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Siddharthnagar News: तीन साल में 60% काम, छह माह में 100% का दावा
Fri, 05 Jun 2026 01:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 05 Jun 2026 01:44 AM IST
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सिद्धार्थनगर। शोहरतगढ़ से उसका बाजार तक राष्ट्रीय राजमार्ग-730 पर चल रहा चौड़ीकरण, बाईपास और ओवरब्रिज निर्माण एक बार फिर नए वादे के साथ सुर्खियों में है। विभाग का दावा है कि परियोजना का 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और अगले छह महीने में पूरा हाईवे तैयार हो जाएगा लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है।
तीन साल से चल रहे निर्माण कार्य के बीच लोग अब भी जाम, धूल और अधूरे ढांचों के बीच सफर करने को मजबूर हैं। परियोजना की सबसे बड़ी उम्मीद शोहरतगढ़ क्षेत्र में बन रहे तीन बाईपास और ओवरब्रिज हैं। इनके पूरा होने से बरगदवा, चिल्हिया, गौहनिया, मड़वा और परसा स्टेशन क्षेत्र में जाम की पुरानी समस्या खत्म होने की उम्मीद है लेकिन निर्माण की मौजूदा स्थिति बताती है कि मंजिल अभी काफी दूर है। बरगदवा चौराहे के पास सनई-चिल्हिया मार्ग पर बन रहे करीब तीन किलोमीटर लंबे बाईपास और ओवरब्रिज का काम अभी लगभग 60 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है।
पिलरों का निर्माण जारी है जबकि बाईपास मार्ग पर मिट्टी भराई और अन्य कई काम अधूरे पड़े हैं। दूसरी ओर गौहनिया चौराहे से मड़वा तक 6.27 किलोमीटर लंबे बाईपास पर रेलवे लाइन के ऊपर बनने वाले दो ओवरब्रिज अभी निर्माणाधीन हैं। यहां भी पिलरों का काम जारी है और मुख्य संरचना पूरी होने में अभी लंबा समय लगने की संभावना जताई जा रही है। परसा स्टेशन के पास बन रहा तीसरा ओवरब्रिज भी लगभग आधा ही तैयार हो पाया है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिन संरचनाओं का निर्माण तीन साल में आधा-अधूरा ही पूरा हो पाया, वे अगले छह महीनों में किस रफ्तार से पूरी होंगी।
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दिलचस्प यह भी है कि विभाग ने पहली बार परियोजना की प्रगति पर विस्तृत प्रेस नोट जारी किया है। इसमें रेलवे, वन और सिंचाई विभाग से मंजूरियों में हुई देरी को प्रमुख वजह बताया गया है लेकिन यह नहीं बताया गया कि परियोजना अपनी मूल समयसीमा से कितना पीछे चली गई और इसके लिए जवाबदेही किसकी तय हुई।
निर्माण एजेंसी ने अब तीन अतिरिक्त उप ठेकेदार लगाए हैं और दिन-रात दो शिफ्टों में काम कराने का दावा किया जा रहा है लेकिन स्थानीय स्तर पर निर्माण कार्य की गति को देखकर कई लोग विभाग की छह महीने वाली समयसीमा को लेकर संशय जता रहे हैं। कुछ तकनीकी जानकारों का मानना है कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए परियोजना के पूर्ण होने में एक वर्ष या उससे अधिक समय भी लग सकता है। नेपाल सीमा को जोड़ने वाला यह मार्ग जिले की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है।
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तीन साल से चल रहे निर्माण कार्य के बीच लोग अब भी जाम, धूल और अधूरे ढांचों के बीच सफर करने को मजबूर हैं। परियोजना की सबसे बड़ी उम्मीद शोहरतगढ़ क्षेत्र में बन रहे तीन बाईपास और ओवरब्रिज हैं। इनके पूरा होने से बरगदवा, चिल्हिया, गौहनिया, मड़वा और परसा स्टेशन क्षेत्र में जाम की पुरानी समस्या खत्म होने की उम्मीद है लेकिन निर्माण की मौजूदा स्थिति बताती है कि मंजिल अभी काफी दूर है। बरगदवा चौराहे के पास सनई-चिल्हिया मार्ग पर बन रहे करीब तीन किलोमीटर लंबे बाईपास और ओवरब्रिज का काम अभी लगभग 60 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है।
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पिलरों का निर्माण जारी है जबकि बाईपास मार्ग पर मिट्टी भराई और अन्य कई काम अधूरे पड़े हैं। दूसरी ओर गौहनिया चौराहे से मड़वा तक 6.27 किलोमीटर लंबे बाईपास पर रेलवे लाइन के ऊपर बनने वाले दो ओवरब्रिज अभी निर्माणाधीन हैं। यहां भी पिलरों का काम जारी है और मुख्य संरचना पूरी होने में अभी लंबा समय लगने की संभावना जताई जा रही है। परसा स्टेशन के पास बन रहा तीसरा ओवरब्रिज भी लगभग आधा ही तैयार हो पाया है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिन संरचनाओं का निर्माण तीन साल में आधा-अधूरा ही पूरा हो पाया, वे अगले छह महीनों में किस रफ्तार से पूरी होंगी।
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दिलचस्प यह भी है कि विभाग ने पहली बार परियोजना की प्रगति पर विस्तृत प्रेस नोट जारी किया है। इसमें रेलवे, वन और सिंचाई विभाग से मंजूरियों में हुई देरी को प्रमुख वजह बताया गया है लेकिन यह नहीं बताया गया कि परियोजना अपनी मूल समयसीमा से कितना पीछे चली गई और इसके लिए जवाबदेही किसकी तय हुई।
निर्माण एजेंसी ने अब तीन अतिरिक्त उप ठेकेदार लगाए हैं और दिन-रात दो शिफ्टों में काम कराने का दावा किया जा रहा है लेकिन स्थानीय स्तर पर निर्माण कार्य की गति को देखकर कई लोग विभाग की छह महीने वाली समयसीमा को लेकर संशय जता रहे हैं। कुछ तकनीकी जानकारों का मानना है कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए परियोजना के पूर्ण होने में एक वर्ष या उससे अधिक समय भी लग सकता है। नेपाल सीमा को जोड़ने वाला यह मार्ग जिले की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है।