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महली सागर का भारत-नेपाल के अधिकारियों ने किया निरीक्षण
Updated Tue, 20 Nov 2018 10:49 PM IST
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भारत-नेपाल के इंजीनियरों ने किया महली सागर का निरीक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
शोहरतगढ़/खुनुवां। भारत और नेपाल के सिंचाई विभाग के इंजीनियरों ने मंगलवार को महली सागर का निरीक्षण किया। इस मौके पर दोनों देशों के संभ्रांत नागरिक के साथ नेपाल के कपिलवस्तु के विधानसभा दो के विधायक धर्म बहादुर श्रीवास्तक भी मौजूद रहे।
नेपाल के कपिलवस्तु जिले के सिंचाई विभाग के इंजीनियर आरबी यादव ने बताया कि महली सागर से सटे नो मेंस लैंड के नजदीक नेपाल सीमा में उसकी 288 बीघा जमीन महली सागर से जुड़ी हुई है। नेपाल सरकार चाहती है कि महली सागर का जलस्तर 288 बीघा जमीन के स्तर से ऊपर न हो, जिससे किसान खेती कर सकें। दोनों देश के अधिकारियों ने इस बात पर सहमति जताई है। इसके साथ ही पूर्व में बने बैराज पर लोगों के आवागमन हेतु छत ढालने व पानी के ठहराव के लिए गेट न लगाने का निर्णय किया गया। संयुक्त टीम ने कहा कि सागर में कितना फीट जल संग्रहण हो जिससे किसानों की फसल खराब न हो। यह तय होने पर भारत स्थित बैराज पर गेट लगाया जाएगा। संयुक्त टीम में सहायक अभियंता एमके रायजादा, जूनियर इंजीनियर एमटी राय, नेपाल के इंजीनियर माधव पौडेल समेत प्रधान सोलहू यादव, गोपाल प्रसाद पांड़ेय, शिवप्रसाद चतुर्वेदी, शिवपूजन, चिनकू चौरसिया, नरसिंह पांड़ेय, ललित साहनी, देहाती आदि मौजूद रहे।
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भारत-नेपाल के इंजीनियरों ने किया महली सागर का निरीक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
शोहरतगढ़/खुनुवां। भारत और नेपाल के सिंचाई विभाग के इंजीनियरों ने मंगलवार को महली सागर का निरीक्षण किया। इस मौके पर दोनों देशों के संभ्रांत नागरिक के साथ नेपाल के कपिलवस्तु के विधानसभा दो के विधायक धर्म बहादुर श्रीवास्तक भी मौजूद रहे।
नेपाल के कपिलवस्तु जिले के सिंचाई विभाग के इंजीनियर आरबी यादव ने बताया कि महली सागर से सटे नो मेंस लैंड के नजदीक नेपाल सीमा में उसकी 288 बीघा जमीन महली सागर से जुड़ी हुई है। नेपाल सरकार चाहती है कि महली सागर का जलस्तर 288 बीघा जमीन के स्तर से ऊपर न हो, जिससे किसान खेती कर सकें। दोनों देश के अधिकारियों ने इस बात पर सहमति जताई है। इसके साथ ही पूर्व में बने बैराज पर लोगों के आवागमन हेतु छत ढालने व पानी के ठहराव के लिए गेट न लगाने का निर्णय किया गया। संयुक्त टीम ने कहा कि सागर में कितना फीट जल संग्रहण हो जिससे किसानों की फसल खराब न हो। यह तय होने पर भारत स्थित बैराज पर गेट लगाया जाएगा। संयुक्त टीम में सहायक अभियंता एमके रायजादा, जूनियर इंजीनियर एमटी राय, नेपाल के इंजीनियर माधव पौडेल समेत प्रधान सोलहू यादव, गोपाल प्रसाद पांड़ेय, शिवप्रसाद चतुर्वेदी, शिवपूजन, चिनकू चौरसिया, नरसिंह पांड़ेय, ललित साहनी, देहाती आदि मौजूद रहे।
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