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मिलावट : दो दुकानदार को एक-एक साल जेल
Wed, 23 Oct 2024 02:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 23 Oct 2024 02:17 AM IST
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सिद्धार्थनगर। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी श्रद्धा भारतीया ने मिलावटी लड्डू बेचने वाले दुकानदार हजारी को खाद्य अपमिश्रण अधिनियम के तहत एक साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर तीन हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वह थानाक्षेत्र सिद्धार्थनगर के गांधीनगर का रहने वाला है। अर्थदंड अदा न करने पर उसे अतिरिक्त तीन माह की सजा भुगतनी होगी।
खाद्य निरीक्षक रणजीत सिंह ने चार जुलाई 1992 को सुबह नौ बजे तेतरी बाजार में हजारी की दुकान पर पहुंचे। जहां खाद्य निरीक्षक ने दुकान की लड्डू जो बनस्पति से बना था, में मिलावट का संदेह होने पर अपना परिचय देकर नमूना 900 ग्राम कीमत 27 रुपये देकर खरीदा और रसीद मांगा जिसे देने से हजारी ने इन्कार किया।
मौके पर कार्यवाही करके उस पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया तो उससे भी इन्कार किया। लिए गए नमूने को तीन साफ शीशी में बराबर-बराबर भरकर प्रत्येक पर लेबल चिपकाया गया। जिसमें से एक शीशी को जांच के लिए जन विश्लेषक उप्र लखनऊ भेजा गया। जिसके जांच में खाद्य निरीक्षक दिनांकित 10 अगस्त 1992 के अनुसार मिलावटी घोषित किया गया। इसके बाद उसके खिलाफ खाद्य विभाग ने न्यायालय में खाद्य अपमिश्रण अधिनियम के अपराध का परिवाद दाखिल किया गया।
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न्यायालय ने संज्ञान लेकर विचारण शुरू किया और विचारण की समाप्ति के बाद उपलब्ध साक्ष्यों, गवाही, जिरह, जन विश्लेषक रिपोर्ट, मामले के तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर हजारी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाया।
इसके अलावा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दूध में मिलावट करने वाले सदर थाना क्षेत्र निवासी विशंभर को एक वर्ष के कारावास एवं तीन हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
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खाद्य निरीक्षक रणजीत सिंह ने चार जुलाई 1992 को सुबह नौ बजे तेतरी बाजार में हजारी की दुकान पर पहुंचे। जहां खाद्य निरीक्षक ने दुकान की लड्डू जो बनस्पति से बना था, में मिलावट का संदेह होने पर अपना परिचय देकर नमूना 900 ग्राम कीमत 27 रुपये देकर खरीदा और रसीद मांगा जिसे देने से हजारी ने इन्कार किया।
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मौके पर कार्यवाही करके उस पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया तो उससे भी इन्कार किया। लिए गए नमूने को तीन साफ शीशी में बराबर-बराबर भरकर प्रत्येक पर लेबल चिपकाया गया। जिसमें से एक शीशी को जांच के लिए जन विश्लेषक उप्र लखनऊ भेजा गया। जिसके जांच में खाद्य निरीक्षक दिनांकित 10 अगस्त 1992 के अनुसार मिलावटी घोषित किया गया। इसके बाद उसके खिलाफ खाद्य विभाग ने न्यायालय में खाद्य अपमिश्रण अधिनियम के अपराध का परिवाद दाखिल किया गया।
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न्यायालय ने संज्ञान लेकर विचारण शुरू किया और विचारण की समाप्ति के बाद उपलब्ध साक्ष्यों, गवाही, जिरह, जन विश्लेषक रिपोर्ट, मामले के तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर हजारी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाया।
इसके अलावा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दूध में मिलावट करने वाले सदर थाना क्षेत्र निवासी विशंभर को एक वर्ष के कारावास एवं तीन हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।