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एससी-एसटी एक्ट में संशोधन जरूरी था : बृजलाल

Wed, 21 Nov 2018 10:40 PM IST
siddharthnagar
siddharthnagar Updated Wed, 21 Nov 2018 10:40 PM IST
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it is necessary to change in sc-st act
सिद्धार्थनगर। प्रदेश में मुख्यत: तीन आयोग हैं। महिला, पिछड़ा और एससी-एसटी। महिला आयोग के प्रमुख पदों पर महिलाएं, पिछड़ा वर्ग आयोग में पिछड़े वर्ग से जुड़े लोग आसीन होते हैं, एससी-एसटी आयोग के मामले में पहले ऐसा नहीं था। प्रदेश में भाजपा की सरकार आने के बाद इसमें सुधार हुआ। ये बातें एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष और पूर्व डीजीपी बृजलाल ने बुधवार को पीडब्ल्यू रेस्ट हाउस में पत्रक ार वार्ता के दौरान कहीं।
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बसपा मुखिया मायावती पर हमला बोलते हुए बृजलाल ने कहा कि वे दलितों की सबसे बड़ी हितैषी होने का दावा करती हैं। उन्होंने ने ही अपने शासनकाल में कानून बदलकर एससी-एसटी आयोग में गैर दलितों को प्रमुख पदों पर आसीन करने का रास्ता साफ किया था। विपक्ष केंद्र द्वारा एससी-एसटी एक्ट में किए गए संशोधन पर भ्रम फैला रहा है। पहले से ही नियम है कि सात वर्ष तक की सजा वाले अपराध में आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी नहीं हो सकती। ऐसे में इस कानून के तहत फौरन गिरफ्तारी की बात कहा हैं। एक्ट में जो संशोधन हुआ वह जरूरी था। वर्तमान सरकार ने दलित उत्पीड़न के मामलों में पीड़ितों को मिलने वाली सहायता राशि चार गुना बढ़ा दी है। संशोधित एक्ट का ही नतीजा है कि एक पुराने मामले में पूर्व मंत्री आजम खां पर अब जाकर मुकदमा दर्ज हुआ है। भाजपा सरकार में दलितों का सम्मान बढ़ा है।
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