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एसडीएम सदर करेंगे शिक्षिका हत्याकांड की जांच
Fri, 31 May 2019 11:27 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 31 May 2019 11:27 PM IST
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anjali
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। विकास खंड नौगढ़ अंतर्गत गौहनिया प्राथमिक विद्यालय में तैनात रही शिक्षिका अंजली यादव की मौत के मामले की जांच जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी सदर को सौंपी है। जांच रिपोर्ट 10 दिनों के भीतर सौंपने का निर्देश दिया है। यह निर्णय यदुवशंयी महासंघ के जिलाध्यक्ष राजेंद्र यादव और प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष राधेरमण त्रिपाठी के शिकायती पत्र पर लिया है।
बता दें कि गौहनिया प्राथमिक विद्यालय में तैनात रही जालौन जिले के हुसेपुरा तुरई थाना क्षेत्र के कुठौद निवासी शिक्षिका अंजली यादव की लाश 21 मई को उसके मोहान कस्बे स्थित किराए के मकान में जली हुई हालत में मिली थी। उसके गले में जंजीर बंधा था, जो उसके बेड में ताले से बंद था। साथ ही उसके पैर भी तार से बंधे थे। मामले में पुलिस लीपापोती करते हुए हत्या को आत्महत्या करार देते हुए खुलासा भी कर चुकी है। लेकिन इस बीच शिक्षक संगठन और यदुवंशीय महासंघ भी सामने आया। इसके बाद प्रशासन ने दबाव में जांच का यह फैसला लिया है। जांच की जिम्मेदारी नए सिरे से सदर एसडीएम को सौंपी गई है।
ऐसे में उम्मीद जगी है कि अंजली को न्याय मिल सकेगा। क्योंकि अंजली के आत्महत्या की बात परिजनों को भी नहीं पच रही थी। घटना के दूसरे दिन 22 मई को पिता अजय यादव और उसके चाचा के बेटे भी आए थे। और यह बात कह भी रहे थे कि अंजली आत्महत्या नहीं कर सकती है। वह काफी पढ़ी लिखी थी। पुलिस मामले में लीपापोती की है। उन्होंने जांच की मांग भी की थी। लेकिन गैर जनपद का निवासी होने के कारण पुलिस ने उनके मांगों को नजर अंदाज करते हुए आनन-फानन में खुलासा कर दिया। डीएम कुणाल सिल्कू ने बताया कि मामले की जांच सदर एसडीएम को सौंपी गई है। 10 दिनों के अंदर जांच रिपोर्ट मांगी गई है।
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बता दें कि गौहनिया प्राथमिक विद्यालय में तैनात रही जालौन जिले के हुसेपुरा तुरई थाना क्षेत्र के कुठौद निवासी शिक्षिका अंजली यादव की लाश 21 मई को उसके मोहान कस्बे स्थित किराए के मकान में जली हुई हालत में मिली थी। उसके गले में जंजीर बंधा था, जो उसके बेड में ताले से बंद था। साथ ही उसके पैर भी तार से बंधे थे। मामले में पुलिस लीपापोती करते हुए हत्या को आत्महत्या करार देते हुए खुलासा भी कर चुकी है। लेकिन इस बीच शिक्षक संगठन और यदुवंशीय महासंघ भी सामने आया। इसके बाद प्रशासन ने दबाव में जांच का यह फैसला लिया है। जांच की जिम्मेदारी नए सिरे से सदर एसडीएम को सौंपी गई है।
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ऐसे में उम्मीद जगी है कि अंजली को न्याय मिल सकेगा। क्योंकि अंजली के आत्महत्या की बात परिजनों को भी नहीं पच रही थी। घटना के दूसरे दिन 22 मई को पिता अजय यादव और उसके चाचा के बेटे भी आए थे। और यह बात कह भी रहे थे कि अंजली आत्महत्या नहीं कर सकती है। वह काफी पढ़ी लिखी थी। पुलिस मामले में लीपापोती की है। उन्होंने जांच की मांग भी की थी। लेकिन गैर जनपद का निवासी होने के कारण पुलिस ने उनके मांगों को नजर अंदाज करते हुए आनन-फानन में खुलासा कर दिया। डीएम कुणाल सिल्कू ने बताया कि मामले की जांच सदर एसडीएम को सौंपी गई है। 10 दिनों के अंदर जांच रिपोर्ट मांगी गई है।
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