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निमयों को दरकिनार कर बन रहे भवन
Updated Sat, 14 Jul 2018 11:13 PM IST
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business man house
- फोटो : amar ujala
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सिद्धार्थनगर। भूकंप की दृष्टि से जनपद बेहद संवेदनशील है। खतरा भूकंप से ही नहीं बल्कि बाढ़ व आग से भी है। बाढ़ भी हर साल तबाही मचाती है। ऐसे में तराई के इस जिले में एनबीसी (राष्ट्रीय भवन संहिता) का विशेष तौर पर पालन करना है। लेकिन जिले में इसका पालन न तो विभाग करा पा रहा है और न ही लोग खुद भी इसे लेकर जागरूक हैं। यही वजह है कि नियम को दरकिनार कर सरकारी या कारोबारी भवनों का निर्माण तेजी से हो रहा है।
500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल से अधिक अथवा 15 मीटर ऊंचाई से अधिक आवासीय भवनों में अग्निशमन के पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए। भवन एनसीबी के मानक के अनुरूप ही बनने चाहिए। इसके लिए बकायदा सरकार ने 30 अक्टूबर 2005 को एनसीबी के तहत कानून बनाया लेकिन विभाग को इसकी याद आज तक नहीं आई है। जबकि नियम के तहत यह बताया गया है कि भवनों की कुल नौ श्रेणियां हैं। इसमें एजुकेशनल, इंडस्ट्रीयल, मर्केटाइल, इंस्टीट्यूशनल, एसेंबली बिल्डिंग, बिजनेस बिल्डिंग, स्टोरेज बिल्डिंग, हिजार्डेस। जिले में सभी प्रकार के भवन हैं भी। इसमें सर्वाधिक आवासीय मकान है। स्थिति ऐसी है कि कई आवासीय मकानों में शिक्षा, स्वास्थ्य व इंस्टीट्यूट, स्टोर व बिजनेस के कार्य हो रहे हैं। लेकिन इस पर विभाग की नजर नहीं पड़ रही है। जिले के कई बड़े प्राइवेट स्कूल व सरकारी कार्यालय ऐसे हैं जहां पर सीढ़ियों की लेंथ तक तय नहीं है। यहां तक कि लोग बाढ़ग्रस्त इलाके में भी नियम को ताक पर रखकर स्कूलों का निर्माण करा दिए हैं। इसमें शिक्षा विभाग की सहभागिता भी रही है। यही वजह है कि पकड़ी क्षेत्र में स्थित करीब आधा दर्जन स्कूल बाढ़ग्रस्त इलाके में हैं। इसे लेकर करोड़ों की लागत से बन रहे दो स्कूलों को पूर्व में नोटिस भी भेजा जा चुका है। लेकिन अब तक कार्रवाई क्या हुई। यह किसी को पता ही नहीं है। इस संबंध में एडीएम प्रमोद शंकर शुक्ल ने बताया कि राष्ट्रीय भवन संहिता का पूरा पालन कराया जाएगा। समय-समय पर अभियान चलाकर इसकी चेकिंग भी की जाएगी। भवन एनसीबी के मानक न होने पर कार्रवाई भी जाएगी।
अपने-अपने विभाग जारी करते हैं एनओसी
सुरक्षित भवनों के निर्माण के लिए फायर सर्विस की वेबसाइट पर एनओसी अप्लाई करने का नियम है। इसके अलावा निजी अस्पताल के लिए सीएमओ, प्राइवेट विद्यालयों के लिए डीआईओएस जारी करते हैं। इनके चेकिंग की जिम्मेदारी अग्निशमन विभाग की है।
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500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल से अधिक अथवा 15 मीटर ऊंचाई से अधिक आवासीय भवनों में अग्निशमन के पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए। भवन एनसीबी के मानक के अनुरूप ही बनने चाहिए। इसके लिए बकायदा सरकार ने 30 अक्टूबर 2005 को एनसीबी के तहत कानून बनाया लेकिन विभाग को इसकी याद आज तक नहीं आई है। जबकि नियम के तहत यह बताया गया है कि भवनों की कुल नौ श्रेणियां हैं। इसमें एजुकेशनल, इंडस्ट्रीयल, मर्केटाइल, इंस्टीट्यूशनल, एसेंबली बिल्डिंग, बिजनेस बिल्डिंग, स्टोरेज बिल्डिंग, हिजार्डेस। जिले में सभी प्रकार के भवन हैं भी। इसमें सर्वाधिक आवासीय मकान है। स्थिति ऐसी है कि कई आवासीय मकानों में शिक्षा, स्वास्थ्य व इंस्टीट्यूट, स्टोर व बिजनेस के कार्य हो रहे हैं। लेकिन इस पर विभाग की नजर नहीं पड़ रही है। जिले के कई बड़े प्राइवेट स्कूल व सरकारी कार्यालय ऐसे हैं जहां पर सीढ़ियों की लेंथ तक तय नहीं है। यहां तक कि लोग बाढ़ग्रस्त इलाके में भी नियम को ताक पर रखकर स्कूलों का निर्माण करा दिए हैं। इसमें शिक्षा विभाग की सहभागिता भी रही है। यही वजह है कि पकड़ी क्षेत्र में स्थित करीब आधा दर्जन स्कूल बाढ़ग्रस्त इलाके में हैं। इसे लेकर करोड़ों की लागत से बन रहे दो स्कूलों को पूर्व में नोटिस भी भेजा जा चुका है। लेकिन अब तक कार्रवाई क्या हुई। यह किसी को पता ही नहीं है। इस संबंध में एडीएम प्रमोद शंकर शुक्ल ने बताया कि राष्ट्रीय भवन संहिता का पूरा पालन कराया जाएगा। समय-समय पर अभियान चलाकर इसकी चेकिंग भी की जाएगी। भवन एनसीबी के मानक न होने पर कार्रवाई भी जाएगी।
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अपने-अपने विभाग जारी करते हैं एनओसी
सुरक्षित भवनों के निर्माण के लिए फायर सर्विस की वेबसाइट पर एनओसी अप्लाई करने का नियम है। इसके अलावा निजी अस्पताल के लिए सीएमओ, प्राइवेट विद्यालयों के लिए डीआईओएस जारी करते हैं। इनके चेकिंग की जिम्मेदारी अग्निशमन विभाग की है।
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