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Siddharthnagar News: रिपोर्ट पर तय होगी कार्रवाई, विवेचना लेगी अंतिम रूप
Sun, 17 Dec 2023 01:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 17 Dec 2023 01:14 AM IST
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सिद्धार्थनगर। नेपाल सीमा से सटे कपिलवस्तु कोतवाली क्षेत्र के अलीगढ़वा कस्बे में 31 अक्तूबर को हुए विस्फोट के मामले में विवेचना लटकी हुई है। कारण बारूद की जांच में गए आगरा गए सैंपल की रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। अगर रिपोर्ट आ जाए तो कार्रवाई का दायरा आगे बढ़े और किसकी कितनी लापरवाही थी, उसको तय करके कार्रवाई की जा सके। इस मामले में मकान मालिक जेल जा चुका है और उसकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है।
सीमा से सटे अलीगढ़वा कस्बे में 31 अक्तूबर एक गोदाम में बम जैसा विस्फोट हुआ था। धमाके मेंं चार लोगों की मौत हो गई थी। जबकि दो लोग जख्मी हो गए थे। इस मामले में एटीएस सहित कई सुरक्षा एजेंसियों ने जांच किया था। बारूद का नमूना लेकर जांच के लिए आगरा लैब में भेजा गया था। वहीं, मामले की जांच में गोदाम मालिक की भूमिका संदिग्ध मिली तो उसके खिलाफ सुसंगत धारा में केस दर्ज करके पुलिस ने जेल भेज दिया था। उसने जमानत के लिए याचिका दायर की जो खारिज हो चुकी है। वहीं, लापरवाही के मामले में तत्कालीन कोतवाल, एक दरोगा और सिपाही को निलंबित कर दिया गया था। डेढ़ माह बाद भी विस्फोट से जुड़ी चार एजेंसियों की रिपार्ट नहीं आई है। रिपोर्ट न आने के कारण विवेचना अंमित रूप नहीं ले पा रहा है और कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है। जबकि इतने बड़े मामले में जल्द से जल्द विवेचना पूरी करके न्यायालय में चार्जशीट प्रस्तुत हो जानी चाहिए मुकदमें की सुनवाई जल्द शुरू हो और फैसला आए। ऐसा विधि के जानकारों का मानना है।
सूत्रों की माने तो पुलिस खुद रिपोर्ट लेने में तत्परता नहीं दिखा रही है। क्योंकि इसमें पुलिस कर्मियों की भूमिका संदिग्ध है, जिससे पुलिस की छबि पर सवाल उठ जाएगा। इसलिए केस में रुचि लेन के बजाए लटकाया जा रहा है। इस संबंध में एसपी अभिषेक कुमार अग्रवाल ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। अभी रिपोर्ट भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट नहीं मिली है। आते ही कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी।
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ऐसी घटना है, जिसमें चार लोगों की जान चली गई। सीमा पर विस्फोट हुआ है। घटना को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। गंभीरता से लिया जाता तो अबतक विवेचना पूरी करके न्यायालय में चार्जशीट दाखिल हो गया होता। इतने बड़े मामले की विवेचना तेजी से होना जाना चाहिए था। आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत होता तो सुनवाई जल्द शुरू होती। आरोपी जेल में है और विवेचना पूरी नहीं हुई है। वह भी गंभीर मुकदमें। तीन माह के भीतर विवेचना पूरी करने का नियम है। लेकिन ऐसे गंभीर मामलों में एक सप्ताह का समय बहुत है। पुलिस केस को गंभीरता से नहीं ले रही है।
-संजय कुमार श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिवक्ता क्राइम जनपद न्यायालय सिद्धार्थनगर
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सीमा से सटे अलीगढ़वा कस्बे में 31 अक्तूबर एक गोदाम में बम जैसा विस्फोट हुआ था। धमाके मेंं चार लोगों की मौत हो गई थी। जबकि दो लोग जख्मी हो गए थे। इस मामले में एटीएस सहित कई सुरक्षा एजेंसियों ने जांच किया था। बारूद का नमूना लेकर जांच के लिए आगरा लैब में भेजा गया था। वहीं, मामले की जांच में गोदाम मालिक की भूमिका संदिग्ध मिली तो उसके खिलाफ सुसंगत धारा में केस दर्ज करके पुलिस ने जेल भेज दिया था। उसने जमानत के लिए याचिका दायर की जो खारिज हो चुकी है। वहीं, लापरवाही के मामले में तत्कालीन कोतवाल, एक दरोगा और सिपाही को निलंबित कर दिया गया था। डेढ़ माह बाद भी विस्फोट से जुड़ी चार एजेंसियों की रिपार्ट नहीं आई है। रिपोर्ट न आने के कारण विवेचना अंमित रूप नहीं ले पा रहा है और कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है। जबकि इतने बड़े मामले में जल्द से जल्द विवेचना पूरी करके न्यायालय में चार्जशीट प्रस्तुत हो जानी चाहिए मुकदमें की सुनवाई जल्द शुरू हो और फैसला आए। ऐसा विधि के जानकारों का मानना है।
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सूत्रों की माने तो पुलिस खुद रिपोर्ट लेने में तत्परता नहीं दिखा रही है। क्योंकि इसमें पुलिस कर्मियों की भूमिका संदिग्ध है, जिससे पुलिस की छबि पर सवाल उठ जाएगा। इसलिए केस में रुचि लेन के बजाए लटकाया जा रहा है। इस संबंध में एसपी अभिषेक कुमार अग्रवाल ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। अभी रिपोर्ट भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट नहीं मिली है। आते ही कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी।
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ऐसी घटना है, जिसमें चार लोगों की जान चली गई। सीमा पर विस्फोट हुआ है। घटना को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। गंभीरता से लिया जाता तो अबतक विवेचना पूरी करके न्यायालय में चार्जशीट दाखिल हो गया होता। इतने बड़े मामले की विवेचना तेजी से होना जाना चाहिए था। आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत होता तो सुनवाई जल्द शुरू होती। आरोपी जेल में है और विवेचना पूरी नहीं हुई है। वह भी गंभीर मुकदमें। तीन माह के भीतर विवेचना पूरी करने का नियम है। लेकिन ऐसे गंभीर मामलों में एक सप्ताह का समय बहुत है। पुलिस केस को गंभीरता से नहीं ले रही है।
-संजय कुमार श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिवक्ता क्राइम जनपद न्यायालय सिद्धार्थनगर