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Siddharthnagar News: एआई बताएगा फेफड़ों का राज, स्कैन होते ही पकड़ में आएंगे टीबी के संदिग्ध मरीज

Tue, 09 Jun 2026 11:22 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Tue, 09 Jun 2026 11:22 PM IST
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AI will reveal the secrets of the lungs, and a scan will identify suspected TB patients.
डिजिटल एक्स-रे मशीन से जांच करते स्वास्थ्यकर्मी, एआई तकनीकी वाली मशीन
सिद्धार्थनगर। अब टीबी की जांच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) बड़ी भूमिका निभा रही है। जिले में बिना सैंपल लिए चेस्ट पर स्कैन करते ही टीबी है या नहीं, इसकी पुष्टि हो जाएगी। इसके बाद बलगम जांच और फिर दवा शुरू होगी। चंद सेकेंड में एआई आधारित एक्स-रे मशीन सटीक रिपोर्ट देगी। इससे गुणवत्तापूर्ण और कम समय में जांच हो सकेगी।
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जिले के 626 गांव टीबी के लिए हाई रिस्क की श्रेणी में शामिल किया गया। राज्य स्तर पर हुई माॅनिटरिंग के बाद इन गांवों को इस श्रेणी में लाते हुए पुराने मरीज और संभावित लक्षण वाले मरीजों की जांच करने और पुष्टि के बाद दवा देने का दिशा-निर्देश दिए थे। इस पर जांच का तरीका और स्मार्ट कर दिया गया है। इसमें एआई तकनीक से लैस डिजिटल एक्स-रे मशीन मरीज के जरिये छाती स्कैन करते ही कुछ सेकेंड में संभावित टीबी के लक्षणों का विश्लेषण कर रही है।
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पहले जहां संदिग्ध मरीजों की पहचान के लिए बलगम जांच पर निर्भर रहना पड़ता था। वहीं, अब एआई आधारित सॉफ्टवेयर एक्स-रे की तस्वीरों को पढ़कर यह संकेत दे रहा है कि व्यक्ति में टीबी होने की कितनी संभावना है। इससे बीमारी की खोज तेज, आसान और अधिक प्रभावी हो गई है।
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होगी सटीक जांच
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एआई तकनीक से लैस इस एक्स-रे मशीन की खासियत यह है कि यह एक्स-रे फिल्म में दिखाई देने वाले सूक्ष्म बदलावों का भी विश्लेषण कर लेती है, जिन्हें सामान्य तौर पर पहचानने में समय लग सकता है। मशीन एक्स-रे करते ही तत्काल रिपोर्ट तैयार कर देती है और टीबी की आशंका वाले मरीजों को चिह्नित कर देती है। इसके बाद केवल उन्हीं लोगों की बलगम जांच कराई जा रही है, जिनमें एआई संभावित संक्रमण का संकेत देता है। इससे जांच प्रक्रिया का समय घटा है और संदिग्ध मरीजों तक तेजी से पहुंच बन रही है।

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626 गांव में जांच शुरू
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 626 ऐसे गांवों को चिह्नित किया है, जहां टीबी संक्रमण का जोखिम अधिक माना गया है। इन गांवों में मोबाइल डिजिटल एक्स-रे यूनिट के साथ स्वास्थ्य कर्मियों की टीम घर-घर पहुंच रही है। मौके पर ही लोगों का एक्स-रे किया जा रहा है और एआई सॉफ्टवेयर तत्काल उसका विश्लेषण कर रहा है। कुछ ही मिनटों में यह स्पष्ट हो जाता है कि मरीज को आगे जांच की आवश्यकता है या नहीं।


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बोले जिम्मेदार
टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने में एआई तकनीकी से लैस एक्स- रे मशीन आधारित स्क्रीनिंग महत्वपूर्ण साबित हो रही। इस जांच में किसी प्रकार से दिक्कत भी नहीं है। लोगों को आगे आकर जांच करवाने की जरूरत है, जिससे बीमारी के बारे में पता चल सके।
- डॉ. एमएम त्रिपाठी, जिला क्षयरोग अधिकारी
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