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बदल गए कानून पर बदले नहीं हालात
Siddhartha nagar
Updated Sun, 15 Dec 2013 05:42 AM IST
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सिद्धार्थनगर। दिल्ली में छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने सारे देश को हिलाया तो महिलाओं की हिफाजत के लिए सरकार और जिम्मेदार फिर से सोचने पर मजबूर हुए। ऐसे में कई बदलाव हुए कुछ नियम भी गढ़े गए और सख्ती की बात हुई। सख्ती और नियम कानून की बात जिले में बेमानी साबित हुई। यही वजह है कि कभी शक्ति स्वरूपा मानी जाने वाली नारी आज हवस का शिकार बनती दिख रही है तो कहीं दहलीज पर सिसक कर दम तोड़ती नजर आ रही है। जान के साथ इनकी अस्मत पर खतरा मंडरा रहा है। बीते दिनों आधी आबादी के साथ घटी घटनाएं चीख चीख कर इसकी गवाही दे रहे हैं।
पिछले एक साल के भीतर महिलाएं उत्पीड़न की घटनाओं में जबरदस्त इजाफा हुआ है। 2013 में दो दर्जन से अधिक अपहरण के मामले अभी तक पुलिस के लिए अबूझ पहेली बन हुए हैं। इनके परिजन रोज थानों से निराश होकर लौट रहे हैं, लेकिन न्याय के नाम पर केवल कोरा आश्वासन ही दिया जाता है। महिला उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न की कुल 75 घटनाएं इस साल अब तक दर्ज हो चुकी हैं। रेप की कुल 18 घटनाएं पुलिस की डायरी में दर्ज हो चुके है। इनमें आधे से ज्यादा नाबालिग बालिकाओं को शिकार बनाया गया। अस्मत के साथ साथ दरिंदों ने 13 महिलाओं को मौत के घाट उतार दिया गया। ये मामले महिलाओं के उत्पीड़न की गवाही देने के लिए काफी हैं। साथ ही 2012 में महिला उत्पीड़न की कुल 204 घटनाएं दर्ज की गई थी। इनमें दो दर्जन से अधिक मामले रेप के दर्ज हुए थे। साथ ही 14 शीलभंग और चार छेड़खानी के थे।
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2013 की कुछ घटनाआें का विवरण
13 फरवरी-इटवा में अधेड़ ने किया नाबालिग से रेप
14 फरवरी-गोल्हौरा में महिला के साथ दुष्कर्म
25 फरवरी- इटवा में किशोरी के साथ रेप
31 फरवरी-छात्रा का अपहरण
25 अप्रैल- खेसरहा में मासूम के साथ दुष्कर्म
30 अप्रैल-पथरा में किशोरी के साथ अलीगढ़ मं दुष्कर्म
25 मई- ढेबरुआ से नाबालिग से दुष्कर्म
01 जून-बांसी में नाबालिग का अपहरण कर रेप
15 जून-इटवा में नाबालिग से रेप
17 सितंबर- ढेबरुआ में नाबालिग से रेप
19 अक्टूबर- मुख्यालय में नाबालिग से दो लोगों ने किया रेप
10 दिसंबर- इटवा में नाबालिग से किया रेप
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महिला अपराध को लेकर पुलिस महकमा पूरी तरह से गंभीर है। यही वजह है कि ज्यादेतर मामलों में पुलिस ने मुकदमा पंजीकृत कर अभियुक्तों को जेल भेज चुकी है। साथ ही बताया कि घरेलु हिंसा को रोकने के लिए समाज के लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। बात रही नये कानूनों की तो उसका पालन पुलिस पूरी तरह से कर रही है। जल्द ही नियमत: सारी कार्रवाई की जाएगी।
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अनंत देव, एसपी सिद्धार्थनगर
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दामिनी कांड के बाद आए नए कानून-
10 जनवरी 2013- सभी थानों में छेड़छाड़ के आरोपी शोहदों की सूची बनाकर उन पर नजर रखने आदेश, महिला अत्याचार की घटनाओं में इनकी संलिप्तता और दोषी जाए जाने पर कड़ी कार्रवाई। स्थिति: जिले के किसी भी थानों में सूची नहीं आठ जुलाई को शासन ने फिर से आदेश भेजे।
14 फरवरी: रेप और एसिड अटैक की शिकार हुई युवती को मुआवजे के लिए विधिक सहायता अधिकरण की व्यवस्था। रेप की शिकार दो लाख रुपये और तेजाब से हमले की शिकार को 1.5 लाख रुपये दिए जाएंगे। स्थिति: पुलिस विभाग के पास बीते छह माह में बंटे मुआवटे का कोई ब्यौरा नहीं साथ ही जिले का विधिक सहायता का गठन ही नहीं हुआ है। अभी तक एक भी मामलों में नहीं मिला किसी को सहायता।
27 फरवरी रेप के मामलों का जल्द निपटाने और गलत मामलों को रोकने के लिए पीड़ित के साथ आरोपी का भी तुरंत मेडिकल टेस्ट कराया जाए। स्थिति: मेडिकल परीक्षण से जुड़े डॉक्टरों को जांच के नए तौर तरीकों की जानकारी तक नहीं।
27 अप्रैल: रेप का मुकदमा दर्ज करते समय उचित धराओं का प्रयोग किया जाए। आईपीसी की धारा 161 के तहत किसी भी हाल में पीड़िता का बयान केवल महिला अधिकारी ही ले। इस बयान की वीडियों रिकार्डिंग भी कराई जाए। स्थिति: ऐसे कई मामले आए। ग्रामीण इलाकाें में वीडियों रिकार्डिंग की व्यवस्था नहीं।
