{"_id":"5a43d8ea4f1c1bce6d8b67a7","slug":"121514395882-siddharthnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुद्ध भूमि जैसी शांति दुनिया में कहीं नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुद्ध भूमि जैसी शांति दुनिया में कहीं नहीं
Updated Thu, 28 Dec 2017 12:09 AM IST
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर में चल रहे कपिलवस्तु महोत्सव में आए निजामी बंधु क्रमश:शादाब फरीदी, चांद निजामी व शोहराब फरीदी ने अमर उजाला से खास बातचीत की।
- फोटो : amaruaja
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। प्रख्यात कव्वाल निजामी बंधु ने बुद्ध भूमि पर आकर खुद को धन्य बताया है। उन्होंने कहा कि देश-दुनिया में तमाम जगहों पर वह घूमे, मगर बुद्ध भूमि जैसी शांति उन्हें कहीं नहीं मिली। महात्मा बुद्ध भगवान के अवतार हैं। अल्लाह के वली के रूप में वह धरती पर आए। उनकी जन्मस्थली पर आकर वह गौरवान्वित हैं। कपिलवस्तु महोत्सव की तीसरी शाम कव्वाली नाइट से पहले निजामी बंधुओं ने ‘अमर उजाला’ से विस्तार से बातचीत की। आधुनिक और शास्त्रीय संगीत के विविध पहलुओें पर चर्चा की।
दस सदस्यीय टीम की अगुवाई कर रहे चांद निजामी ने शास्त्रीय संगीत को ही असल संगीत करार दिया है। कहा कि सूफी, भक्ति सहित संगीत के हर आयाम शास्त्रीय संगीत में समाहित है। यह मन को शांति और सुकून देता है। इससे इतर वेस्टर्न और पॉप संगीत क्षणिक है। उन्होंने कहा कि संगीत का कोई जाति-धर्म नहीं नहीं होता। पिछले सात सौ वर्षों से उनका कुनबा अजमेर के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में कव्वाली पेश करता रहा है। यह उनकी 14वीं पीढ़ि है। दुनिया के विभिन्न देशों में अलग-अलग धर्म और समुदाय के लोगों के बीच उन्होंने गायन किया, हर जगह बराबर प्यार और सम्मान मिला है। वर्ष 2006 में उन्होंने फिल्मों में गायन शुरू किया था। पहली फिल्म यहां थी। इसके बाद रॉक स्टार में एआर रहमान के साथ काम करने का मौका मिला। फिर बजरंगी भाईजान में भर दे झोली मेरी या मोहम्मद... गाने में प्रस्तुति दी। उनकी अगली फिल्म आजमगढ़ है, जो जल्द ही प्रदर्शित होगी। चांद निजामी ने बताया कि उनके साथ शादाब फरीदी, शोहराब फरीदी सहित 10 सदस्यीय टीम है। सभी एक ही कुनबे से हैं। अपने ननिहाल आगरा में पद्मश्री उस्ताद शराफत खान व लताउल्लाह खान के सानिध्य में उन्होंने गायन सीखा।
दस सदस्यीय टीम की अगुवाई कर रहे चांद निजामी ने शास्त्रीय संगीत को ही असल संगीत करार दिया है। कहा कि सूफी, भक्ति सहित संगीत के हर आयाम शास्त्रीय संगीत में समाहित है। यह मन को शांति और सुकून देता है। इससे इतर वेस्टर्न और पॉप संगीत क्षणिक है। उन्होंने कहा कि संगीत का कोई जाति-धर्म नहीं नहीं होता। पिछले सात सौ वर्षों से उनका कुनबा अजमेर के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में कव्वाली पेश करता रहा है। यह उनकी 14वीं पीढ़ि है। दुनिया के विभिन्न देशों में अलग-अलग धर्म और समुदाय के लोगों के बीच उन्होंने गायन किया, हर जगह बराबर प्यार और सम्मान मिला है। वर्ष 2006 में उन्होंने फिल्मों में गायन शुरू किया था। पहली फिल्म यहां थी। इसके बाद रॉक स्टार में एआर रहमान के साथ काम करने का मौका मिला। फिर बजरंगी भाईजान में भर दे झोली मेरी या मोहम्मद... गाने में प्रस्तुति दी। उनकी अगली फिल्म आजमगढ़ है, जो जल्द ही प्रदर्शित होगी। चांद निजामी ने बताया कि उनके साथ शादाब फरीदी, शोहराब फरीदी सहित 10 सदस्यीय टीम है। सभी एक ही कुनबे से हैं। अपने ननिहाल आगरा में पद्मश्री उस्ताद शराफत खान व लताउल्लाह खान के सानिध्य में उन्होंने गायन सीखा।
विज्ञापन