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पीसीएफ क्रय केंद्रों नेे बिगाड़ी गेहूं खरीद
Siddhartha nagar
Updated Sat, 27 Apr 2013 05:30 AM IST
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सिद्धार्थनगर। गेहूं खरीद के लिए जिले में पीसीएफ के सबसे ज्यादा केंद्र बनाए गए हैं। बावजूद इसके पीसीएफ की खरीद में भागीदारी अब तक बहुत ही खराब रही है। जिले में कुल 93 केंद्रों में से 59 पीसीएफ के हैं। अब तक इसने 2400 मीट्रिक टन ही खरीद की है। जबकि इसका लक्ष्य 43400 मीट्रिक टन का है। ऐसे में यह एजेंसी लक्ष्य का महज साढ़े पांच प्रतिशत ही अब तक खरीद कर पाई है। सूत्रों के मुताबिक इसके पीछे रिश्वत की मांग और सरकारी मूल्य के आसपास ही व्यापारियों की ओर से खरीदा जाना है
बता दें कि पीसीएफ के लगभग आधा दर्जन से अधिक केंद्र आज भी बंद हैं। परंतु इसकी वजह क्या है इसका जवाब नहीं मिल पा रहा है। जबकि केन्द्र निर्धारण हो चुका है तो फिर इनके बंद होने की कोई ठोस वजह होनी चाहिए। गेहूं का सरकारी खरीद मूल्य 1,350 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है तथा सभी केंद्रों पर बोरा व धन की उपलब्धता है तो फिर खरीद क्यों बाधित है। इसका सबसे बड़ा कारण सरकारी मूल्य के आसपास ही खुले बाजार में गल्ला व्यापारियाें की ओर से 1,250 रुपये प्रति क्विंटल के मूल्य से नकद खरीद बताई जा रही है।
ढूंढते रह जाओगे
कुछ ऐसा ही हाल है पीसीएफ क्रय केन्द्रों का। अधिकतर केंद्रों के बारे में किसानों को पता ही नहीं है कि यह कहां-कहां बनाए गए हैं। क्योंकि कई सक्रिय ही नहीं हैं या फिर बंद हैं। पिछले दिनों सचिवों की हड़ताल और फिर इनकी मनमानी पीसीएफ की खरीद को प्रभावित कर गई। सूत्र बताते हैं कि इनके अधिकांश केन्द्रों का हाल यह है कि वह किसानों से खरीद के पहले ही सौ रुपये प्रति क्विंटल रिश्वत की बात करते हैं। अन्यथा खाते में धन नहीं है कहकर पल्ला झाड़ ले रहे हैं। जब गल्ला व्यवसायी प्रतिदिन एक या दो ट्रक गेहूं बाहर भेज रहा है तो फिर सरकारी क्रय केन्द्रों के पास गेहूं क्यों नहीं आ रहा है। जबकि संसाधन और धन दोनों ही मौजूद है।
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बता दें कि पीसीएफ के लगभग आधा दर्जन से अधिक केंद्र आज भी बंद हैं। परंतु इसकी वजह क्या है इसका जवाब नहीं मिल पा रहा है। जबकि केन्द्र निर्धारण हो चुका है तो फिर इनके बंद होने की कोई ठोस वजह होनी चाहिए। गेहूं का सरकारी खरीद मूल्य 1,350 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है तथा सभी केंद्रों पर बोरा व धन की उपलब्धता है तो फिर खरीद क्यों बाधित है। इसका सबसे बड़ा कारण सरकारी मूल्य के आसपास ही खुले बाजार में गल्ला व्यापारियाें की ओर से 1,250 रुपये प्रति क्विंटल के मूल्य से नकद खरीद बताई जा रही है।
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कुछ ऐसा ही हाल है पीसीएफ क्रय केन्द्रों का। अधिकतर केंद्रों के बारे में किसानों को पता ही नहीं है कि यह कहां-कहां बनाए गए हैं। क्योंकि कई सक्रिय ही नहीं हैं या फिर बंद हैं। पिछले दिनों सचिवों की हड़ताल और फिर इनकी मनमानी पीसीएफ की खरीद को प्रभावित कर गई। सूत्र बताते हैं कि इनके अधिकांश केन्द्रों का हाल यह है कि वह किसानों से खरीद के पहले ही सौ रुपये प्रति क्विंटल रिश्वत की बात करते हैं। अन्यथा खाते में धन नहीं है कहकर पल्ला झाड़ ले रहे हैं। जब गल्ला व्यवसायी प्रतिदिन एक या दो ट्रक गेहूं बाहर भेज रहा है तो फिर सरकारी क्रय केन्द्रों के पास गेहूं क्यों नहीं आ रहा है। जबकि संसाधन और धन दोनों ही मौजूद है।
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