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स्कूल के सामने कुंआ, तो स्कूल परिसर बना तालाब
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 13 Oct 2018 10:32 PM IST
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प्राथमिक विद्यालय चकफत्ताह के गेट के पास स्थित मौत का कुंआ।
- फोटो : अमर उजाला
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डुमरियागंज। ब्लॉक संसाधन केंद्र के प्राथमिक विद्यालय चकफत्ताह के विद्यार्थियों के साथ कभी भी अनहोनी की आशंका बनी रहती है। स्कूल गेट के ठीक सामने एक कुंआ है जिसमें कभी भी बच्चे गिर सकते हैं लिहाजा अभिभावक चिंतित हैं। स्कूल में 70 बच्चे पंजीकृत हैं।
प्रधानाध्यापक रामलगन ने बताया कि जब स्कूल बना था तो कुएं के चारों ओर ऊंचा चबूतरा बना था जिससे कोई खतरा नहीं था। मगर धीरे-धीरे चबूतरा टूट गया। इससे हर वक्त खतरे की आशंका बनी रहती है। स्कूल आने वाले बच्चों को हर समय कुंए के पास जाने से रोका जाता है। कई बार विभाग को पत्राचार भी किया गया। मगर कुंए का चबूतरा नहीं बन पाया है। गांव निवासी रामबहादुर, जयराम, रामकिशोर, रामबिलास और चंदादेवी ने कुंए का चबूतरा बनवाने की मांग की है।
इसी तरह क्षेत्र के परानपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में 65 बच्चे पंजीकृत हैं। बच्चों के लिए शौचालय और पेयजल के लिए इंडिया मार्का हैंडपंप-टू की भी व्यवस्था है। स्कूल के बरामदे से करीब सटा हुआ परिसर तालाब के शक्ल में तब्दील है। प्रधानाध्यापक धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि परिसर में जिस जगह पानी जमा है, वहां काफी गहरा है। कहा कि स्कूल में हमेशा अनहोनी की आशंका बनी रहती है। प्राथमिक विद्यालय के बगल स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में भी पेयजल संकट है। यहां के बच्चों को प्राइमरी स्कूल के हैंडपंप पर प्यास बुझाने जाना पड़ता है। डुमरियागंज खंड शिक्षाधिकारी चंद्रभूषण पांडेय ने बताया कि मामले की जानकारी है। विद्यालयों के सौंदर्यीकरण और मरम्मत का कार्य ग्राम पंचायतों द्वारा करवाया जा रहा है।
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प्रधानाध्यापक रामलगन ने बताया कि जब स्कूल बना था तो कुएं के चारों ओर ऊंचा चबूतरा बना था जिससे कोई खतरा नहीं था। मगर धीरे-धीरे चबूतरा टूट गया। इससे हर वक्त खतरे की आशंका बनी रहती है। स्कूल आने वाले बच्चों को हर समय कुंए के पास जाने से रोका जाता है। कई बार विभाग को पत्राचार भी किया गया। मगर कुंए का चबूतरा नहीं बन पाया है। गांव निवासी रामबहादुर, जयराम, रामकिशोर, रामबिलास और चंदादेवी ने कुंए का चबूतरा बनवाने की मांग की है।
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इसी तरह क्षेत्र के परानपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में 65 बच्चे पंजीकृत हैं। बच्चों के लिए शौचालय और पेयजल के लिए इंडिया मार्का हैंडपंप-टू की भी व्यवस्था है। स्कूल के बरामदे से करीब सटा हुआ परिसर तालाब के शक्ल में तब्दील है। प्रधानाध्यापक धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि परिसर में जिस जगह पानी जमा है, वहां काफी गहरा है। कहा कि स्कूल में हमेशा अनहोनी की आशंका बनी रहती है। प्राथमिक विद्यालय के बगल स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में भी पेयजल संकट है। यहां के बच्चों को प्राइमरी स्कूल के हैंडपंप पर प्यास बुझाने जाना पड़ता है। डुमरियागंज खंड शिक्षाधिकारी चंद्रभूषण पांडेय ने बताया कि मामले की जानकारी है। विद्यालयों के सौंदर्यीकरण और मरम्मत का कार्य ग्राम पंचायतों द्वारा करवाया जा रहा है।
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