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बाढ़ क्षेत्रों में बांटी जा रही दवा से नहीं मिल रही राहत
Updated Mon, 04 Sep 2017 10:23 PM IST
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सिद्धार्थनगर। जिला अस्पताल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के मरीजों की तादाद में तेजी से इजाफा हो रहा है। सोमवार को अस्पताल में मरीजों की संख्या इतनी अधिक थी कि बैठने तक की जगह नहीं थी। लोग इधर-उधर खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
सभी डॉक्टरों के कक्ष के सामने मरीजों की लंबी लाइन लगी थी। अधिकांश मरीज बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के थे। एक हजार से अधिक मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और दवाएं दी गईं। कुछ मरीजों का कहना था कि जो दवा वितरित की गई थी, वह काम नहीं कर रही। जोगिया क्षेत्र के कुंवरापार से बेटी के इलाज को आई रेखा का कहना था कि गांव पानी में डूब गया था। राहत सामग्री के साथ जो दवा दी गई थी, उसे खान के बाद भी बुखार नहीं उतर रहा था। पानी हटने के बाद बेटी का इलाज कराने के लिए आई हूं। सूपा गांव निवासी ज्ञानमति और रेखा ने कहा कि कई दिनों से बुखार था। बाढ़ के कारण अस्पताल नहीं आ पा रही थी कुछ दवा मिला था, मगर बुखार उतर नहीं रहा इसलिए जिला अस्पताल आना पड़ा। सोमनाथ, लवकुश, ओमप्रकाश, रवींद्र कुमार, ढोड़े आदि भी बुखार, सर्दी व अन्य संक्रामक बीमारी से पीड़ित थे। दोपहर डेढ़ बजे तक अस्पताल में मेले जैसा नजरा था। पर्ची काउंटर से गेट तक मरीजों की लाइन लगी थी तो वहीं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय चौधरी, फिजिशियन डॉ. सीबी चौधरी और नेत्रालय कक्ष के सामने मरीजों की भारी भीड़ थी। जितने मरीज डॉक्टर के कक्ष में थे उससे कई गुना कक्ष के बाहर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। बालरोग के डॉक्टर के कक्ष के सामने कई बच्चे जमीन पर लेटाए हुए भी मिले। हर अस्पताल में हर तरफ कराहने की आवाज उठ रही थी। जैसे लग रहा था कि पूरा जिला बीमार हो चुका है। एक हजार से अधिक मरीजों ने ओपीडी में जांच करवाया। उधर, इमरजेंसी में भी 50 से अधिक मरीज पहुंचे।
नहीं लग रहा संक्रामक बीमारी पर अंकुश
जिला अस्पताल में मरीजों की बढ़ती तादाद यह बयां कर रही है कि प्रशासन ने बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में राहत सामग्री तो वितरण करवा दिया। मगर इसके बाद उपज रही संक्रामक बीमारी पर काबू पाने के लिए ठोस पहल नहीं कर पा रहा है। इसी वजह से लोग तेजी से बीमार हो रहे हैं।
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सभी डॉक्टरों के कक्ष के सामने मरीजों की लंबी लाइन लगी थी। अधिकांश मरीज बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के थे। एक हजार से अधिक मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और दवाएं दी गईं। कुछ मरीजों का कहना था कि जो दवा वितरित की गई थी, वह काम नहीं कर रही। जोगिया क्षेत्र के कुंवरापार से बेटी के इलाज को आई रेखा का कहना था कि गांव पानी में डूब गया था। राहत सामग्री के साथ जो दवा दी गई थी, उसे खान के बाद भी बुखार नहीं उतर रहा था। पानी हटने के बाद बेटी का इलाज कराने के लिए आई हूं। सूपा गांव निवासी ज्ञानमति और रेखा ने कहा कि कई दिनों से बुखार था। बाढ़ के कारण अस्पताल नहीं आ पा रही थी कुछ दवा मिला था, मगर बुखार उतर नहीं रहा इसलिए जिला अस्पताल आना पड़ा। सोमनाथ, लवकुश, ओमप्रकाश, रवींद्र कुमार, ढोड़े आदि भी बुखार, सर्दी व अन्य संक्रामक बीमारी से पीड़ित थे। दोपहर डेढ़ बजे तक अस्पताल में मेले जैसा नजरा था। पर्ची काउंटर से गेट तक मरीजों की लाइन लगी थी तो वहीं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय चौधरी, फिजिशियन डॉ. सीबी चौधरी और नेत्रालय कक्ष के सामने मरीजों की भारी भीड़ थी। जितने मरीज डॉक्टर के कक्ष में थे उससे कई गुना कक्ष के बाहर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। बालरोग के डॉक्टर के कक्ष के सामने कई बच्चे जमीन पर लेटाए हुए भी मिले। हर अस्पताल में हर तरफ कराहने की आवाज उठ रही थी। जैसे लग रहा था कि पूरा जिला बीमार हो चुका है। एक हजार से अधिक मरीजों ने ओपीडी में जांच करवाया। उधर, इमरजेंसी में भी 50 से अधिक मरीज पहुंचे।
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नहीं लग रहा संक्रामक बीमारी पर अंकुश
जिला अस्पताल में मरीजों की बढ़ती तादाद यह बयां कर रही है कि प्रशासन ने बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में राहत सामग्री तो वितरण करवा दिया। मगर इसके बाद उपज रही संक्रामक बीमारी पर काबू पाने के लिए ठोस पहल नहीं कर पा रहा है। इसी वजह से लोग तेजी से बीमार हो रहे हैं।
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