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दोगुनी फीस वसूल रहे स्कूल
Updated Mon, 10 Jul 2017 10:39 PM IST
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सिद्धार्थनगर। यूपी बोर्ड के अंतर्गत नौवीं से बारहवीं कक्षा में नामांकन के नाम पर शिक्षा विभाग ने स्कूलों को लूट की खुली छूट दे दी है। पंजीकरण के एवज में स्कूल संचालक खुलेआम दो से तीन गुना धनराशि वसूल रहे हैं। बच्चों को डरा-धमका कर यह पैसा वसूला जा रहा है, मगर विभाग बेखबर है। अफसरों को लिखित शिकायत का इंतजार है। डीआईओएस का साफ कहना है कि जब तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिलती, वह कुछ नहीं करेंगे।
यूपी बोर्ड के तहत कक्षा-9, 11 में पंजीकरण व 10 वीं-12वीं में बोर्ड परीक्षा के लिए नामांकन की प्रक्रिया जारी है। बोर्ड ने हर कक्षा के लिए श्रेणीवार शुल्क निर्धारित कर रखा है। जिसके अनुपालन की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की है। जिले में विभागीय अफसर इससे बेखबर हैं, नतीजा स्कूल संचालक खुलेआम दो-तीन गुना वसूली कर जेब भरते जा रहे हैं। कोई भविष्य बर्बाद करने की बात कह छात्रों से फीस वसूल रहा है तो कोई परीक्षा में पास कराने की गारंटी के नाम पर मनमानी फीस ले रहा है। छात्रों के शोषण में वित्तविहीन स्कूल सबसे आगे हैं तो वित्तपोषित स्कूल भी किसी से कम नहीं। भनवापुर के एक स्कूल में छात्र से शुल्क वापसी का मामला सामने आ चुका है। मुख्यालय समेत डुमरियागंज, इटवा, शोहरतगढ़, बांसी, लोटन और बर्डपुर आदि क्षेत्रों में स्थापित स्कूलों में वसूली चरम पर है। नाम उजागर होने के दुष्प्रभाव से सहमे बच्चे चुप्पी साधे हैं। प्रकरण हर बच्चे-अभिभावक की जुबां पर है, लेकिन माध्यमिक शिक्षा विभाग न जाने क्यों इससे बेखबर है। इस बाबत डीआईओएस राजबहादुर मौर्य का कहना है कि पहले कोई शिकायत करे, तभी वह कुछ कर सकते हैं। ऐसे उन्हें क्या पता कि कौन स्कूल कितना फीस ले रहा है। वह न तो स्वत: संज्ञान ले सकते हैं और न ही दफ्तर से निकलकर जांच की फजीहत उठा सकते हैं।
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यूपी बोर्ड के तहत कक्षा-9, 11 में पंजीकरण व 10 वीं-12वीं में बोर्ड परीक्षा के लिए नामांकन की प्रक्रिया जारी है। बोर्ड ने हर कक्षा के लिए श्रेणीवार शुल्क निर्धारित कर रखा है। जिसके अनुपालन की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की है। जिले में विभागीय अफसर इससे बेखबर हैं, नतीजा स्कूल संचालक खुलेआम दो-तीन गुना वसूली कर जेब भरते जा रहे हैं। कोई भविष्य बर्बाद करने की बात कह छात्रों से फीस वसूल रहा है तो कोई परीक्षा में पास कराने की गारंटी के नाम पर मनमानी फीस ले रहा है। छात्रों के शोषण में वित्तविहीन स्कूल सबसे आगे हैं तो वित्तपोषित स्कूल भी किसी से कम नहीं। भनवापुर के एक स्कूल में छात्र से शुल्क वापसी का मामला सामने आ चुका है। मुख्यालय समेत डुमरियागंज, इटवा, शोहरतगढ़, बांसी, लोटन और बर्डपुर आदि क्षेत्रों में स्थापित स्कूलों में वसूली चरम पर है। नाम उजागर होने के दुष्प्रभाव से सहमे बच्चे चुप्पी साधे हैं। प्रकरण हर बच्चे-अभिभावक की जुबां पर है, लेकिन माध्यमिक शिक्षा विभाग न जाने क्यों इससे बेखबर है। इस बाबत डीआईओएस राजबहादुर मौर्य का कहना है कि पहले कोई शिकायत करे, तभी वह कुछ कर सकते हैं। ऐसे उन्हें क्या पता कि कौन स्कूल कितना फीस ले रहा है। वह न तो स्वत: संज्ञान ले सकते हैं और न ही दफ्तर से निकलकर जांच की फजीहत उठा सकते हैं।
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