27 अप्रैल: थाना में 24 घंटे महिला पुलिस कर्मियों की ड्यूटी हो, ग्रामीण थानों में अगर महिला पुलिसकर्मियों को लगाना संभव न हो तो उसके लिए मुख्यालय में महिला कर्मचारियों की रिजर्व रखा जाए। ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें ड्यूटी पर लगाया जा सके। स्थिति: केवल दो प्रतिशत थानों में 24 घंटे महिला पुलिस की तैनाती।
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पिछले एक साल के भीतर महिलाएं उत्पीड़न की घटनाओं में जबरदस्त इजाफा हुआ है। 2013 में दो दर्जन से अधिक अपहरण के मामले अभी तक पुलिस के लिए अबूझ पहेली बन हुए हैं। इनके परिजन रोज थानों से निराश होकर लौट रहे हैं, लेकिन न्याय के नाम पर केवल कोरा आश्वासन ही दिया जाता है। महिला उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न की कुल 75 घटनाएं इस साल अब तक दर्ज हो चुकी हैं। रेप की कुल 18 घटनाएं पुलिस की डायरी में दर्ज हो चुके है। इनमें आधे से ज्यादा नाबालिग बालिकाओं को शिकार बनाया गया। अस्मत के साथ साथ दरिंदों ने 13 महिलाओं को मौत के घाट उतार दिया गया। ये मामले महिलाओं के उत्पीड़न की गवाही देने के लिए काफी हैं। साथ ही 2012 में महिला उत्पीड़न की कुल 204 घटनाएं दर्ज की गई थी। इनमें दो दर्जन से अधिक मामले रेप के दर्ज हुए थे। साथ ही 14 शीलभंग और चार छेड़खानी के थे।
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2013 की कुछ घटनाआें का विवरण
13 फरवरी-इटवा में अधेड़ ने किया नाबालिग से रेप
14 फरवरी-गोल्हौरा में महिला के साथ दुष्कर्म
25 फरवरी- इटवा में किशोरी के साथ रेप
31 फरवरी-छात्रा का अपहरण
25 अप्रैल- खेसरहा में मासूम के साथ दुष्कर्म
30 अप्रैल-पथरा में किशोरी के साथ अलीगढ़ मं दुष्कर्म
25 मई- ढेबरुआ से नाबालिग से दुष्कर्म
01 जून-बांसी में नाबालिग का अपहरण कर रेप
15 जून-इटवा में नाबालिग से रेप
17 सितंबर- ढेबरुआ में नाबालिग से रेप
19 अक्टूबर- मुख्यालय में नाबालिग से दो लोगों ने किया रेप
10 दिसंबर- इटवा में नाबालिग से किया रेप
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महिला अपराध को लेकर पुलिस महकमा पूरी तरह से गंभीर है। यही वजह है कि ज्यादेतर मामलों में पुलिस ने मुकदमा पंजीकृत कर अभियुक्तों को जेल भेज चुकी है। साथ ही बताया कि घरेलु हिंसा को रोकने के लिए समाज के लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। बात रही नये कानूनों की तो उसका पालन पुलिस पूरी तरह से कर रही है। जल्द ही नियमत: सारी कार्रवाई की जाएगी।
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अनंत देव, एसपी सिद्धार्थनगर
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दामिनी कांड के बाद आए नए कानून-
10 जनवरी 2013- सभी थानों में छेड़छाड़ के आरोपी शोहदों की सूची बनाकर उन पर नजर रखने आदेश, महिला अत्याचार की घटनाओं में इनकी संलिप्तता और दोषी जाए जाने पर कड़ी कार्रवाई। स्थिति: जिले के किसी भी थानों में सूची नहीं आठ जुलाई को शासन ने फिर से आदेश भेजे।
14 फरवरी: रेप और एसिड अटैक की शिकार हुई युवती को मुआवजे के लिए विधिक सहायता अधिकरण की व्यवस्था। रेप की शिकार दो लाख रुपये और तेजाब से हमले की शिकार को 1.5 लाख रुपये दिए जाएंगे। स्थिति: पुलिस विभाग के पास बीते छह माह में बंटे मुआवटे का कोई ब्यौरा नहीं साथ ही जिले का विधिक सहायता का गठन ही नहीं हुआ है। अभी तक एक भी मामलों में नहीं मिला किसी को सहायता।
27 फरवरी रेप के मामलों का जल्द निपटाने और गलत मामलों को रोकने के लिए पीड़ित के साथ आरोपी का भी तुरंत मेडिकल टेस्ट कराया जाए। स्थिति: मेडिकल परीक्षण से जुड़े डॉक्टरों को जांच के नए तौर तरीकों की जानकारी तक नहीं।
27 अप्रैल: रेप का मुकदमा दर्ज करते समय उचित धराओं का प्रयोग किया जाए। आईपीसी की धारा 161 के तहत किसी भी हाल में पीड़िता का बयान केवल महिला अधिकारी ही ले। इस बयान की वीडियों रिकार्डिंग भी कराई जाए। स्थिति: ऐसे कई मामले आए। ग्रामीण इलाकाें में वीडियों रिकार्डिंग की व्यवस्था नहीं।
27 अप्रैल: थाना में 24 घंटे महिला पुलिस कर्मियों की ड्यूटी हो, ग्रामीण थानों में अगर महिला पुलिसकर्मियों को लगाना संभव न हो तो उसके लिए मुख्यालय में महिला कर्मचारियों की रिजर्व रखा जाए। ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें ड्यूटी पर लगाया जा सके। स्थिति: केवल दो प्रतिशत थानों में 24 घंटे महिला पुलिस की तैनाती।