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अपनों को खोने वाले 54 परिवारों को मदद का इंतजार

Thu, 26 Apr 2018 10:50 PM IST
siddharthnagar
siddharthnagar Updated Thu, 26 Apr 2018 10:50 PM IST
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54  families who lost their lives awating help
इंसेफेलाइटिस - फोटो : amar ujala
सिद्धार्थनगर। दिमागी बुखार से पीड़ित रोगियों की मौत के बाद उनके परिजनों को एक वर्ष से अहेतुक सहायता पाने के लिए सीएमओ दफ्तर का चक्कर लगाना पड़ रहा है। पीड़ितों के पहुंचने पर बजट का बात कहकर लौटा दिया जा रहा है। जिले में ऐसे परिवार वालों की संख्या 54 है, जिन्हें मुआवजा का इंतजार है।  
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जिले में भयावह रूप ले चुके जेई रोग का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। तमाम प्रयासों और कोशिशों के बाद भी दिमागी बुखार पर प्रभावी नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। वर्ष 2017 में संयुक्त जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों समेत मेडिकल कॉलेज गोरखपुर, कैली अस्पताल बस्ती में कुल 268 मरीज भर्ती हुए। इनमें से 54 मासूमों की मौत हो गई। जेई से मरने वाले रोगियों के परिजनों को 50 हजार और विकलांग होने की दिशा में एक लाख रुपये अहेतुक सहायता देय है। सिद्धार्थनगर में 54 परिवारों को एक वर्ष से अहेतुक सहायता नहीं मिल पा रही है। सहायता पाने के लिए आए दिन सीएमओ दफ्तर पर संक्रामक रोग कक्ष में भीड़ लगी रहती है। यहां पहुंचने पर बजट का न होना बताकर उन्हें लौटा दिया जाता है। जोगिया के जोगीबारी निवासी बच्चे लाल का 10 वर्षीय पुत्र अमृत, इटवा क्षेत्र के सोननगर निवासी इरफान की 2 वर्षीय पुत्री नूरजहां, नौगढ़ ब्लॉक के कोड़राग्रांट निवासी अयूब की 18 वर्षीय पुत्री शाहिन, मिठवल ब्लॉक के सेमरहना निवासी सुनील की 6 वर्षीय पुत्री मीनाक्षी, नौगढ़ क्षेत्र के ही पकड़ी खास निवासी रामदीन की एक वर्षीया पुत्री करीना, इटवा क्षेत्र के ग्राम पिपरी निवासी मो. असलम की 5 वर्षीय पुत्री तसलीम, उस्का बाजार क्षेत्र के गायघाट निवासी अजय कुमार की 5 वर्षीय पुत्री नेहा, खेसरहा ब्लाक के करही बगही निवासी छोटेलाल की 13 वर्षीया पुत्री साधना की मृत्यु बीते एक वर्ष के भीतर हो चुकी हैं। इन्हें आज भी राशि का इंतजार है। प्रभारी सीएमओ डॉ. विजय कुमार ने बताया कि जेई से मरने वाले मरीजों के परिजनों को श्रेणीवार अहेतुक सहायता देय है। मृत्यु के बाद ही बजट के लिए शासन को डिमांड भेज दिया जाता है। वर्ष 2017 में हुई मौतों के लिए अब तक धनराशि प्राप्त नहीं हुई है। बजट मिलते ही संबंधित के खाते में भेज दिया जाएगा। 
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