हो चुके भवन के दो फ्लैट की छत ढहने के बाद जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने आवास में रहने वालों की सुरक्षा को देखते हुए भवन की गुणवत्ता और ये रहने योग्य हैं या नहीं, इसकी जांच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित की है।
उन्होंने जांच कमेटी को एक सप्ताह के अंदर जांचकर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। कांशीराम आवास भवन के जर्जर होने के संबंध में अमर उजाला ने 21 जुलाई के अंक में खबर प्रकाशित की है।
18 जुलाई को बारिश के दौरान कांशीराम आवास के ब्लॉक संख्या 40 और 41 के दो फ्लैट की छत ढह गई थी। हालांकि हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ लेकिन इस घटना से कांशीराम आवास के अन्य निवासी सहम गए। इसके बाद नगर पालिका ईओ ने पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता को पत्र भेजकर कांशीराम आवास के भवन के सुरक्षित होने के संबंध में जांच करने को कहा। पीडब्ल्यूडी की दो सदस्यीय इंजीनियरों की टीम भवन की जांच कर रही थी।
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कांशीराम आवास के जर्जर भवन के संबंध में अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने जांच के लिए पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता की अध्यक्षता में टीम गठित की है। जांच टीम में परियोजना निदेशक डूडा, सहायक अभियंता उत्तर प्रदेश आवास और विकास परिषद बस्ती व अधिशासी अधिकारी नगर पालिका सिद्धार्थनगर सदस्य है। जिलाधिकारी ने इन्हें कांशीराम आवास में निर्मित आवासों की जांच कर उसकी गुणवत्ता, रहने योग्य है या नहीं, इस संबंध में एक सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है।
जर्जर हो चुके छत, उखड़ रहे दीवार के प्लास्टर : कांशीराम आवास के अधिकांश फ्लैट के दीवार व छत के प्लास्टर टूट कर गिर रहे हैं। इस भवन के कई आवासों जर्जर हो चुके छत से प्लास्टर गिरने के बाद उसमें डाला गया सरिया दिखने लगा है। वहीं, कई फ्लैट के प्लास्टर उखड़ने के साथ ही खिड़की और दरवाजे तक निकलकर गायब हो चुके है। यहां के विभिन्न फ्लैटों में रहने वाले मनीष, बजरंगी, संजय, रुस्तम, करीम व जाबिर का कहना है कि जर्जर हो चुके आवास में रहने के दौरान उन्हें हर समय हादसे का डर सताता है। परिवार को सुरक्षा की चिंता रहती है।
नाली चोक, जलभराव से जूझ रहे आवासी : कांशीराम आवास परिसर में बनी सड़कों के किनारे जलनिकासी के लिए नालियों का निर्माण हुआ था। वर्तमान में यह नालियां क्षतिग्रस्त या चोक हैं। कुछ को पाट दिया गया है, जिससे बारिश का पानी और कीचड़ सड़क पर पसरा रहता है। आवास के अधिकांश ब्लॉक के सामने पसरे पानी के बीच से ही यहां के लोगों और स्कूली बच्चों आना-जाना पड़ रहा है। वहीं, विशेषज्ञ के अनुसार, निचली भूमि पर बने कांशीराम आवासीय परिसर में जलभराव से ईंट से निर्मित भवन की नींव कमजोर हो गईं हैं। इससे हादसे का खतरा भी मंडरा रहा है।
शुद्ध पानी की किल्लत : कांशीराम आवास में बने वाॅटरहेड टैंक से दूसरे और तीसरे फ्लोर तक पानी की सप्लाई नहीं पहुंच पाती है। ग्राउंड फ्लोर पर लगी सार्वजनिक टोंटियों तक ही पानी पहुंचने से साफ पानी के लिए लोग परेशान रहते हैं। वहीं, परिसर में लगाए गए इंडिया मार्का हैंडपंप खराब और क्षतिग्रस्त होकर अनुपयोगी हो चुके हैं। यहां के निवासी लक्ष्मन, हजारी, अकरम, अजीम, मोहर्रम अली और चीनक का कहना है कि वह निजी नल के दूषित पानी का उपयोग कर रहे हैं।
