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प्रोत्साहन के बाद भी घटा काला नमक का रकबा
siddharthnagar
Updated Mon, 22 Oct 2018 10:21 PM IST
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चावल
- फोटो : AmarUjala
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सिद्धार्थनगर। घाटे की खेती के कारण जिले में काला नमक धान की बुआई का रकबा साल दर साल घट रहा है। ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना में चयन के बाद उम्मीद जगी थी कि फिर जिले काला नमक की खुशबू बिखरेगी। पर, हकीकत में ऐसा होता नहीं दिख रहा है। आंकड़े इसकी तस्दीक करते हैं। पिछले वर्ष इस धान का रकबा 3,200 हेक्टेयर था और इस वर्ष घटकर यह 3,000 रह गया है। वहीं अगर दस वर्ष के आंकड़ों के पर गौर करें तो 27,000 हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है।
जिले के बड़े किसानों ने 3,000 हेक्टेयर में काला नमक धान की बुआई की है। समर्थन मूल्य घोषित न होने से ऐसा लग रहा है कि पिछली बार की ही तरह फिर फुटकर रेट में धान बेचना पड़ेगा। पालिया के किसान व जिला पंचायत सदस्य राघवेंद्र मिश्रा उर्फ गंगा मिश्रा ने बताया कि एक बीघा काला नमक धान बोने में छह से सात हजार की लागत आती है। ऐसे में अगर फुटकर बिक्री की जाती है, तो 3400 से 3600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिकता है। अगर सरकार 40 रुपये समर्थन मूल्य कर देती है, तो कुछ लाभ होगा। पूर्व प्रधान ओम प्रकाश यादव ने बताया कि करीब पांच साल पहले काला नमक धान आगरा भेजा जाता था। उस वक्त लागत मिल जाती थी। अब लागत न मिलने के कारण अब कम ही कालानमक धान की बुवाई की जाती है। सरकारी मदद की उम्मीद थी। लेकिन वह भी अब तक नहीं मिली। किसान सुनील यादव ने बताया कि पहले एक गांव में 100 एकड़ काला नमक का धान बोया जाता था। अब पांच से 10 एकड़ ही बो रहे हैं। सरकार द्वारा प्रोत्साहन न मिलने से किसानों का रुझान कम हुआ है। महेंद्र चौधरी ने बताया कि काला नमक जिले की पहचान थी। अगर समर्थन मूल्य लागू हो गया होता, तो 10 साल पहले वाली स्थिति आ जाती।
न बेहतर प्रोत्साहन मिला, न समर्थन मूल्य घोषित हुआ
सूबे में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में सरकार बनने के बाद काला नमक धान का चयन एक जिला एक उत्पाद योजना में हो तो गया, पर प्रोत्साहन के लिए पंफलेट बांटकर और काला नमक बोने की बात कहकर इतिश्री कर ली गई। न कोई कारगर योजना बनी न ही भविष्य की रणनीति बताई गई। प्रशासन ने 40 रुपये प्रति किलो समर्थन मूल्य देने का प्रस्ताव शासन को भेजा, जिस पर अब तक निर्णय नहीं हो सका। ऐसे में किसान पेशोपश है कि अगर साधारण धान के साथ कालानमक का समर्थन मूल्य रखा जाएगा, तो फिर लागत तक नहीं निकल पाएगी। डीएम कुणाल सिल्कू ने बताया कि सरकार को काला नमक धान को लेकर एक मॉडल प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें इस बात का जिक्र किया गया था कि कम से एक ऐसी योजना बने, जिससे किसान अपने काला नमक धान को एक सेंटर पर बेच सकें और उसे अधिक से अधिक राशि मिल सके। इस मामले में कुछ प्राइवेट कंपनियां आई थी, जो प्रति क्विंटल 2800 रुपये दे रही थी, उनसे 4,000 रुपये प्रति क्विंटल की मांग की गई थी। लेकिन कंपनियां तैयार नहीं हुई। समर्थन मूल्य के प्रस्ताव पर अब तक निर्णय नहीं हुआ है।
