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बालू खनन पर रोक से थम गई भवन निर्माण की रफ्तार
Updated Tue, 06 Jun 2017 10:32 PM IST
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खनन पर रोक से थमी भवन निर्माण की रफ्तार
सिद्धार्थनगर। बालू खनन पर सरकार के सख्त रवैए से भवन निर्माण की रफ्तार थम गई है। निर्माण कार्य ठप होने से मजदूरों और राजगीर मिस्त्री के रोजगार पर संकट मंडराने लगा है। बालू नहीं होने से जो निर्माण हो भी रहे थे, वह ठप पड़ गए हैं। इससे जहां एक तरफ मकान निर्माण में देरी हो रही है। वहीं, दूसरी ओर रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। इससे मकान बनवाने वाले और मजदूर दोनों परेशान हैं।
नई सरकार बनने के बाद अवैध बालू खनन पर पूरी तरह अंकुश लग गया है। खनन का नया पट्टा न होने से नादियों से वैध तरीके से बालू निकासी भी बंद है। बालू नहीं मिलने निर्माणाधीन सरकारी व गैर सरकारी भवनों का कार्य अधर में अटक गया है। अधिकांश मजदूर घर बैठने को विवश हो गए हैं तो वहीं अधिकांश मजदूर अन्य प्रांतों की ओर रूख करने का मन बना रहे हैं। सिसवा बुजुर्ग निवासी राजगीर मिस्त्री चिन्नू यादव कहते हैं बालू नहीं मिलने से भवन निर्माण का कार्य ठप हो गया है। एक मकान का ठेका लिए थे, लेकिन आधे में निर्माण कार्य रोकना पड़ा।
ढाई माह हो गए अभी तक काम नहीं मिला है। प्रतिदिन 400 से 500 रुपये का नुकसान हो रहा है। करौंदा मसिना निवासी विनोद कुमार कहते हैं सरकार के निर्णय से हमारे रोजी-रोट पर संकट आ गया है। दैनिक मजदूरी करने वाले सिसवा बुजुर्ग निवासी पप्पू व बउदू कहते हैं कि बालू न मिलने से निर्माण कार्य ठप हुआ तो काम की भी दिक्कत हो गई है। मकान बनने से आसपास के गांवों में काम मिल जाता था, लेकिन दो माह से जो मकान बन रहे थे उनका काम भी बंद है। जाने पर यही कहा जाता है बालू आ जाएगा, तब निर्माण कार्य शुरू होगा। रोजी-रोटी की समस्या गहराती जा रही है।
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सिद्धार्थनगर। बालू खनन पर सरकार के सख्त रवैए से भवन निर्माण की रफ्तार थम गई है। निर्माण कार्य ठप होने से मजदूरों और राजगीर मिस्त्री के रोजगार पर संकट मंडराने लगा है। बालू नहीं होने से जो निर्माण हो भी रहे थे, वह ठप पड़ गए हैं। इससे जहां एक तरफ मकान निर्माण में देरी हो रही है। वहीं, दूसरी ओर रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। इससे मकान बनवाने वाले और मजदूर दोनों परेशान हैं।
नई सरकार बनने के बाद अवैध बालू खनन पर पूरी तरह अंकुश लग गया है। खनन का नया पट्टा न होने से नादियों से वैध तरीके से बालू निकासी भी बंद है। बालू नहीं मिलने निर्माणाधीन सरकारी व गैर सरकारी भवनों का कार्य अधर में अटक गया है। अधिकांश मजदूर घर बैठने को विवश हो गए हैं तो वहीं अधिकांश मजदूर अन्य प्रांतों की ओर रूख करने का मन बना रहे हैं। सिसवा बुजुर्ग निवासी राजगीर मिस्त्री चिन्नू यादव कहते हैं बालू नहीं मिलने से भवन निर्माण का कार्य ठप हो गया है। एक मकान का ठेका लिए थे, लेकिन आधे में निर्माण कार्य रोकना पड़ा।
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ढाई माह हो गए अभी तक काम नहीं मिला है। प्रतिदिन 400 से 500 रुपये का नुकसान हो रहा है। करौंदा मसिना निवासी विनोद कुमार कहते हैं सरकार के निर्णय से हमारे रोजी-रोट पर संकट आ गया है। दैनिक मजदूरी करने वाले सिसवा बुजुर्ग निवासी पप्पू व बउदू कहते हैं कि बालू न मिलने से निर्माण कार्य ठप हुआ तो काम की भी दिक्कत हो गई है। मकान बनने से आसपास के गांवों में काम मिल जाता था, लेकिन दो माह से जो मकान बन रहे थे उनका काम भी बंद है। जाने पर यही कहा जाता है बालू आ जाएगा, तब निर्माण कार्य शुरू होगा। रोजी-रोटी की समस्या गहराती जा रही है।
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