{"_id":"5ac3c6624f1c1bcb618b52bd","slug":"151522779746-siddharthnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"खांसी का सीरप है न ही टेबलेट दवाओं के लिए भटक रहे मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खांसी का सीरप है न ही टेबलेट दवाओं के लिए भटक रहे मरीज
siddharthnagar
Updated Wed, 04 Apr 2018 12:16 AM IST
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर के जिला अस्पताल में लगी मरीजों की लगी भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिद्धार्थनगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निरीक्षण में सर्व सुविधायुक्त दिखने वाले जिला अस्पताल की हकीकत 24 घंटे बाद ही सामने आ गई। हाल यह है अस्पताल में न तो कफ सीरप है और न ही एंटीबायोटिक दवाइयां। पेन किलर, दस्त आदि की भी दवाइयां मरीजों को बाहर से लेनी पड़ी। मंगलवार को दिन भर यही स्थिति रही। कई मरीजों को पैरासिटामॉल भी नहीं मिल सकी। हालांकि बाद में स्टोर में उपलब्ध कुछ दवाइयों को लाकर वितरण किया गया।
देश के 115 अति पिछड़े जिलों में शामिल सिद्धार्थनगर को मुख्य धारा में लाने के लिए सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों पर विशेष ध्यान दे रही है।
सोमवार को मुख्यमंत्री ने भी मंच से यह ऐलान किया। उनके जाने के एक दिन बाद ही दवाओं की कमी का मामला सामने आया है। सौ बेड के जिला संयुक्त चिकित्सालय में ही वह दवाएं उपलब्ध नहीं है, जिनकी इन दिनों सर्वाधिक डिमांड है। जिला अस्पताल की ओपीडी में हर रोज करीब 700 मरीज आते हैं। इनमें ज्यादातर सर्दी-खांसी, बुखार जैसी अन्य वायरल से पीड़ित होते हैं। इनके इलाज एंटी बॉयोटिक, पैरासिटामॉल जैसी दवाएं बेहद उपयोगी हैं। बावजूद अस्पताल में यह नदारद रहीं। नगर निवासी मालती देवी ने बताया कि आंख में इंफेक्शन का उपचार कराने आई थी। डॉक्टर ने आई ड्राप के साथ पैरासिटामाल लिखा था। आईड्राप तो मिल गया, जबकि पैरासिटामाल बाहर से खरीदनी पड़ी। बच्चे को दिखाने आए सलीम को खांसी की दवा खरीदने बाहर जाना पड़ा। कहा कि सीएम के निरीक्षण में तो यहां सब कुछ बेहतर था, फिर अचानक से दवाइयां कहां चली गई। कुछ ऐसी ही दुश्वारी दिनेश, जोगिया की कवलपत्ती, परवेज आदि मरीजों के भी रहे। सीएमएस डॉ.रोचस्मति पांडेय का कहना था कि कुछ दवाएं खत्म हुई हैं, जिन्हें मंगाया जा रहा है। फिलहाल लखनऊ आई हूं। वहां से लौटने के बाद ही विस्तृत जानकारी दे सकूंगी।
विज्ञापन
सीएम के निरीक्षण पर बाहर से लाई गई थी दवा
मुख्यमंत्री ने सोमवार को जिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों से दवाओं के बारे में भी पूछताछ की, जिस पर मरीजों ने दवाइयां मिलने की बात स्वीकार की थी। विभागीय सूत्रों की मानें तो सीएम के निरीक्षण से पहले ही यह दवाएं खत्म हो चुकी थीं। उनकी निगाह में सब बेहतर दिखाने के लिए ही आनन-फानन में जिम्मेदारों ने अपने स्तर से बाहर से दवा खरीदकर मरीजों को दी थी, जिससे वह शिकायत न कर सकें। उनके जाते ही हकीकत सामने आ गई।
यह दवाएं उपलब्ध नहीं
जिला अस्पताल में कफ सिरप, टेबलेट, कैल्शियम टेबलेट, बच्चों के लिए एंटीबायोटिक सिरप, एनालजेसिक (पेनकिलर), पेट दर्द की दवा, एंटीबायोटिक सिप्रो (सिर्फ इमरजेंसी के लिए है), बड़ों के लिए दस्त की दवा सहित अन्य दवाएं मौजूद नहीं हैं।
विज्ञापन
देश के 115 अति पिछड़े जिलों में शामिल सिद्धार्थनगर को मुख्य धारा में लाने के लिए सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों पर विशेष ध्यान दे रही है।
विज्ञापन
सोमवार को मुख्यमंत्री ने भी मंच से यह ऐलान किया। उनके जाने के एक दिन बाद ही दवाओं की कमी का मामला सामने आया है। सौ बेड के जिला संयुक्त चिकित्सालय में ही वह दवाएं उपलब्ध नहीं है, जिनकी इन दिनों सर्वाधिक डिमांड है। जिला अस्पताल की ओपीडी में हर रोज करीब 700 मरीज आते हैं। इनमें ज्यादातर सर्दी-खांसी, बुखार जैसी अन्य वायरल से पीड़ित होते हैं। इनके इलाज एंटी बॉयोटिक, पैरासिटामॉल जैसी दवाएं बेहद उपयोगी हैं। बावजूद अस्पताल में यह नदारद रहीं। नगर निवासी मालती देवी ने बताया कि आंख में इंफेक्शन का उपचार कराने आई थी। डॉक्टर ने आई ड्राप के साथ पैरासिटामाल लिखा था। आईड्राप तो मिल गया, जबकि पैरासिटामाल बाहर से खरीदनी पड़ी। बच्चे को दिखाने आए सलीम को खांसी की दवा खरीदने बाहर जाना पड़ा। कहा कि सीएम के निरीक्षण में तो यहां सब कुछ बेहतर था, फिर अचानक से दवाइयां कहां चली गई। कुछ ऐसी ही दुश्वारी दिनेश, जोगिया की कवलपत्ती, परवेज आदि मरीजों के भी रहे। सीएमएस डॉ.रोचस्मति पांडेय का कहना था कि कुछ दवाएं खत्म हुई हैं, जिन्हें मंगाया जा रहा है। फिलहाल लखनऊ आई हूं। वहां से लौटने के बाद ही विस्तृत जानकारी दे सकूंगी।
विज्ञापन
सीएम के निरीक्षण पर बाहर से लाई गई थी दवा
मुख्यमंत्री ने सोमवार को जिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों से दवाओं के बारे में भी पूछताछ की, जिस पर मरीजों ने दवाइयां मिलने की बात स्वीकार की थी। विभागीय सूत्रों की मानें तो सीएम के निरीक्षण से पहले ही यह दवाएं खत्म हो चुकी थीं। उनकी निगाह में सब बेहतर दिखाने के लिए ही आनन-फानन में जिम्मेदारों ने अपने स्तर से बाहर से दवा खरीदकर मरीजों को दी थी, जिससे वह शिकायत न कर सकें। उनके जाते ही हकीकत सामने आ गई।
यह दवाएं उपलब्ध नहीं
जिला अस्पताल में कफ सिरप, टेबलेट, कैल्शियम टेबलेट, बच्चों के लिए एंटीबायोटिक सिरप, एनालजेसिक (पेनकिलर), पेट दर्द की दवा, एंटीबायोटिक सिप्रो (सिर्फ इमरजेंसी के लिए है), बड़ों के लिए दस्त की दवा सहित अन्य दवाएं मौजूद नहीं हैं।