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सिद्धार्थनगर। शहर के कांशीराम आवास के जर्जर हो चुके भवन के दो फ्लैट की छत ढहने के बाद जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने आवास में रहने वालों की सुरक्षा को देखते हुए भवन की गुणवत्ता और ये रहने योग्य हैं या नहीं, इसकी जांच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित की है।
उन्होंने जांच कमेटी को एक सप्ताह के अंदर जांचकर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। कांशीराम आवास भवन के जर्जर होने के संबंध में अमर उजाला ने 21 जुलाई के अंक में खबर प्रकाशित की है।
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18 जुलाई को बारिश के दौरान कांशीराम आवास के ब्लॉक संख्या 40 और 41 के दो फ्लैट की छत ढह गई थी। हालांकि हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ लेकिन इस घटना से कांशीराम आवास के अन्य निवासी सहम गए। इसके बाद नगर पालिका ईओ ने पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता को पत्र भेजकर कांशीराम आवास के भवन के सुरक्षित होने के संबंध में जांच करने को कहा। पीडब्ल्यूडी की दो सदस्यीय इंजीनियरों की टीम भवन की जांच कर रही थी।
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कांशीराम आवास के जर्जर भवन के संबंध में अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने जांच के लिए पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता की अध्यक्षता में टीम गठित की है। जांच टीम में परियोजना निदेशक डूडा, सहायक अभियंता उत्तर प्रदेश आवास और विकास परिषद बस्ती व अधिशासी अधिकारी नगर पालिका सिद्धार्थनगर सदस्य है। जिलाधिकारी ने इन्हें कांशीराम आवास में निर्मित आवासों की जांच कर उसकी गुणवत्ता, रहने योग्य है या नहीं, इस संबंध में एक सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है।
जर्जर हो चुके छत, उखड़ रहे दीवार के प्लास्टर : कांशीराम आवास के अधिकांश फ्लैट के दीवार व छत के प्लास्टर टूट कर गिर रहे हैं। इस भवन के कई आवासों जर्जर हो चुके छत से प्लास्टर गिरने के बाद उसमें डाला गया सरिया दिखने लगा है। वहीं, कई फ्लैट के प्लास्टर उखड़ने के साथ ही खिड़की और दरवाजे तक निकलकर गायब हो चुके है। यहां के विभिन्न फ्लैटों में रहने वाले मनीष, बजरंगी, संजय, रुस्तम, करीम व जाबिर का कहना है कि जर्जर हो चुके आवास में रहने के दौरान उन्हें हर समय हादसे का डर सताता है। परिवार को सुरक्षा की चिंता रहती है।
नाली चोक, जलभराव से जूझ रहे आवासी : कांशीराम आवास परिसर में बनी सड़कों के किनारे जलनिकासी के लिए नालियों का निर्माण हुआ था। वर्तमान में यह नालियां क्षतिग्रस्त या चोक हैं। कुछ को पाट दिया गया है, जिससे बारिश का पानी और कीचड़ सड़क पर पसरा रहता है। आवास के अधिकांश ब्लॉक के सामने पसरे पानी के बीच से ही यहां के लोगों और स्कूली बच्चों आना-जाना पड़ रहा है। वहीं, विशेषज्ञ के अनुसार, निचली भूमि पर बने कांशीराम आवासीय परिसर में जलभराव से ईंट से निर्मित भवन की नींव कमजोर हो गईं हैं। इससे हादसे का खतरा भी मंडरा रहा है।
शुद्ध पानी की किल्लत : कांशीराम आवास में बने वाॅटरहेड टैंक से दूसरे और तीसरे फ्लोर तक पानी की सप्लाई नहीं पहुंच पाती है। ग्राउंड फ्लोर पर लगी सार्वजनिक टोंटियों तक ही पानी पहुंचने से साफ पानी के लिए लोग परेशान रहते हैं। वहीं, परिसर में लगाए गए इंडिया मार्का हैंडपंप खराब और क्षतिग्रस्त होकर अनुपयोगी हो चुके हैं। यहां के निवासी लक्ष्मन, हजारी, अकरम, अजीम, मोहर्रम अली और चीनक का कहना है कि वह निजी नल के दूषित पानी का उपयोग कर रहे हैं।
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