{"_id":"59440e0d4f1c1b6b3e8b4579","slug":"41497632269-siddharthnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो किमी तटबंध में डेढ़ दर्जन रैट होल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो किमी तटबंध में डेढ़ दर्जन रैट होल
Updated Fri, 16 Jun 2017 10:27 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांसी (सिद्धार्थनगर)। बांधों की मरम्मत और रेन कट, रैट होल भरे जाने को लेकर अफसर सिर्फ कागजी खानापूर्ति में लगे हुए हैं। जिन बंधों की मरम्मत का दावा किया जा रहा है, वहीं बड़े-बड़े होल दावों की पोल खोल रहे हैं। बांधी के पनघटिया बांध में दो किमी के दायरे में डेढ़ दर्जन से अधिक होल हैं। यह वही बांध है, जहां मरम्मत कार्य की दलील दी जा रही है। कागजी दावों से इतर हकीकत से साफ जाहिर है कि तटवर्ती गांवों के लोग बाढ़ से कितने सुरक्षित हैं।
राप्ती नदी पर बने बांसी-पनघटिया बांध के किलोमीटर एक में कस्बा है। उसके बाद दूसरे किमी तक पिच रोड है। यह सड़क माड़हरवा गांव को जोड़ती है। इसकी पटरी पर कहीं-कहीं मामूली मिट्टी डालकर मामूली रेन कट की भराई किया गया है। तीसरे से पांचवें किमी गुलहरिया लाला से भगौतापुर गांव के बीच डेढ़ दर्जन से अधिक बड़े-बड़े होल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आगे बांध की स्थिति इससे भी बदतर है। गुलहरिया लाला गांव निवासी इंद्रजीत का कहना है कि पंद्रह दिन पूर्व बांध के जर्जर होने और बड़े-बड़े होल की शिकायत संबंधित अवर अभियंता से किया था, लेकिन अभी तक कोई काम नहीं किया गया। गांव निवासी रामदयाल का कहना है कि बांध को शाही जानवर ने बड़े-बड़े मांद बनाकर जर्जर कर दिया है। अब यह बांध पूरी तरह असुरक्षित है। इनका आरोप है कि सब जानकारी होने के बाद भी विभागीय अभियंता लापरवाही बरत रहे हैं। कोई अनहोनी हुई तो इसका खामियाजा गरीब किसानों को भुगतना पड़ेगा। गांव निवासी सुखराम का कहना है कि इन जर्जर बांध की मरम्मत ईमानदारी से नहीं किया गया तो यह पानी का दबाव नहीं झेल पाएंगे। इनका आरोप है कि विभाग सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है। भगौतापुर गांव निवासी ममता का कहना है कि गांव के दोनों तरफ बांध में जानवरों ने बड़े-बड़े होल बना दिया है। बांध की मरम्मत का कोई काम नहीं हो रहा। बांधों की इस हकीकत के बावजूद सिंचाई निर्माण खंड सिद्धार्थनगर के एक्सईएन आरके सिंह अपने दावों से पीछे नहीं हटे। बताया कि मरम्मत कार्य हो रहा है। यकीन नहीं तो खुद चलकर इसका अवलोकन कर सकते हैं।
कागजी दावों से ही गत वर्ष टूटे थे बांध
वर्ष 2016 में बाढ़ का भयावह मंजर लोग अब तक नहीं भूले हैं। अफसर कागजों में मरम्मत के दावे करते रहे, नतीजा पानी का दबाव बढ़ा तो बांध टूट गए। गौर फरमाने वाली बात है कि तत्कालीन डीएम नरेंद्र शंकर पांडेय ने जिन बांधों का निरीक्षण कर दुरुस्त बताया था, वही बांध सबसे पहले ध्वस्त हुए। इस बार भी अफसरों के कागजी दावों से लोग सहमे हुए हैं। उनका कहना है कि मरम्मत में पारदर्शिता नहीं बरती गई तो फिर वही पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन
राप्ती नदी पर बने बांसी-पनघटिया बांध के किलोमीटर एक में कस्बा है। उसके बाद दूसरे किमी तक पिच रोड है। यह सड़क माड़हरवा गांव को जोड़ती है। इसकी पटरी पर कहीं-कहीं मामूली मिट्टी डालकर मामूली रेन कट की भराई किया गया है। तीसरे से पांचवें किमी गुलहरिया लाला से भगौतापुर गांव के बीच डेढ़ दर्जन से अधिक बड़े-बड़े होल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आगे बांध की स्थिति इससे भी बदतर है। गुलहरिया लाला गांव निवासी इंद्रजीत का कहना है कि पंद्रह दिन पूर्व बांध के जर्जर होने और बड़े-बड़े होल की शिकायत संबंधित अवर अभियंता से किया था, लेकिन अभी तक कोई काम नहीं किया गया। गांव निवासी रामदयाल का कहना है कि बांध को शाही जानवर ने बड़े-बड़े मांद बनाकर जर्जर कर दिया है। अब यह बांध पूरी तरह असुरक्षित है। इनका आरोप है कि सब जानकारी होने के बाद भी विभागीय अभियंता लापरवाही बरत रहे हैं। कोई अनहोनी हुई तो इसका खामियाजा गरीब किसानों को भुगतना पड़ेगा। गांव निवासी सुखराम का कहना है कि इन जर्जर बांध की मरम्मत ईमानदारी से नहीं किया गया तो यह पानी का दबाव नहीं झेल पाएंगे। इनका आरोप है कि विभाग सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है। भगौतापुर गांव निवासी ममता का कहना है कि गांव के दोनों तरफ बांध में जानवरों ने बड़े-बड़े होल बना दिया है। बांध की मरम्मत का कोई काम नहीं हो रहा। बांधों की इस हकीकत के बावजूद सिंचाई निर्माण खंड सिद्धार्थनगर के एक्सईएन आरके सिंह अपने दावों से पीछे नहीं हटे। बताया कि मरम्मत कार्य हो रहा है। यकीन नहीं तो खुद चलकर इसका अवलोकन कर सकते हैं।
विज्ञापन
कागजी दावों से ही गत वर्ष टूटे थे बांध
वर्ष 2016 में बाढ़ का भयावह मंजर लोग अब तक नहीं भूले हैं। अफसर कागजों में मरम्मत के दावे करते रहे, नतीजा पानी का दबाव बढ़ा तो बांध टूट गए। गौर फरमाने वाली बात है कि तत्कालीन डीएम नरेंद्र शंकर पांडेय ने जिन बांधों का निरीक्षण कर दुरुस्त बताया था, वही बांध सबसे पहले ध्वस्त हुए। इस बार भी अफसरों के कागजी दावों से लोग सहमे हुए हैं। उनका कहना है कि मरम्मत में पारदर्शिता नहीं बरती गई तो फिर वही पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन