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राप्ती के कटान से सहमे लोग, कर रहे रतजगा

Wed, 12 Jul 2017 05:06 PM IST
Updated Wed, 12 Jul 2017 05:06 PM IST
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राप्ती के कटान से सहमे लोग, कर रहे रतजगा
डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर)। राप्ती के बढ़ते जलस्तर से शुरू हुई कटान ने तटवर्ती गांवों के लोगों की नींद उड़ा दी है। हर साल कटान से तबाही झेलने वाले वामदेई और रमवापुर उर्फ नेबुआ गांव के लोग सहमे हुए हैं। वामदेई में कटान जहां मात्र 100 मीटर तो वहीं रमवापुर उर्फ नेबुआ गांव के बंधे के चंद मीटर की ही दूरी पर नदी का पानी आ चुका है। कटान से अब तक दोनों गांव का करीब 50 बीघा खेत नदी में समा चुका है। तहसील प्रशासन की ओर से कटान रोकने का कोई ठोस उपाय नहीं किया जा सका है।
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तहसील क्षेत्र में राप्ती हर साल तबाही मचाती है। राप्ती का कहर सबसे ज्यादा भनवापुर ब्लॉक में रहता है। नेपाल की पहाड़ी नदियों का पानी आने से राप्ती अब कटान करने लगी है। मंगलवार सेे ही वामदेई और रमवापुर उर्फ नेबुआ गांव का सिवान राप्ती के आगोश में आने लगा है। अब तक वामदेई में 50 और नेबुआ गांव में 20 बीघा खेत जलमग्न हो गए हैं। ग्राम प्रधान वामदेई बृजेश उर्फ बबलू पांडेय, रामफेर पांडेय, परमेष्वर, बरसाती, रामतेज पांडेय, अंगद देव और नेबुआ गांव के ग्राम प्रधान जगदंबा श्रीवास्तव, रामबहादुर श्रीवास्तव, तज्जमुल, नसीबदार, राजेंद्र आदि ने बताया कि रात में नदी में खेत के कटान की आवाज सुनकर वे सहम जाते हैं। उन्हें रतजगा भी करना पड़ रहा है। तहसील प्रशासन ने अभी तक कटान की रोकथाम के लिए कोई इंतजाम नहीं किया है। जितेंद्र यादव, रामकुमार उर्फ ककनू यादव ने बताया कि अगर जल्द ही इंतजाम नहीं किया गया तो गांव का अधिकांश हिस्सा कटकर नदी में समा जाएगा। इस संबंध में एसडीएम राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि टीम के साथ वामदेई, बेतनार, असनहरा माफी, जूड़ीकुइयां, अमहवां आदि गांव में जाकर कटान का निरीक्षण किया गया है। यहां कटान तो है, मगर बाढ़ की स्थिति नहीं है। बाढ़ से निपटने की पूरी तैयारी है।
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7 बाढ़ राहत केंद्र और 11 नाव की व्यवस्था
डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र में राप्ती के कहर से लोगों को बचाने और सुरक्षित स्थान पर रखने को लेकर तहसील प्रशासन ने 7 बाढ़ राहत केंद्र बनाया है। तरहर स्थित साधन सहकारी समिति, विशुुनपुर हरि गांव में स्थित संत मौनीदास इंटर कॉलेज, शाहपुर, सिरसिया, जूड़ीकुइयां, बेतनार, रूद्रौलिया बुजुर्ग शामिल है। तहसीलदार संतोष कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ आने पर पीड़ितों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाने के लिए 11 नाव की भी व्यवस्था करवाई गई है। आवश्यकतानुसार नाव व स्टीमर की और व्यवस्था करवाई जाएगी।
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