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अगस्त में शासन को चार हजार प्रति क्विंटल की दर से काला नमक धान का समर्थन मूल्य भेजा गया था। अब तक इस संबंध में न तो कोई घोषणा हुई है न ही कोई सूचना मिली है। पिछले दस सालों में काला नमक धान का रकबा घटकर 30 हजार से तीन हजार हेक्टेयर पर आ गया है।
- सीपी सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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जिले के बड़े किसानों ने 3,000 हेक्टेयर में काला नमक धान की बुआई की है। समर्थन मूल्य घोषित न होने से ऐसा लग रहा है कि पिछली बार की ही तरह फिर फुटकर रेट में धान बेचना पड़ेगा। पालिया के किसान व जिला पंचायत सदस्य राघवेंद्र मिश्रा उर्फ गंगा मिश्रा ने बताया कि एक बीघा काला नमक धान बोने में छह से सात हजार की लागत आती है। ऐसे में अगर फुटकर बिक्री की जाती है, तो 3400 से 3600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिकता है। अगर सरकार 40 रुपये समर्थन मूल्य कर देती है, तो कुछ लाभ होगा। पूर्व प्रधान ओम प्रकाश यादव ने बताया कि करीब पांच साल पहले काला नमक धान आगरा भेजा जाता था। उस वक्त लागत मिल जाती थी। अब लागत न मिलने के कारण अब कम ही कालानमक धान की बुवाई की जाती है। सरकारी मदद की उम्मीद थी। लेकिन वह भी अब तक नहीं मिली। किसान सुनील यादव ने बताया कि पहले एक गांव में 100 एकड़ काला नमक का धान बोया जाता था। अब पांच से 10 एकड़ ही बो रहे हैं। सरकार द्वारा प्रोत्साहन न मिलने से किसानों का रुझान कम हुआ है। महेंद्र चौधरी ने बताया कि काला नमक जिले की पहचान थी। अगर समर्थन मूल्य लागू हो गया होता, तो 10 साल पहले वाली स्थिति आ जाती।
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न बेहतर प्रोत्साहन मिला, न समर्थन मूल्य घोषित हुआ
सूबे में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में सरकार बनने के बाद काला नमक धान का चयन एक जिला एक उत्पाद योजना में हो तो गया, पर प्रोत्साहन के लिए पंफलेट बांटकर और काला नमक बोने की बात कहकर इतिश्री कर ली गई। न कोई कारगर योजना बनी न ही भविष्य की रणनीति बताई गई। प्रशासन ने 40 रुपये प्रति किलो समर्थन मूल्य देने का प्रस्ताव शासन को भेजा, जिस पर अब तक निर्णय नहीं हो सका। ऐसे में किसान पेशोपश है कि अगर साधारण धान के साथ कालानमक का समर्थन मूल्य रखा जाएगा, तो फिर लागत तक नहीं निकल पाएगी। डीएम कुणाल सिल्कू ने बताया कि सरकार को काला नमक धान को लेकर एक मॉडल प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें इस बात का जिक्र किया गया था कि कम से एक ऐसी योजना बने, जिससे किसान अपने काला नमक धान को एक सेंटर पर बेच सकें और उसे अधिक से अधिक राशि मिल सके। इस मामले में कुछ प्राइवेट कंपनियां आई थी, जो प्रति क्विंटल 2800 रुपये दे रही थी, उनसे 4,000 रुपये प्रति क्विंटल की मांग की गई थी। लेकिन कंपनियां तैयार नहीं हुई। समर्थन मूल्य के प्रस्ताव पर अब तक निर्णय नहीं हुआ है।
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अगस्त में शासन को चार हजार प्रति क्विंटल की दर से काला नमक धान का समर्थन मूल्य भेजा गया था। अब तक इस संबंध में न तो कोई घोषणा हुई है न ही कोई सूचना मिली है। पिछले दस सालों में काला नमक धान का रकबा घटकर 30 हजार से तीन हजार हेक्टेयर पर आ गया है।
- सीपी सिंह, जिला कृषि अधिकारी